समानता के दावों के बीच सुलगती जातिवादी मानसिकता, जब आदिवासी नौनिहालों को अपने ही सम्मान के लिए सड़क पर उतरना पड़ा
एक तरफ 21वीं सदी के भारत में यह दावा किया जाता है,कि समाज से जातिवाद समाप्त हो चुका है, हर नागरिक को बराबरी का दर्जा मिल चुका है और संवैधानिक…
