Author: wp_client

आरक्षणीय हकों का खात्मा और ठेकेदारी प्रथा के साए में पिसता हुआ लाचार बहुजन समाज।

*आरक्षणीय हकों का खात्मा और ठेकेदारी प्रथा के साए में पिसता हुआ लाचार बहुजन समाज।**भूमिका:* फाइलों की चमक और बस्तियों का अंधेराआज जब देश की राजधानी में बैठकर नीति-निर्माता चमकती…

संसाधनों से वंचित बहुजन समाज अपनी प्रतिभा, शिक्षा, आत्मसम्मान और संघर्ष से सामाजिक असमानता की दीवारें तोड़े।

*संसाधनों से वंचित बहुजन समाज अपनी प्रतिभा, शिक्षा, आत्मसम्मान और संघर्ष से सामाजिक असमानता की दीवारें तोड़े।**भूमिका :* सबकी शुरुआत एक जैसी नहीं होती.समाज में कुछ लोगों को विरासत में…

अभावों के अंधेरे में जलती ममता की मशाल, जहाँ बहुजन वंचित की अनपढ़ माँ बनाती है औलाद की तकदीर

धूल और धूप के बीच उम्मीद की इबारतराजस्थान के अजमेर शहर की छाँव में, जहाँ एक तरफ सूफी दरगाह की मखमली गूँज हवाओं में तैरती है, वहीं दूसरी तरफ शहर…

अशिक्षित आँचल की छांव में पलते ज्ञान और त्याग के अनमोल अफ़साने

संस्कारों की छांव और उम्मीद की धूपराजस्थान के अजमेर शहर के बीचों बीच, जहाँ सूबे की मजार की गूँज (अजमेर की पहचान ख्वाजा साहब की उसी दरगाह से है, जो…

वंचित समाज के संस्कार: झूठी परंपराओं के जरिए आत्मसम्मान छीनने का खौफनाक खेल।

​परिचय: वंचित समाज के संस्कार: झूठी परंपराओं के जरिए आत्मसम्मान छीनने का खौफनाक खेल। ​परिचय:अदृश्य जंजीरों का खामोश दर्द​गुलामी सिर्फ लोहे की जंजीरों और पत्थरों की चारदीवारी तक सीमित नहीं…

बहुजन और वंचित समाज के युवा दिखावे की मानसिकता छोड़ें, आर्थिक आत्मनिर्भरता अपनाएँ और सम्मानजनक भविष्य बनाएँ।

भूमिका: संघर्ष से मिली सफलता को दिखावे की भेंट मत चढ़ाइए!बहुजन और वंचित समाज के जिन युवाओं ने अभाव, सामाजिक भेदभाव, अपमान और असुरक्षा के बीच शिक्षा प्राप्त करके नौकरी…

बहुजन और वंचित समाज के नौकरीपेशा साथियों, निराश मत होइए, नई तकनीक सीखिए और आत्मविश्वास से भविष्य सँवारिए।

आज बहुजन और वंचित समाज के अनेक युवक-युवतियाँ सरकारी तथा निजी क्षेत्रों में नौकरी कर रहे हैं। किसी के कंधों पर बूढ़े माता-पिता की जिम्मेदारी है, किसी को बच्चों की…

सदियों से पीड़ित बहुजन, वंचित समाज की भावनाओं से खेलते अंधविश्वास के सौदागर और धार्मिक ठेकेदार।

भूमिका:जब पीढ़ियों का दर्द विश्वास का सहारा खोजता है!बहुजन और वंचित समाज के बहुत से लोगों को विरासत में संपत्ति, संसाधन, सामाजिक प्रतिष्ठा और सुरक्षा नहीं मिली, बल्कि भेदभाव, अपमान,…

संवैधानिक संस्थाओं की स्वतंत्रता पर सवाल: चुनावों की पवित्रता से समझौता लोकतंत्र के लिए खतरे की घंटी

भूमिकालोकतंत्र केवल चुनाव नहीं, नागरिक अधिकारों की गारंटी भी है,भारत का संविधान प्रत्येक नागरिक को न्याय, स्वतंत्रता, समानता और गरिमा का अधिकार देता है। लोकतंत्र की वास्तविक शक्ति केवल प्रधानमंत्री,…

रूढ़ियों के अंधकार पर चेतना का प्रहार, इस्मत चुगताई का जीवन-संघर्ष, अनछुए तथ्य और प्रगतिशील बहुजन दृष्टि

लेखक (संकलन एवं प्रस्तुति)सोहनलाल सिंगारिया “हमारे ज़्यादातर पुराने रिवाज आदर पर नहीं, बल्कि डर पर टिके हैं— खुदा का डर, समाज का डर, बदनामी का डर। जो रिवाज आज़ाद दिमाग…