शिक्षक के मार्गदर्शन में 4 वर्षों में नवोदय व श्रेष्ठा योजना में 10 विद्यार्थियों का हुआ चयन।
चितलवाना।
“सच्चे शिक्षक पत्थरों को तराशकर हीरा बना देते हैं। वे साधारण परिस्थितियों में छिपी असाधारण गरीब प्रतिभाओं को पहचानकर उन्हें सफलता की नई पहचान दिलाते हैं।” यह पंक्तियां साकार कि हैं राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय मेघवालों की बस्ती, झाब में कार्यरत शिक्षक जेताराम डाभी ने। सीमित संसाधनों और आर्थिक अभाव के बीच पढ़ने वाले ग्रामीण विद्यार्थियों को वे न केवल शिक्षा दे रहे हैं, बल्कि उन्हें बड़े सपने देखने और उन्हें साकार करने का मार्ग भी दिखा रहे हैं।

मूलतः गुड़ामालानी क्षेत्र के लूणवा जागीर निवासी तथा वर्तमान में झाब विद्यालय में कार्यरत जेताराम डाभी पिछले सात वर्षों से शिक्षा के क्षेत्र में समर्पित भाव से सेवाएं दे रहे हैं।डाभी नेट और जेआरएफ (गणित) पास हैं।

उनका कहना है कि प्रतिभा किसी की मोहताज नहीं होती। यदि सही दिशा, मार्गदर्शन और अवसर मिल जाए तो गांव का बच्चा भी राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना सकता है।
इसी सोच के साथ वे अपने विद्यालय के विद्यार्थियों के अलावा आसपास के अन्य विद्यालयों के प्रतिभाशाली बच्चों को भी निःशुल्क मार्गदर्शन प्रदान कर रहे हैं। नवोदय विद्यालय,श्रेष्ठा योजना तथा अन्य शैक्षणिक अवसरों की जानकारी देकर वे बच्चों को प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए तैयार करते हैं और उन्हें सफलता की राह दिखाते हैं।

चार वर्षों में 10 से अधिक विद्यार्थियों को दिलाई सफलता
जेताराम डाभी के मार्गदर्शन में वर्ष 2023 से 2026 के बीच 10 से अधिक विद्यार्थियों ने नवोदय विद्यालय एवं श्रेष्ठा योजना जैसी प्रतिष्ठित योजनाओं में सफलता हासिल की है। इनमें वर्ष 2023 में हीना कुमारी का नवोदय विद्यालय में चयन हुआ। वर्ष 2024 में राजेंद्र कुमार ने नवोदय विद्यालय में सफलता प्राप्त की, जबकि हेतल कुमारी एवं खुशबू कुमारी का चयन श्रेष्ठा योजना में हुआ। वर्ष 2025 में राधा कुमारी और ममता कुमारी ने श्रेष्ठा योजना में स्थान प्राप्त किया। वहीं, वर्ष 2026 में ओमप्रकाश का नवोदय विद्यालय में चयन हुआ तथा अनोपाराम,अमित कुमार और हितेश कुमार का चयन श्रेष्ठा योजना में हुआ।
जेताराम डाभी विद्यार्थियों का चयन होने के बाद भी संपर्क में रहते हैं। समय-समय पर संबंधित विद्यालयों में पहुंचकर उनकी शैक्षणिक प्रगति की जानकारी लेते हैं और आवश्यकता पड़ने पर मार्गदर्शन भी प्रदान करते हैं। उनका मानना है कि विद्यार्थियों को सफलता की पहली सीढ़ी पर पहुंचाने के साथ-साथ आगे बढ़ने के लिए भी प्रेरित करना जरूरी है।
गरीब परिवारों के बच्चों को दिला रहे बेहतर अवसर
ग्रामीण क्षेत्रों में अनेक ऐसे विद्यार्थी हैं जिनमें प्रतिभा तो भरपूर है, लेकिन जानकारी और संसाधनों के अभाव में वे आगे नहीं बढ़ पाते। जेताराम डाभी ऐसे बच्चों तक नवोदय, श्रेष्ठा और अन्य योजनाओं की जानकारी पहुंचाकर उन्हें अवसरों से जोड़ने का कार्य कर रहे हैं।
श्रेष्ठा योजना के तहत विद्यार्थियों को देश के प्रतिष्ठित सीबीएसई विद्यालयों में कक्षा 9 से 12 तक निःशुल्क शिक्षा प्राप्त करने का अवसर मिलता है, जबकि नवोदय विद्यालयों में गुणवत्तापूर्ण आवासीय शिक्षा उपलब्ध कराई जाती है। इन योजनाओं के माध्यम से आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों को बेहतर शिक्षा और भविष्य का रास्ता मिलता हैं।
जेताराम डाभी ग्रामीण क्षेत्र में शिक्षा,समर्पण और प्रेरणा की मिसाल बन चुके हैं। उनके मार्गदर्शन से अनेक विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षणिक अवसर मिले हैं। उनकी मेहनत यह साबित करती है कि एक समर्पित शिक्षक न केवल विद्यार्थियों का भविष्य संवारता है, बल्कि पूरे समाज में सकारात्मक बदलाव की नींव भी रखता है।
उनकी लगन, सेवा और समर्पण आज अनेक ग्रामीण प्रतिभाओं के लिए उम्मीद की नई किरण बन चुकी है।
इनका कहना हैं कि-
“ग्रामीण क्षेत्र के बच्चों में प्रतिभा की कोई कमी नहीं है। जरूरत केवल सही मार्गदर्शन,जानकारी देने की होती है। मेरा प्रयास रहता है कि आर्थिक अभाव किसी बच्चे के सपनों के आड़े न आए। जब किसी विद्यार्थी का नवोदय या श्रेष्ठा जैसी योजनाओं में चयन होता है और उसके माता-पिता के चेहरे पर खुशी दिखाई देती है, तो वही मेरे लिए सबसे बड़ा पुरस्कार होता है। बच्चों की सफलता ही मेरी सबसे बड़ी प्रेरणा हैं।
