21वीं सदी के डिजिटल परिदृश्य में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस – AI) मानव जीवन के प्रत्येक आयाम को गहराई से प्रभावित कर रही है।

हाल के दिनों में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर 80 के दशक के विंटेज लुक, रेट्रो पोर्ट्रेट्स अथवा बुढ़ापे के संभावित स्वरूप को AI के माध्यम से तैयार करने का एक जबर्दस्त आकर्षण देखने को मिला है।

एक क्लिक पर अपनी ही एक नई, ऐतिहासिक या भविष्योन्मुखी छवि देखना निःसंदेह अत्यंत सुखद, मनोरंजक और कौतूहल पैदा करने वाला अनुभव प्रतीत होता है।

परंतु, इस तकनीकी आकर्षण के पीछे का आर्थिक और डिजिटल यथार्थ क्या है? क्या इंटरनेट पर “मुफ्त” दिखने वाली यह सेवा वास्तव में निःशुल्क है?

साइबर अर्थशास्त्र का एक बुनियादी सिद्धांत है: “यदि आपको कोई डिजिटल सेवा बिना किसी प्रत्यक्ष शुल्क के मिल रही है, तो वहाँ आप ग्राहक नहीं, बल्कि आपका डेटा ही मुख्य उत्पाद है।

इस विषय को किसी काल्पनिक डर या सनसनी के चश्मे से देखने के बजाय, वस्तुनिष्ठ तकनीकी तथ्यों, उपभोक्ता अधिकारों और डिजिटल सुरक्षा के संदर्भ में समझना अत्यंत आवश्यक है।

  1. प्रत्यक्ष आर्थिक प्रभाव: हिडन चार्जेस और ‘डार्क पैटर्न्स’ की तकनीक सोशल मीडिया पर वायरल होने वाले ट्रेंड्स का लाभ उठाने के लिए प्ले स्टोर और ऐप स्टोर पर रातों-रात सैकड़ों तृतीय-पक्ष (Third-Party) एप्लिकेशन्स सक्रिय हो जाते हैं।

इन एप्लिकेशन्स की कार्यप्रणाली आम नागरिक की जेब पर सीधा प्रभाव डालती है:

फ्री ट्रायल और ऑटो-डेबिट का जाल

अधिकांश अज्ञात एडिटिंग ऐप्स उपयोगकर्ताओं को “3-दिन के निःशुल्क ट्रायल” के नाम पर आकर्षित करते हैं।

ऐप सक्रिय करने की प्रक्रिया के दौरान डिजिटल वॉलेट, क्रेडिट/डेबिट कार्ड या यूपीआई मैंडेट (Auto-Debit Mandate) को जोड़ लिया जाता है।

उपभोक्ता कई बार इसे साधारण औपचारिकता समझकर स्वीकृत कर देते हैं।

ट्रायल अवधि समाप्त होते ही बिना किसी अतिरिक्त अनुमति के साप्ताहिक या मासिक आधार पर ₹500 से लेकर ₹4,000 तक की राशि स्वतः कटने लगती है।

उपभोक्ता व्यवहार और भूलने की प्रवृत्ति: डिजिटल इकोनॉमी में इसे “इनर्टिया मॉनेटाइजेशन” कहा जाता है। उपयोगकर्ता फोटो बनाकर ऐप को भूल जाता है, किंतु बैकएंड पर निरंतर सब्सक्रिप्शन शुल्क कटता रहता है।

डार्क पैटर्न्स (Dark Patterns)
ऐप का इंटरफ़ेस इस प्रकार डिज़ाइन किया जाता है कि ‘Cancel Subscription’ या सदस्यता समाप्त करने का विकल्प अत्यंत जटिल और छिपा हुआ होता है, जिससे सामान्य उपभोक्ता आसानी से इसे बंद नहीं कर पाता।

  1. बायोमेट्रिक और फेशियल डेटा एक अपरिवर्तनीय डिजिटल पूँजी

जब कोई उपयोगकर्ता AI मॉडल से अपनी तस्वीर तैयार कराने के लिए अपनी 8 से 10 स्पष्ट तस्वीरें अपलोड करता है, तो वह केवल फोटो नहीं दे रहा होता, बल्कि अपना अनूठा ‘बायोमेट्रिक फेशियल मैप’ सौंप रहा होता है।

