मकराना। समता सैनिक दल तहसील शाखा मकराना के तत्वावधान में आज दिनांक 17/ 9 /2026 वार गुरुवार को Budsu स्थित समता सैनिक दल के कार्यालय में रामास्वामी पेरियार एवं अनागरिक नागरिक धर्मपाल बौद्ध की जयंती समारोह हर्षोल्लास पूर्वक मनाया गया।

समारोह का प्रारंभ भगवान बुद्ध, बाबा साहब डॉक्टर अंबेडकर एवं अन्य महापुरुष जिन्होंने समता के लिए आंदोलन किया उनके चित्र पर पुष्प एवं दीप जलाकर किया गया।

समारोह को मुख्य अतिथि समता सैनिक दल के प्रदेश महासचिव ओमप्रकाश कांसोटिया ने बताया कि अ नागरिक धर्मपाल बौद्ध ने भारत में बौद्ध धर्म के पवित्र स्थलों को पुनर्जीवित करने के लिए इन्होंने 1891 में महाबोधि सोसाइटी की स्थापना की। सदियों से उपेक्षित पड़े बोधगया महाबोधि विहार और सारनाथ जैसे ऐतिहासिक बौद्ध स्थलों को पुनर्जीवित करने और भगवान बुद्ध के क्षमता करुणा और मैत्री के संदेश को पूरी दुनिया में फैलाने के लिए इन्होंने ऐतिहासिक आंदोलन चलाया ।1893 में शिकागो में आयोजित विश्व धर्म संसद में इन्होंने एशिया और श्रीलंका के बौद्ध धर्म का प्रतिनिधित्व किया और पश्चिमी देशों में बौद्ध धर्म के विचारों का प्रचार किया ।

उनका मूल उद्देश्य बौद्ध धर्म को पुनर्जीवित एवं भगवान बुद्ध के धाम के संदेश को पूरी दुनिया में फैलाना था। कांसोटिया ने आगे बताया कि पेरियार ईवी रामास्वामी और बाबा साहब डॉक्टर अंबेडकर समकालीन भारत के दो सबसे बड़े सामाजिक क्रांतिकारी थे। हालांकि दोनों के कार्य क्षेत्र अलग थे लेकिन दोनों का अंतिम लक्ष्य एक ही था। जाति व्यवस्था का समूलनाश और ब्राह्मणवादी वर्चस्व का विरोध एवं दलितको उनका पूरा हक दिलाना इन दोनों के बीच में 1940 से 1954 के बीच ऐतिहासिक मुलाकाते हुई और उन मुलाकातों का उद्देश्य जातिवाद के खिलाफ संयुक्त मोर्चा बनना था ।बाबा साहब अंबेडकर और मोहम्मद अली जिन्ना के निमंत्रण पर पेरियार मुंबई गए वहां अंबेडकर और पेरियार की लंबी मुलाकात हुई। दोनों ने इस बात पर चर्चा की की कैसे इस जाति व्यवस्था से छुटकारा पाई जा सके। आज आवश्यकता इस बात की है कि हमारे महापुरुषों के बताए हुए मार्ग को हम आत्मसत कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे पेरियार एवं इस समाज को जातिवाद से मुक्ति दिलाई जा सके। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए दल के तहसील कमांडर किशन लाल जी गहलोत ने आनागरिक धर्मपाल एवं पेरियार के बारे में विस्तार से जानकारी दी। आज के कार्यक्रम में सुरेश बामनिया, बाबूलाल खारदिया,भंवरलाल लूना, सुरेश बोला,भंवरलाल सुवासिया , भोलाराम जी सुवासिया, जोधाराम जी बड़ा रिया,संदीप गुस्साईवल,अर्पिता सुहासिया, हनुमान परिहार,राजेंद्र सुवासिया के अलावा कई नागरिक एवं सैनिक उपस्थित थे ।
