प्रिय ,
होने वाले जीवनसाथी,
मेरे भविष्य के साथी,
सादर नमस्कार।
आपके मन :स्थिति को मैं अच्छी तरह से समझ कर आपको यह बताना उचित समझती हूं कि बहुजन और वंचित समाज की स्त्री केवल घर की जिम्मेदारियाँ निभाने वाली एक साधारण महिला नहीं होती, बल्कि वह संघर्ष, त्याग, धैर्य और आत्मसम्मान की जीवित प्रतिमा होती है। सदियों से सामाजिक भेदभाव, आर्थिक अभाव और अपमान झेलते हुए भी उसने अपने परिवार और रिश्तों को टूटने नहीं दिया। वह जानती है कि उसके समाज का पुरुष बाहर की दुनिया में कितनी बार अपमानित होता है, कितनी बार उसे उसकी जाति, गरीबी और पहचान के कारण छोटा महसूस कराया जाता है। इसलिए वह अपने होने वाले पति को सबसे पहले यह समझाना चाहती है कि विवाह केवल अधिकार का रिश्ता नहीं, बल्कि दो घायल आत्माओं के सहारे का नाम होता है।
प्रिय पुरुष, मुझे पूरा विश्वास है कि आप गलत नहीं हैं। इस समाज ने आपको कई बार डराया, अपमानित किया और आपके आत्मविश्वास को तोड़ने की कोशिश की है। जब कोई इंसान बार-बार अपमान सहता है, तो वह भीतर से कमजोर और असुरक्षित महसूस करने लगता है। यही कारण है कि कभी-कभी आप अपने ही घर और अपने ही रिश्तों में भी डर और संकोच के साथ व्यवहार करते हैं। लेकिन मैं चाहती हूँ कि आप यह समझें कि आपकी पत्नी आपकी प्रतिद्वंद्वी नहीं, बल्कि आपकी सबसे बड़ी साथी होती है। वह आपके भीतर के डर को समझना चाहती है, न कि उसका मज़ाक उड़ाना चाहती है।
एक आदर्श दांपत्य जीवन केवल पैसे, घर और सुविधाओं से नहीं चलता। रिश्ते की असली नींव विश्वास, सम्मान और संवाद पर टिकती है। आपकी पत्नी आपसे महंगे गहनों या बड़े उपहारों की उम्मीद नहीं करती। वह सिर्फ इतना चाहती है कि आप उसकी छोटी-छोटी भावनाओं को समझें। जब वह थकी हो तो उसके चेहरे की उदासी पढ़ें, जब वह खुश हो तो उसकी मुस्कान में शामिल हों। कभी-कभी एक स्नेहभरा शब्द, एक छोटा सा धन्यवाद या उसके काम की प्रशंसा भी उसे भीतर तक मजबूत बना देती है। स्त्री को सबसे ज्यादा खुशी इस बात से मिलती है कि उसका जीवनसाथी उसे समझता है।
प्रिय साथी, यह मत सोचिए कि हर बार केवल आपको ही समझौता करना पड़ता है। एक सच्ची स्त्री भी हर दिन अपने सपनों, इच्छाओं और तकलीफों के साथ समझौता करती है। फर्क सिर्फ इतना है कि वह अक्सर अपने दर्द को मुस्कुराहट के पीछे छिपा लेती है। यदि कभी घर में मतभेद हो जाए, तो उसे युद्ध मत बनाइए। बैठकर बातचीत कीजिए, उसकी बात सुनिए और अपनी बात शांति से समझाइए। बहुजन समाज के रिश्तों की सबसे बड़ी ताकत यही रही है कि कठिन परिस्थितियों में भी लोग साथ खड़े रहते हैं। यही साथ विवाह को मजबूत बनाता है और परिवार को टूटने से बचाता है।
आपको यह समझना होगा कि एक स्त्री केवल युवावस्था की सुंदरता नहीं होती। समय के साथ उसका शरीर बदलता है, उसकी जिम्मेदारियाँ बढ़ती हैं और कई बार वह मानसिक तथा शारीरिक कठिन दौर से गुजरती है। मेनोपॉज़ भी ऐसा ही एक समय होता है, जब उसे सबसे ज्यादा भावनात्मक सहारे की जरूरत होती है। उस समय यदि उसका पति उसे समझे, उसका सम्मान करे और उसके भीतर के अकेलेपन को महसूस करे, तो वही रिश्ता जीवन का सबसे खूबसूरत रिश्ता बन जाता है। स्त्री उस पुरुष को कभी नहीं भूलती जो उसके कठिन समय में उसके साथ मजबूती से खड़ा रहता है।
आपको यह जानना बहुत जरूरी है कि बहुजन और वंचित समाज की स्त्री अपने पति में केवल पति नहीं, बल्कि एक ऐसा इंसान देखना चाहती है जो उसके आत्मसम्मान की रक्षा करे। वह नहीं चाहती कि उसका पति समाज के अपमान का गुस्सा घर की चारदीवारी में उस पर उतारे। बाहर की दुनिया यदि आपको सम्मान नहीं देती, तो कम से कम आपका घर ऐसा स्थान होना चाहिए जहाँ दोनों एक-दूसरे को सम्मान दें। जब पति अपनी पत्नी से डरने या उस पर शक करने के बजाय उसे अपना विश्वासपात्र बना लेता है, तब घर सचमुच स्वर्ग जैसा महसूस होने लगता है। रिश्ते में डर नहीं, भरोसा होना चाहिए।
