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” बहुजन वंचित समाज उठो, चुप्पी छोड़ो, अपमान का जवाब दो, अपनी ताकत पहचानो और आगे बढो !”

भारतीय समाज की परतों में गहराई तक जमी असमानता ने बहुजन और वंचित समाज के कर्मचारियों को केवल आर्थिक नहीं, बल्कि मानसिक और सामाजिक संघर्षों में भी जकड़ रखा है।…

“बहुजन वंचित समाज में आत्मसम्मान जागरण जरूरी, चुप्पी तोड़कर अधिकारों के लिए साहस से आगे बढ़ना होगा!”

बहुजन वंचित समाज का इतिहास केवल संघर्षों का नहीं, बल्कि भीतर जमी हुई हीनता की भावना का भी रहा है। बचपन से ही जब किसी व्यक्ति को यह महसूस कराया…

“राजनीति सेवा से कैरियर बनी, जनहित खोया, स्वार्थ और सत्ता की दौड़ ने मूल उद्देश्य बदले!?”

महात्मा गांधी राजनीति को जनसेवा का सर्वोच्च माध्यम मानते थे। उनके लिए सत्ता कोई लक्ष्य नहीं, बल्कि समाज के अंतिम व्यक्ति तक न्याय पहुँचाने का साधन थी। वे मानते थे…

समाज तभी आगे बढ़ता है जब हर व्यक्ति अपनी जिम्मेदारी को समझेंगे और उनका पालन करेंगे!

💥 सिर्फ सरकार से समाज नहीं बदलता – हम सबको मिलकर चलना पड़ता है। समाज को आगे बढ़ाने वाले 7 सबसे जरूरी काम 1. शिक्षा को हथियार बनाओपढ़ा-लिखा समाज किसी…

“बहुजन वंचित समाज अपने परिवार के प्रेम सम्मान को समझे और अपनापन सहेजकर आगे बढ़े!”

बहुजन वंचित समाज का व्यक्ति अक्सर एक ऐसे सामाजिक यथार्थ से गुजरता है, जहाँ उसे तथाकथित अभिजात वर्ग से सच्चा अपनापन नहीं मिलता। यह एक गहरी हकीकत (सत्य) है, जिसे…

सांचौर में बसपा की बैठक आयोजित,पांचाराम मेघवाल बनें विधानसभा अध्यक्ष

सांचौर। बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की विधानसभा स्तरीय बैठक मेघवाल छात्रावास, सांचौर में आयोजित हुई। बैठक में मुख्य अतिथि के रूप में हरि सिंह तेंगुरिया (प्रदेश प्रभारी) एवं लोकसभा जोन…

फर्जी खबरों का मायाजाल और वैज्ञानिक सोच को चुनौती

लेखकसोहनलाल सिंगारियासामाजिक-आर्थिक चिन्तक आज हम सूचना क्रांति के उस दौर में जी रहे हैं जहाँ जानकारी हमारी उंगलियों पर उपलब्ध है। लेकिन दुर्भाग्य यह है कि जिस गति से ज्ञान…

“डर और दबाव की शिक्षा: प्राइवेट स्कूलों के गलत इरादे और बच्चों का भविष्य खतरे में!?”

आज के समय में शिक्षा का स्वरूप चिंताजनक रूप से बदलता जा रहा है, जहाँ ज्ञान का स्थान ‘खौफ़’ (डर) और ‘प्रेशर’ (दबाव) ने ले लिया है। प्राइवेट स्कूलों में…

“बहुजन वंचित राजनीतिक चर्चाओं में उलझकर समय न गँवाएँ, अपने विकास और सम्मान की दिशा में आगे बढ़ें!'”

राजनीति को अक्सर एक ऐसा खेल माना जाता है जिसमें चालाक लोग अपनी रणनीतियों से जीत हासिल करते हैं, जबकि आम लोग केवल चर्चा में उलझे रहते हैं। बहुजन वंचित…

मानवता के नाम पर कलंक: सीवर की गंदगी में दम तोड़ती संवेदनाएं और वैश्विक परिप्रेक्ष्य

वाल्मीकि समाज के सफ़ाई कर्मी भाईयों एवम बहनों को सादर समर्पित लेखकसोहनलाल सिंगरियासामाजिक-आर्थिक चिन्तक डिस्क्लेमरयह लेख पूर्णतः सामाजिक विश्लेषण, मानवीय संवेदनाओं और अंतरराष्ट्रीय तुलनात्मक अध्ययन पर आधारित है। इसका उद्देश्य…