आरक्षणीय हकों का खात्मा और ठेकेदारी प्रथा के साए में पिसता हुआ लाचार बहुजन समाज।
*आरक्षणीय हकों का खात्मा और ठेकेदारी प्रथा के साए में पिसता हुआ लाचार बहुजन समाज।**भूमिका:* फाइलों की चमक और बस्तियों का अंधेराआज जब देश की राजधानी में बैठकर नीति-निर्माता चमकती…
