मकराना। समता सैनिक दल तहसील शाखा मकराना के तत्वावधान में 26 अगस्त 2026 बुधवार को दल के Budsu स्थित कार्यालय में महिला समानता दिवस समारोह हर्षौल्लास पूर्वक मनाया गया। समारोह का प्रारंभ भगवान बुद्ध, बाबा साहब डॉक्टर अंबेडकर एवं ज्योतिबा फुले के चित्र पर पुष्प एवं माला द्वारा किया गया। समारोह को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि ओमप्रकाश कांसोटिया प्रदेश महासचिव समता सैनिक दल (राजस्थान )ने बताया कि इस दिन को आधिकारिक तौर पर मनाने की घोषणा अमेरिकी कांग्रेस द्वारा 1973 में की गई थी।

महिलाओं के सम्मान अधिकारों, समाज में सम्मान भागीदारी को बढ़ावा देना। भारतीय संविधान महिलाओं को पुरुषों के समान अधिकार ,सुरक्षा देने के मामले में दुनिया में सबसे प्रगतिशील संविधानों में से एक है। भारतीय संविधान में महिलाओं को सशक्त बनाने और समानता देने का अधिकार देने वाले मुख्य प्रावधान :समानता का अधिकार (अनुच्छेद 14 ),भेदभाव का निषेध( अनुच्छेद 15), विशेष प्रावधान (अनुच्छेद15(3) अवसर की सामानता (अनुच्छेद 16), सम्मान से जीने का अधिकार (अनुच्छेद 21) साथ ही राजनीतिकअधिकार और मौलिक कर्तव्य में पंचायती राज में आरक्षण का (अनुच्छेद 243-D) नारी सम्मान( अनुच्छेद 51 एE आदि है। कांसोटिया ने आगे बताया कि नारी शक्ति वंदन अधिनियम 2023( 106 वां संशोधन) पहले से ही एक कानून है। लेकिन इसके व्यावहारिक रूप से लागू होने की प्रक्रिया अब मूल शर्तों के अधीन होगी शर्त 1जनगणना -देश में जनगणना के आंकड़ों के अधिकारिक तौर पर पूरे और प्रकाशित होने अनिवार्य है ।

शर्त नंबर 2 जनगणना के आंकड़ों के आधार पर देश के संसदीय और विधानसभा क्षेत्र की सीमाओं का पुनः निर्धारण किया जाएगा ।इसके अलावा भी महिलाओं को कई कानूनी अधिकार भारतीय संविधान देता है। जैसे जीरोFIR .रात में गिरफ्तारी पर रोक, समान वेतन का कानूनी अधिकार बाबा साहब डॉक्टर अंबेडकर ने सबसे बड़ा संघर्ष संविधान लागू होने के बाद महिलाओं को हिंदू कोड़ बिल के माध्यम से व्यावहारिक रूप से उन्हें हक दिलाने के लिए तैयार किया गया था। इस बिल के मुख्य प्रावधान थे संपत्ति में अधिकतर, तलाक का अधिकार, एक विवाह, अंतर्जातीय विवाह जब तत्कालीन ससद और रूढ़िवादी ताकतों के विरोध के कारण प्रगतिशील बिल पारित नहीं हो सका ।तो डॉक्टर अंबेडकर ने बेहद दुखी होकर 1951 में कानून मंत्री के पद से इस्तीफा दे दिया। अध्यक्षता कर रहे तहसील कमांडर किशनलाल गहलोत ने बताया कि संविधान सभा से पहले जब डॉक्टर अंबेडकर वायसराय की कार्यकारिणी परिषद में श्रम मंत्री थे ।जब उन्होंने कोयला खदानों और फैक्ट्री में काम करने वाली गरीब मजदूर महिलाओं के लिए गर्भवती होने पर सवेतन अवकाश और चिकित्सा सुविधा एवं महिला श्रमिकों के स्वास्थ्य शिक्षा और बच्चों की देखरेख के लिए एक विशेष कल्याण कोष की स्थापना की थी। आज के समारोह में सुरेश बामनिया, जितेश बडरिया, शंकर लाल मौर्य, भंवरलाल लूना पेंटर के अलावा कई सैनिक एवं पदाधिकारी उपस्थित थे।

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