———— मंथन ———- शिक्षा रूपी दीप प्रज्वलित होते ही अशिक्षा रूपी अंधेरा छट जाएगा

मैनें अध्ययन गोद योजना की प्रेरणा दा सिंबल ऑफ नॉलेज,संविधान निर्माता, शोषितों,पीड़ितों,यतीमों,उपेक्षितों,पिछड़ों ओर मूलभूत सुविधाओं से महरूम तथा अधिकार विहीन करोड़ों लोगों का उद्धार करने वाले युग पुरुष मानवता के…

योग विज्ञान से वैश्विक चेतना का उदय, इतिहास, व्यावहारिक दर्शन और “योग संगम” महाअभियान

✍️ लेखक, संकलन एवं प्रस्तुतिसोहनलाल सिंगारियाप्राचार्य (RES) भादसी “योग: कर्मसु कौशलम्” अर्थात कर्मों में कुशलता ही योग है। योग केवल शारीरिक आसनों की एक सतही श्रृंखला मात्र नहीं, बल्कि मन,…

श्री रामदेवरा भक्तगण संघ यात्रा रामदेवरा धाम रवाना

चौमूं (सुरेन्द्र सिंह हरसोलिया)। शहर के बाई का बास ग्राम से श्री रामदेवरा भक्तगण संघ चौमूं बाबा रामदेवरा धाम जैसलमेर के लिए यात्रा रवाना हुई। सरपंच प्रशासक सुल्तान बुनकर व…

योग विज्ञान से वैश्विक चेतना का उदय, इतिहास, व्यावहारिक दर्शन और “योग संगम” महाअभियान

✍️ लेखक, संकलन एवं प्रस्तुतिसोहनलाल सिंगारियाप्राचार्य (RES) भादसी “योग: कर्मसु कौशलम्” अर्थात कर्मों में कुशलता ही योग है। योग केवल शारीरिक आसनों की एक सतही श्रृंखला मात्र नहीं, बल्कि मन,…

भामाशाह ने होबी सेन्टर में बच्चों को दिया भोज

भिंयाड़ । राजस्थान राज्य भारत स्काउट व गाइड जिला मुख्यालय बाडमेर की ओर से भिंयाड में संचालित अभिरुचि केन्द्र में सेठ सोहन लाल पुत्र अमृत लाल ने ध्वजारोहण किया ।…

क्या आपके पास आर्थिक सहयोग देने के बाद भी अपना सामाजिक अखबार (हकदार/दैनिक सीमांत रक्षक/ प्रभात पोस्ट/उदयमेघ/राजा बली समाज/जागो हुक्मरान/ भीम प्रज्ञा/महकता हिन्दुस्तान/बुद्ध ज्योति आदि) नहीं आ रहा है ?

यदि हाँ, तो यह आलेख आप जरूर पढ़ें 👇🏻 हमारी बात हमारे मीडिया में बहुजन समाज के विभिन्न समुदाय बाबा साहब डाॅ भीमराव आंबेडकर जी के दर्शन पर, सामाजिक विकास…

“गरीब विद्यार्थियों के मसीहा खान सर: छात्रों की उम्मीद, व्यवस्था से सवाल और लोकप्रियता!”

भूमिकाखान सर: शिक्षक से जन-आवाज़ बनने तक की कहानी को ऐसे बयान किया जा सकता है।भारत में शिक्षा केवल नौकरी पाने का माध्यम नहीं रही, बल्कि सामाजिक परिवर्तन का सबसे…

“शिक्षा, आत्मसम्मान और संगठन से बहुजन वंचित समाज गांवों में रचेगा स्वर्णिम भविष्य!”

भूमिकाभारत के माननीय मुख्य न्यायाधीश द्वारा व्यक्त यह विचार कि “शहरों में व्यक्ति भीड़ में भी अकेला है, जबकि गांवों में समुदाय आज भी जीवन का केंद्र है”, केवल एक…

“समरसता नहीं, समानता चाहिए: बहुजन वंचित समाज के अधिकार और सम्मान का प्रश्न?

भूमिका भारत का बहुजन वंचित समाज केवल एक सामाजिक वर्ग नहीं, बल्कि श्रम, संघर्ष, आत्मसम्मान और मानवीय गरिमा की सशक्त परंपरा का वाहक है। सदियों तक सामाजिक, शैक्षिक और आर्थिक…

“स्त्री स्वतंत्रता, सामाजिक मर्यादा और बहुजन वंचित समाज की बदलती सोच का जटिल द्वंद्व!”

भूमिका इक्कीसवीं सदी का विश्व स्त्री अधिकारों के प्रश्न पर पहले की अपेक्षा अधिक जागरूक और संवेदनशील दिखाई देता है। अधिकांश देशों ने महिलाओं को शिक्षा, रोजगार, संपत्ति, राजनीतिक भागीदारी…