ड्यूटी के दौरान डॉक्टर तेजाराम ने किया रक्तदान, महिला को मिला नया जीवनदान
जोधपुर । डॉक्टर वास्तव में भगवान का ही रूप होते हैं, इसका उदाहरण जोधपुर मथुरादास माथुर अस्पताल में देखने को मिला। फलोदी के रिन मलार निवासी वासुदेव की पत्नी निरमा…
बहुजन समाज की आर्थिक और वैचारिक मुक्ति का घोषणापत्र(3 भागों में शब्द 3856)
प्रस्तावनाइतिहास गवाह है कि किसी भी समाज का पतन तब शुरू होता है जब उसकी मेहनत की कमाई का बड़ा हिस्सा उत्पादक कार्यों (शिक्षा, व्यापार, स्वास्थ्य) के बजाय अनुत्पादक आडंबरों…
धम्म-चेतना का शंखनाद बुद्ध की दस पारमिताएं और सामाजिक-आर्थिक न्याय का मार्ग
लेखकसोहनलाल सिंगारियासामाजिक-आर्थिक चिन्तक मानवता के इतिहास में तथागत बुद्ध का धम्म केवल एक आध्यात्मिक विचार नहीं, बल्कि एक संपूर्ण मनोवैज्ञानिक और सामाजिक क्रांति है। यह क्रांति किसी शस्त्र से नहीं,…
“बहुजन वंचित समाज आत्मपहचान से आत्मसम्मान जागृत करे, दूसरों की उपेक्षा और अपमान स्वतः अप्रभावी हो जाएंगे!”
भूमिकाभारत का बहुजन वंचित समाज सदियों से सामाजिक उपेक्षा, आर्थिक निर्भरता और मानसिक गुलामी का बोझ उठाता आया है। कथित उच्च वर्गों के व्यवहार ने उसके भीतर हीनता और भय…
“बहुजन और वंचित समाज के युवाओं की सबसे बड़ी ताकत — खुद पर अटूट विश्वास!”
भूमिका भारत के बहुजन और वंचित समाज का युवा केवल आर्थिक गरीबी से नहीं बल्कि मानसिक, सामाजिक और जातिगत संघर्षों से भी लड़ता है। उसे बचपन से यह महसूस कराया…
इंसान कोन—-
वह जो दिल किसी कादूखाता नही है।चोरी जूट कपट, हत्या लूट नफरत का विचार भीतर लाता नही है।। वह जोकरता है पालन नेतिकता का,जीता है जीवन सदाचार भरा। रह कर…
बहुजन समाज की प्रगति में बाधक: अंधविश्वास का समाजशास्त्र और आर्थिक विश्लेषण
लेखकसोहनलाल सिंगारियासामाजिक-आर्थिक चिन्तक डिस्क्लेमरप्रस्तुत लेख एक स्वतंत्र सामाजिक और आर्थिक विश्लेषण है। इसका उद्देश्य किसी भी धर्म, संप्रदाय, जाति या व्यक्तिगत आस्था को अपमानित करना नहीं है। लेख का मूल…
बहुजन समाज की प्रगति में बाधक: अंधविश्वास का समाजशास्त्र और आर्थिक विश्लेषण
लेखकसोहनलाल सिंगारियासामाजिक-आर्थिक चिंतक, ब्यावर, राजस्थान डिस्क्लेमरप्रस्तुत लेख एक स्वतंत्र सामाजिक और आर्थिक विश्लेषण है। इसका उद्देश्य किसी भी धर्म, संप्रदाय, जाति या व्यक्तिगत आस्था को अपमानित करना नहीं है। लेख…
“बहुजन वंचित समाज के युवाओं के लिए धैर्य, कानून और आत्मविश्वास सबसे बड़ी सामाजिक ताकत।”
भूमिका भारतीय समाज में आज भी लाखों लोग ऐसे हैं जिन्हें उनके नाम, प्रतिभा या मेहनत से नहीं, बल्कि उनकी जाति से पहचाना जाता है। वंचित समाज का बच्चा जब…
