मकराना। समता सैनिक दल तहसील शाखा मकराना के तत्वावधान में आज दिनांक 28.8.2026 शुक्रवार (श्रावण पूर्णिमा )को दल के Budsu स्थित कार्यालय में प्रथम बौद्ध संगति दिवस समारोह का आयोजन किया गया। समारोह का प्रारंभ भगवान बुद्ध ,बाबा साहब डॉक्टर अंबेडकर एवं अन्य महापुरुष जिन्होंने समता के लिए आंदोलन किया उनके चित्र पर पुष्प एवं माला द्वारा किया गया। समारोह को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि दल के प्रदेश महासचिव ओमप्रकाश कांसोटिया ने बताया कि भगवान बुद्ध के महापरिनिर्वाण के तीन महाबाद मगध साम्राज्य की तत्कालीन राजधानी राजगृह (वर्तमान राजगीर बिहार) में स्थित सप्तपनी गुफा में आयोजित की गई। प्रथम बौद्ध संगीति ने बौद्ध धर्म को एक संगठित स्वरूप दिया।

बुद्ध के जाने के बाद भी उनके विचारों को शुद्ध और प्रामाणिक रूप से जीवित रखने का श्रेय इसी संगति को जाता है। इसी संगति के आधार पर आगे चलकर बौद्ध धर्म पूरी दुनिया में फेल सका ।

कांसोटिया ने आगे बताया की संगति के मुख्य शरक्षक मगध के हर्यक वंश के राजा अजातशत्रु थे। बुद्ध के महापरिनिर्वाण के बाद जब 500 अर्हत भिक्षु यहां जुटे तो राजा अजातशत्रु ने इस गुफा के बाहर एक बहुत बड़ा मंडप बनवाया। उन्होंने भिक्षु के बैठने के लिए अत्यंत आरामदायक व्यवस्था की। ताकि वे बिना किसी बाधा के हफ्तों तक बैठकर बुद्ध के वचनों को संकलित कर सके ।त्रिपिटक इसी संगति में लिखे गए । सुत पिटक बुद्ध के प्रिय शिष्य आनंद के द्वारा, विनय पाठक उपली नाई द्वारा एवं अभिधम्म पिटक मोगलीपुट द्वारा संकलित किया गया एवं प्रस्तुत किया। जिनका सभी ने समर्थन एवं स्वागत किया। अध्यक्षता कर रहे तहसील कमांडर किशन लाल गहलोत ने बताया कि प्रथम बौद्ध संगति में केवल अरहत जिन्होंने ( पूर्ण ज्ञान प्राप्त हो) को ही आमंत्रित किया गया था ।प्रथम बौद्ध संगति बौद्ध धर्म के इतिहास में सबसे महत्वपूर्ण घटना मानी जाती है।

आज के समारोह कार्यक्रम में सुरेश बामनिया, शंकरलाल मौर्य ,पेंटर भंवरलाल लूना, सुरेश बोला ,श्रवण आसोपिया, बाबूलाल जी अध्यापक मेघवाल,दिनेश गहलोत,मूलचंद जी दस्ताव,भंवर लाल जी सुवासिया,गोविंद लाल जी बौद्ध, रमेश मौर्य, लोकेश, जोधा राम जी अध्यापक,महेंद्र जी चितावा, रतनाराम जी परिहार, आदित्य बनिया के अलावा कई सैनिक एवं पदाधिकारी उपस्थित थे।

