सेवा धर्म हमारा संस्थान सांचौर की सराहनीय पहल, 16 बच्चों का स्कूल में प्रवेश,चेहरों पर आई मुस्कान
सांचौर। सेवा धर्म हमारा संस्थान,सांचौर द्वारा संचालित बाल संस्कार केंद्र भील बस्ती, चितलवाना के बच्चों को शिक्षा से जोड़ने की दिशा में सराहनीय पहल करते हुए 16 बच्चों का प्रवेश…
निर्वाण प्राप्त आर्दश शिक्षक श्रद्धेय हुक्मा राम बरवड. (वरिष्ठ अध्यापक) का प्रथम परिनिर्वाण दिवस पर रक्तदान शिवर एवं श्रद्धांजलि सभा आयोजित
निवार्ण प्राप्त श्रद्धेय बरवड. के पुत्र दिनेश बरवड. ने पीसीबी स्कुल में दिया कम्प्युटर एवं प्रिंटर सेट चूरू। सुजानगढ पीसीबी राजकीय स्कूल में 07 अप्रैल 2026 मंगलवार को महावीर इंटरनेशनल…
“महापुरुषों की जयंती पर जुलूस: क्या यह वास्तविक जागरूकता है या केवल प्रतीकात्मक शक्ति प्रदर्शन मात्र?”
भूमिकाभारतीय समाज में वंचित वर्ग द्वारा अपने महापुरुषों—जैसे डॉ. भीमराव अंबेडकर, संत कबीर, संत रविदास और ज्योतिबा फुले—की जयंती पर जुलूस और रैलियां निकालना एक पुरानी रवायत (परंपरा) रही है।…
“डिजिटल युग में भ्रम और सच्चाई की जंग: यूट्यूबर्स पर अंधविश्वास के गंभीर परिणाम!”
डिजिटल क्रांति के इस दौर में सूचना का सबसे सशक्त और व्यापक माध्यम बन चुका YouTube आज हमारे जीवन का अभिन्न हिस्सा बन गया है। कभी यह मंच केवल मनोरंजन…
“मनुष्य-निर्मित समस्याएँ, ब्रह्मांड की निरपेक्षता और प्रकृति का शाश्वत संतुलन समझने का दार्शनिक दृष्टिकोण!”
भूमिका मानव सभ्यता ने समय के साथ विज्ञान, धर्म, अर्थव्यवस्था और राजनीति के जटिल ताने-बाने विकसित किए हैं, जिनमें उसकी आध्यात्मिक नैतिकता और जीवन जीने की कला धीरे-धीरे अनुभवों के…
“डॉ. अंबेडकर के छिपे हुए ऐतिहासिक तथ्य जो शिक्षा, न्याय और मानवाधिकार की क्रांति को उजागर करते हैं!?”
डॉ. भीमराव अंबेडकर का जीवन केवल संविधान निर्माण तक सीमित नहीं था, बल्कि वह एक व्यापक सामाजिक, आर्थिक और वैचारिक परिवर्तन की यात्रा थी। उनके अनेक ऐसे योगदान हैं जो…
डॉ भीमराव अंबेडकर संघर्ष समिति ने ज्योतिबा फुले जयंती मनाई।
बारा। डॉ भीमराव अंबेडकर संघर्ष समिति एवं अनुसूचित जाति जनजाति कर्मचारी समन्वय कल्याण समिति अटरू बारां के तत्वाधान में ज्योतिबा फुले जयंती का आयोजन डॉ अंबेडकर सामुदायिक भवन बस स्टैंड…
“अंबेडकर के विधिक ज्ञान, सामाजिक न्याय और नेतृत्व गुणों का आधुनिक भारत निर्माण में योगदान!”
भूमिका डॉ. भीमराव अंबेडकर केवल एक व्यक्ति नहीं, बल्कि एक विचार, एक संघर्ष और एक क्रांति का नाम हैं। उनका जीवन समाज में परिवर्तन की एक मजबूत धारा है। वे…
“जलियांवाला बाग हत्याकांड: क्रूर ब्रिटिश शासन की गोलियों के बीच बेगुनाह भारतीयों की शांतिपूर्ण भीड़ का रक्तरंजित अंत!”
भूमिका 13 अप्रैल 1919 को बैसाखी के पावन दिन जलियांवाला बाग में जो हुआ, वह केवल एक घटना नहीं, बल्कि भारतीय आत्मा पर लगा गहरा घाव था। यह वह दिन…
