“जाति के ज़हर से घायल वंचित पुरुष का जीवन — संघर्ष, अपमान, तन्हाई और अनकही पीड़ा की कहानी!”
(1)भारतीय समाज की जटिल संरचना में वंचित समाज का पुरुष एक ऐसे जीवन का प्रतिनिधि है जिसमें जन्म से ही संघर्ष उसकी नियति बन जाता है। सदियों की सामाजिक व्यवस्था…
भारत का स्वर्णिम युग: सम्राट अशोक महान, 84,000 स्तूप और वैज्ञानिक धम्म-शासन
लेखकसोहनलाल सिंगारियासामाजिक चिन्तक एवं विश्लेषक प्रस्तावनाविस्मृत विरासत का पुनर्जागरणइतिहास की धूल में दबे वे पन्ने, जो किसी राष्ट्र की आत्मा होते हैं, अक्सर समय की मार से धुंधले पड़ जाते…
ऐतिहासिक विजय: संकल्प से सिद्धि तक का सफर
🏆 ऐतिहासिक विजय: संकल्प से सिद्धि तक का सफर🏆 लेखकसोहनलाल सिंगारियाप्राचार्य एवं PEEO भादसी राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय, भादसी एवं राजकीय बालिका उच्च माध्यमिक विद्यालय, भादसीजहाँ अभाव होता है, वहीं…
“कर्म के सिद्धांत पर टिके विश्वास के बावजूद वंचित समाज में बढ़ती निराशा और दरकती आशा!”
(1)मानव समाज में कर्म का सिद्धांत सदियों से नैतिक आशा का आधार रहा है। यह विश्वास दिलाया गया कि जो व्यक्ति अच्छा कर्म करेगा, उसे एक दिन न्याय अवश्य मिलेगा।…
जोड़वास की बेटियों ने रचा इतिहास, 10वीं बोर्ड में लहराया परचम
लता मेघवाल ने 97.17 प्रतिशत अंक अर्जित करके राज्य और जिला मेरिट में बनाया स्थान रानीवाड़ा । ब्लॉक के जोड़वास गांव की दो बेटियों ने माध्यमिक शिक्षा बोर्ड के 10वीं…
वंचित समाज की महिला की पुकार! दया नहीं ,सम्मान दीजिए !मेरी ज़िंदगी प्रयोगशाला नहीं ?
(1)वंचित समाज की स्त्री का जीवन केवल आँकड़ों या चर्चाओं का विषय नहीं है, बल्कि वह अपने भीतर अनुभवों का एक गहरा संसार लिए हुए चलती है। जब वह कहती…
शहीद भगत सिंह: वैचारिक क्रांति, सामाजिक न्याय और वैज्ञानिक चेतना के अमर संवाहक
लेखकसोहनलाल सिंगारियासामाजिक चिन्तक एवं विश्लेषक प्रस्तावनाइतिहास के झरोखे से एक शाश्वत संकल्प23 मार्च 1931 की वह धुंधली शाम भारतीय इतिहास के आकाश पर केवल एक तिथि नहीं, बल्कि शौर्य, बौद्धिकता…
डिग्री हाथ में, फिर भी खाली हाथ? भारत के 40% ग्रेजुएट युवाओं के पास काम नहीं: रिपोर्ट
नई दिल्ली: भारत का युवा कार्यबल पहले से कहीं अधिक शिक्षित और महत्वाकांक्षी हो रहा है, लेकिन शिक्षा से रोजगार तक का उनका सफर अभी भी बाधाओं से भरा है.…
“स्कूल एडमिशन के समय वंचित अभिभावक कैसे करें सही चयन, विज्ञापन नहीं शिक्षा की गुणवत्ता पर दें ध्यान!”
(1)एडमिशन का समय आते ही लगभग हर स्कूल खुद को सबसे अच्छा और सबसे सफल बताने लगता है। अखबारों, होर्डिंग्स और सोशल मीडिया पर बड़े-बड़े विज्ञापन दिखाई देने लगते हैं।…