पासवर्ड बनाम चेहरा
यदि आपका बैंक पासवर्ड या एटीएम पिन चोरी हो जाए, तो आप उसे तत्काल बदल सकते हैं।

किंतु आपका चेहरा, आँखों की पुतली और चेहरे का ज्यामितीय अनुपात (Facial Geometry) जीवनभर नहीं बदला जा सकता।
यह अपरिवर्तनीय डिजिटल पहचान है।

सेवा की शर्तें (Terms of Service) और डेटा व्यापार: प्रायः कोई भी नागरिक ऐप डाउनलोड करते समय उसके लंबे कानूनी नियमों को नहीं पढ़ता।

इन अज्ञात ऐप्स के नियम व शर्तों में स्पष्ट लिखा होता है कि आपके द्वारा अपलोड की गई सामग्री का उपयोग वे अपने मशीन लर्निंग मॉडल को प्रशिक्षित करने अथवा “संबद्ध तृतीय पक्षों” (डेटा ब्रोकर्स) को व्यावसायिक उपयोग हेतु साझा करने के लिए कर सकते हैं।

डिजिटल पदचिह्न (Digital Footprint) एक बार जब डेटा किसी विदेशी या गैर-विनियमित सर्वर पर संग्रहीत हो जाता है, तो भारतीय न्यायक्षेत्र अथवा व्यक्तिगत स्तर पर उसे पूर्णतः नष्ट करवाना तकनीकी रूप से असंभव प्राय हो जाता है।

  1. डिवाइस परमिशन और साइबर परिदृश्य
    एक साधारण फोटो-एडिटिंग ऐप को सुचारू रूप से कार्य करने के लिए केवल उस विशिष्ट फोटो तक पहुँच की आवश्यकता होती है जिसे एडिट किया जाना है।

इसके विपरीत, कई अविश्वसनीय ऐप्स निम्नलिखित अनुमतियाँ (Permissions) मांगते हैं:

संपूर्ण मीडिया एवं स्टोरेज एक्सेस
इसके माध्यम से आपके डिवाइस की सभी निजी पारिवारिक तस्वीरें और दस्तावेज़ स्कैन किए जा सकते हैं।

संपर्क सूची (Contacts) एवं लोकेशन (GPS) आपकी व्यक्तिगत सामाजिक परिधि और दैनिक गतिविधियों की मैपिंग हो जाती है।

माइक्रोफोन की अनुमति
पृष्ठभूमि की ध्वनियों और प्राथमिकताओं का डेटा संकलन।

तकनीकी विशेषज्ञों और वैश्विक साइबर सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, अनियंत्रित अनुमतियों के माध्यम से एकत्रित किया गया डेटा प्रोफ़ाइलिंग और लक्षित विज्ञापनों (Targeted Advertising) के लिए व्यावसायिक बाजारों में बेचा जाता है।

  1. डीपफेक और पहचान का दुरुपयोग: काल्पनिक भय नहीं, तार्किक जोखिम
    इंटरनेट पर उपलब्ध आपकी उच्च-गुणवत्ता वाली फेशियल मैपिंग का दुरुपयोग साइबर अपराधियों द्वारा ‘सिंथेटिक मीडिया’ या डीपफेक तकनीक के माध्यम से किया जा
    सकता है

आइडेंटिटी थेफ्ट
(पहचान की चोरी)

आपके चेहरे का उपयोग करके फर्जी सोशल मीडिया प्रोफाइल तैयार करना अथवा सोशल इंजीनियरिंग के जरिए परिचितों से मदद के नाम पर धोखाधड़ी करना।

आधुनिक बायोमेट्रिक सत्यापन में सेंध यद्यपि वित्तीय प्रणालियाँ अत्यंत सुरक्षित हैं, किंतु भविष्य में बढ़ती ‘लाइवनेस डिटेक्शन’ और फेशियल रिकग्निशन प्रणालियों के समक्ष खुले तौर पर प्रसारित बायोमेट्रिक डेटा एक संभावित चुनौती अवश्य खड़ी करता है।

प्रामाणिक संदर्भ एवं नियामक ढांचा,इस विषय की गंभीरता को निम्नलिखित राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय संदर्भों से समझा जा सकता है

डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण अधिनियम, 2023
(DPDP Act – भारत सरकार)