प्रिय पुरुष, प्यार का अर्थ कभी भी परफेक्ट होना नहीं होता। कोई भी इंसान पूरी तरह निर्दोष नहीं होता। विवाह का मतलब यह नहीं कि दोनों हर समय एक-दूसरे से सहमत रहें। असली प्रेम वह होता है जिसमें दो लोग एक-दूसरे की कमजोरियों को स्वीकार करते हैं। यदि आपकी पत्नी कभी गुस्सा करे, उदास हो जाए या शिकायत करे, तो उसे दुश्मन मत समझिए। हो सकता है वह केवल यह चाहती हो कि आप उसे थोड़ा समय दें, उसकी बातें सुनें और यह एहसास कराएँ कि वह आपके जीवन में महत्वपूर्ण है। स्त्री का सबसे बड़ा आभूषण उसका सम्मान होता है।
आपको अपनी मम्मी और दादी से यह सीखने को जरूर मिला होगा कि बहुजन समाज के इतिहास में स्त्रियों ने हमेशा पुरुषों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर संघर्ष किया है। चाहे खेतों में मजदूरी हो, घर की जिम्मेदारी हो या बच्चों का भविष्य, उन्होंने हर मोर्चे पर साथ निभाया है। इसलिए विवाह में बराबरी की भावना बहुत जरूरी है। यदि पति अपनी पत्नी को केवल आदेश मानने वाली व्यक्ति समझेगा, तो रिश्ता धीरे-धीरे बोझ बन जाएगा। लेकिन यदि वह उसे अपना साथी मानेगा, उसके विचारों का सम्मान करेगा और निर्णयों में शामिल करेगा, तो वही परिवार आने वाली पीढ़ियों के लिए आदर्श बनेगा। सम्मान और साझेदारी ही रिश्ते की असली ताकत है।
आपसे ज्यादा उम्मीद रखकर आपको यह बताना चाहती हूं कि एक आदर्श स्त्री अपने पति से केवल इतना चाहती है कि वह उसके प्रेम को हल्के में न ले। जब कोई स्त्री सच्चे मन से प्रेम करती है, तो वह अपने जीवन की हर खुशी और हर संघर्ष उस रिश्ते के नाम कर देती है। वह अपने पति के टूटे हुए आत्मविश्वास को फिर से खड़ा कर सकती है, उसके भीतर नई उम्मीद जगा सकती है और उसे दुनिया से लड़ने की ताकत दे सकती है। लेकिन इसके लिए जरूरी है कि पति उसके प्रेम को समझे और उसकी भावनाओं की कद्र करे। जिस घर में स्त्री का सम्मान होता है, वही घर वास्तव में खुशहाल बनता है। अपने में अपने परिवार में ऐसा होते हुए जरूर देखा होगा।
मेरा भी ज्यादा अनुभव नहीं है अभी यौवन की दहलीज पर पहुंची हूं लेकिन फिर भी विवाह केवल दो व्यक्तियों का साथ नहीं, बल्कि दो संघर्षों, दो उम्मीदों और दो आत्माओं का मिलन होता है। बहुजन और वंचित समाज के पुरुष और स्त्री दोनों ही सामाजिक अन्याय के शिकार रहे हैं। इसलिए उन्हें एक-दूसरे के खिलाफ नहीं, बल्कि एक-दूसरे के साथ खड़ा होना चाहिए। यदि पति अपनी पत्नी को सम्मान, प्रेम, धैर्य और विश्वास देगा, तो वह स्त्री जीवन के अंतिम क्षण तक उसका साथ निभाएगी। सच्चा दांपत्य वही है जहाँ दोनों हर परिस्थिति में एक-दूसरे को चुनते रहें। यही प्रेम की सबसे बड़ी परिभाषा है और यही एक आदर्श जीवन की पहचान भी।
मैं आशा करती हूँ कि हम दोनों इस संघर्षपूर्ण समाज में एक-दूसरे की ताकत बनेंगे, कमजोरी नहीं।
आपका सम्मान, विश्वास और संवेदनशीलता ही हमारे रिश्ते की सबसे बड़ी पूँजी होगी।
ईश्वर करे हमारा आने वाला जीवन प्रेम, बराबरी, धैर्य और आत्मसम्मान से भरा रहे।
आपकी प्रतीक्षारत,
एक बहुजन वंचित समाज की युवती।
संकलनकर्ता

हगामी लाल
मेघवंशी ,
रिटायर्ड डिप्टी कमिश्नर, आध्यात्मिक और सामाजिक चिंतक। 9829 2 30966
स्रोत एवं संदर्भ :
शेरीन की थ्रेड्स पोस्ट से प्रेरित एवं
बहुजन समाज के सामाजिक अनुभव, स्त्री संवेदनाएँ, पारिवारिक संघर्ष, दांपत्य जीवन की वास्तविकताएँ और मानवीय रिश्तों की समझ।
