प्रशासनिक निरंकुशता और शैक्षिक मूल्यों का क्षरणएक गंभीर आत्मचिंतन

संदर्भ: दैनिक भास्कर (ब्यावर-किशनगढ़ संस्करण), दिनांक 07 मई 2026, पृष्ठ संख्या 03 शिक्षा का आंगन वह पावन स्थल है जहाँ राष्ट्र के भविष्य का निर्माण होता है। किंतु जब इस…

“संविधान पंथनिरपेक्ष लेकिन समाज सांप्रदायिक, आखिर बुद्धिजीवी सच बोलने से डरते क्यों हैं?”

भूमिकाभारतीय लोकतंत्र केवल चुनावों की प्रक्रिया नहीं बल्कि विविधताओं के सम्मान की एक ऐतिहासिक व्यवस्था है। संविधान निर्माताओं ने भारत को पंथनिरपेक्ष राष्ट्र घोषित करते समय यह कल्पना की थी…

“बहुजन,वंचित समाज की नई ताकत, तर्क, प्रमाण, शिक्षा, जागरूकता, वैज्ञानिक सोच से बदलो भाग्य, बनाओ सशक्त भविष्य!”

भूमिकाभारत जैसा विशाल और विविध समाज केवल परंपराओं के सहारे आगे नहीं बढ़ सकता, उसे तर्क, समझ और प्रमाण की रोशनी की भी उतनी ही आवश्यकता है। वैज्ञानिक सोच केवल…

“दिखावे की देशभक्ति और भीतर की बेरुख़ी समाज में फैलते पाखंड की खतरनाक हकीकत!”

भूमिका समाज में संवेदनशीलता और समझदारी की बातें करने वाले लोग अक्सर अपने आचरण में उसका उल्टा प्रस्तुत करते हैं। यह विरोधाभास हमें उस दोहरी जिंदगी की ओर ले जाता…

सामाजिक न्याय के अग्रदूत राजर्षि छत्रपति शाहूजी महाराजमहापरिनिर्वाण दिवस 6 मई को सादर समर्पित

लेखकसोहनलाल सिंगरिया,सामाजिक-आर्थिक चिन्तक भारतीय इतिहास के पन्नों में कुछ नाम ऐसे होते हैं जो केवल शासन नहीं करते, बल्कि युग परिवर्तन का सूत्रपात करते हैं। राजर्षि छत्रपति शाहूजी महाराज (1874-1922)…

इतिहास का काला अध्याय: गौतम धर्मसूत्र और समानता का संवैधानिक संघर्ष

लेखकसोहनलाल सिंगारियासामाजिक-आर्थिक चिंतक “अन्याय को सहना उसे बढ़ावा देना है, और अज्ञानता उस गुलामी की पहली जंजीर है।” भारतीय सामाजिक इतिहास के पन्नों में उत्तर वैदिक काल (600-400 ईसा पूर्व)…

इतिहास के विस्मरण का परिणाम: कृतघ्न मानसिकता और संवैधानिक अधिकार

लेखकसोहनलाल सिंगारियासामाजिक-आर्थिक चिन्तक शिक्षा का उद्देश्य केवल साक्षर होना नहीं, बल्कि मनुष्य के भीतर की पशुता को मारकर मानवता को जाग्रत करना है। हाल ही में राजस्थान के सीकर जिले…

पाखंड के अंधकार से तर्क के प्रकाश की ओरआरक्षण बनाम मिथक

लेखकसोहनलाल सिंगारियासामाजिक-आर्थिक चिन्तक भूमिकाआज भारत के बौद्धिक विमर्श में एक अजीब सा विरोधाभास दिखाई देता है। एक तरफ वह वर्ग है जो यह दावा करता है कि प्राचीन काल में…

विपक्षी बिखराव और क्षेत्रीय दलों की कमजोरी से 2029 में भाजपा की संभावनाएं बढ़ीं!?”

हालिया 4 मई 2026 केचुनाव परिणामों ने भारतीय राजनीति की दिशा को लेकर एक नई बहस को जन्म दिया है। एक ओर भारतीय जनता पार्टी की स्थिति मजबूत होती दिखाई…

हर घर एक परिंडा”अभियानजैसलमेर जिले में बना जन आंदोलन

जैसलमेर। भीषण गर्मी के बीच भानु सेवा संस्थान की ओर से शुरू किया गया ‘हर घर एक परिंडा’ अभियान अब जन-आंदोलन का रूप ले चुका है। सीमावर्ती गांव दव, फुलिया,…