यह कानून प्रत्येक नागरिक को उसके व्यक्तिगत डेटा पर संप्रभुता प्रदान करता है।

कानून स्पष्ट करता है कि किसी भी डेटा फिड्यूशरी (डेटा एकत्र करने वाली संस्था) को स्पष्ट सहमति लेनी होगी और केवल उसी उद्देश्य के लिए डेटा का उपयोग किया जा सकता है जिसके लिए वह लिया गया है।

भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) – ई-मैंडेट दिशा-निर्देश आरबीआई के अनुसार किसी भी आवर्ती भुगतान (Recurring Payment) के लिए पूर्व-अधिसूचना अनिवार्य है।

नागरिकों को अपने बैंकिंग ऐप्स में जाकर ‘e-Mandate’ प्रबंधन की सुविधा दी गई है।

भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C – गृह मंत्रालय)
राष्ट्रीय साइबर सुरक्षा एजेंसी निरंतर यह परामर्श जारी करती है कि अनधिकृत थर्ड-पार्टी एपीके (APK) फाइलों और सोशल मीडिया पर विज्ञापित संदेहास्पद फोटो-एडिटिंग टूल्स से सावधान रहें।

फेडरल ट्रेड कमीशन
(FTC – यूएसए) की रिपोर्ट: वैश्विक स्तर पर उपभोक्ता अधिकारों की रक्षा करने वाली संस्थाओं ने समय-समय पर एआई फोटो ऐप्स द्वारा उपयोगकर्ताओं के फेशियल डेटा को बिना पारदर्शी सहमति के एआई प्रशिक्षण में उपयोग करने पर जुर्माना और प्रतिबंध लगाए हैं।

व्यावहारिक मार्गदर्शिका, जागरूक नागरिक के लिए डिजिटल सुरक्षा आचार संहिता

तकनीक से दूर भागना समाधान नहीं है; समाधान है ,सजग और विवेकपूर्ण उपयोग।

प्रत्येक नागरिक को निम्नलिखित सुरक्षा उपाय अपनाने चाहिए

अनुमतियों की सीमा तय करें
फोन सेटिंग में जाकर ऐप्स को केवल “Select Photos” की अनुमति दें, “Allow access to all photos” कभी न चुनें।

सक्रिय सब्सक्रिप्शन की नियमित समीक्षा

Android उपयोगकर्ता
Google Play Store खोलें \rightarrow दाईं ओर अपनी प्रोफ़ाइल पर टैप करें

\rightarrow Payments & Subscriptions \rightarrow Subscriptions में जाकर देखें कि कोई अनचाहा ऑटो-डेबिट सक्रिय तो नहीं है।

iPhone उपयोगकर्ता
Settings \rightarrow अपनी Apple ID पर टैप करें \rightarrow Subscriptions में जाकर अनचाही सेवा तुरंत ‘Cancel’ करें।

अज्ञात ऐप्स से दूरी
केवल प्रतिष्ठित, प्रमाणित और विश्वस्तरीय सुरक्षा मानकों का पालन करने वाले आधिकारिक टूल्स का ही प्रयोग करें। किसी सोशल मीडिया विज्ञापन के सीधे लिंक से ऐप डाउनलोड न करें।

परिवार व समाज में डिजिटल साक्षरता, अपने घर के युवाओं और वरिष्ठ नागरिकों को बताएं कि कौतूहलवश अपनी संवेदनशील बायोमेट्रिक जानकारी किसी भी अज्ञात सर्वर पर अपलोड न करें।

निष्कर्ष
कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधुनिक सभ्यता का अत्यंत शक्तिशाली और उपयोगी आविष्कार है।

यह ज्ञान, सृजन और विकास के अभूतपूर्व द्वार खोलती है।

आवश्यकता केवल इस बात की है कि हम उपभोक्ता के रूप में सजग रहें। कुछ पलों के कौतूहल और मनोरंजन के बदले अपनी स्थाई डिजिटल पहचान, बायोमेट्रिक सुरक्षा और गाढ़ी कमाई को दांव पर न लगाएं। तकनीक का उपयोग हम करें, तकनीक हमारा उपयोग न करने पाए—यही डिजिटल युग की वास्तविक परिपक्वता है।

लेखक (संकलन एवं प्रस्तुति)
सोहन लाल सिंगारिया
सामाजिक आर्थिक चिन्तक
एवं विचारक ब्यावर | संपर्क: 94622-60179

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