“बहुजन वंचित हितैषियों की अंतरात्मा में पलता दर्द, करुणा और परिवर्तन का अनवरत संकल्प!”

भूमिकाबहुजन वंचित समाज को समझने वाले व्यक्तियों की मनोदशा केवल सहानुभूति तक सीमित नहीं रहती, बल्कि वह एक गहरा, अनदेखा और अनसुना आत्मिक बंधन बन जाती है। वे उन दर्दों…

“खुद के लिए जीने का साहस: बहुजन वंचित चेतना और आत्ममुक्ति की राह”

बहुजन वंचित समाज का जीवन अक्सर अभाव, अपमान और सामाजिक तिरस्कार से शुरू होता है। जन्म के साथ ही उसे हीनता का बोझ सौंप दिया जाता है, जैसे उसकी नियति…

मैं भंगी हूँ, रे, से वैश्विक मानवाधिकार तक,एडवोकेट भगवान दास जी के बौद्धिक संघर्ष की गाथा सादर समर्पित

लेखक: सोहनलाल सिंगरियासामाजिक-आर्थिक चिन्तक, ब्यावर प्रस्तावना: एक युग परिवर्तन का शंखनादभारतीय इतिहास के फलक पर कुछ ऐसे व्यक्तित्व उभरते हैं, जो न केवल समाज की दिशा बदलते हैं, बल्कि सदियों…

क्रांति के अग्रदूत: बाबू मंगू राम मुगोवालिया और आद-धर्म का उदय

लेखकसोहनलाल सिंगारियासामाजिक-आर्थिक चिन्तक, ब्यावर भारतीय इतिहास के पन्नों में कुछ ऐसे नायक भी हुए हैं जिनकी गर्जना ने, न केवल सत्ता की चूलें हिला दीं, बल्कि सदियों से सोए हुए…

“ग्रह नक्षत्र नहीं जिम्मेदार, बहुजन वंचित समाज की समस्याओं का हल समान अवसर और सशक्त सोच में है!”

मनःस्थिति, भ्रम और बहुजन जीवन की सच्चाई वंचित बहुजन समाज सदियों से अभावग्रस्त जीवन जीता आया है। उसके हिस्से में श्रम अधिक आया, अधिकार कम। संसाधनों पर एक वर्ग का…

“बहुजन वंचित समाज के सुधारक की आत्मकथा: भीतर पलता द्वंद्व, अस्वीकार और करुणा की यात्रा!

मैं अक्सर सोचता हूँ—क्या सचमुच मैं एक सामान्य मनुष्य हूँ, या फिर उन अनगिनत अनकहे दर्दों का संग्रह, जिन्हें इस समाज ने कभी स्वीकार ही नहीं किया। किसी का दर्द…

बाड़मेर के कुलदीप का सहायक आचार्य पद पर चयन होने पर किया अभिनन्दन

बाड़मेर – पिछले कुछ वर्षों से शिक्षा के क्षेत्र में मेहनत कर सरकारी सेवा में अग्रणी रहकर जिले का नाम रोशन कर रहे है। इसी कड़ी में आज कॉलेज शिक्षा…

सांचौर क्षेत्र के मेघवाल समाज को मिला पहला आरएएस अधिकारी,महेंद्र पांचल की 1634वीं रैंक से चयन।

सांचौर। मंजिल उन्हीं को मिलती है जिनके सपनों में जान होती है पंखों में कुछ नहीं होता है हौसलों में उड़ान होती हैं ऐसा हि कुछ कर दिखाया जालोर जिले…

मोबाइल के दौर में खोता अखबार : -पढ़ना सब चाहते हैं, पर मंगवाता कोई नहीं ,समाज की असली सच्चाई”

आज के दौर में एक अजीब विडंबना देखने को मिलती है—अखबार पढ़ना सब चाहते हैं, लेकिन घर पर मंगवाने की पहल बहुत कम लोग करते हैं। हर पढ़ा-लिखा व्यक्ति देश-दुनिया…