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कारगिल विजय दिवस की पूर्व संध्या पर जयपुर में शहीदों के परिजनों एवं वीरांगनाओं को नमन

जयपुर। कारगिल विजय दिवस की पूर्व संध्या पर शनिवार को जयपुर के बिड़ला ऑडिटोरियम में आयोजित शौर्य संध्या समारोह में सेना के पूर्व नायक उदयवीर सिंह यादव ने कारगिल युद्ध…

जंतर-मंतर पर आंदोलन से लेकर धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे तक: शिक्षा व्यवस्था पर उठते सवाल

देश की राजधानी दिल्ली का जंतर-मंतर वर्षों से लोकतांत्रिक आंदोलनों का प्रमुख केंद्र रहा है। जब भी किसी वर्ग को अपनी आवाज सरकार तक पहुँचानी होती है, तो जंतर-मंतर जनभावनाओं…

डिग्री से आगे बढ़कर कौशल, विशेषज्ञता और कर्म ही बहुजन समाज का भविष्य बदलेंगे।

भूमिकाबहुजन और वंचित समाज के सामने आज सबसे बड़ी चुनौती केवल पढ़-लिख लेना नहीं, बल्कि प्रबोधनम् (जागरण) को जीवन की तरक्की से जोड़ना है। वर्षों तक यह धारणा बनाई गई…

जंतर-मंतर का छात्र आंदोलन सरकार ही नहीं, अंधभक्ति, मीडिया और सामाजिक चुप्पी के विरुद्ध भी है।

भूमिकामंगलम् (शुभारम्भ) लोकतंत्र की सबसे बड़ी शक्ति उसकी जागरूक जनता और आशाओं से भरे युवा होते हैं। जब विद्यार्थी अपने भविष्य की सुरक्षा के लिए सड़कों पर उतरते हैं, तो…

आखिर ग्राउंड रिपोर्टर का कसूर क्या है ?

दिल्ली में हुए छात्र आंदोलन के दौरान देश ने एक ऐसा दृश्य देखा, जिसने पत्रकारिता और लोकतंत्र—दोनों के सामने एक गंभीर प्रश्न खड़ा कर दिया। घटनास्थल पर मौजूद कई ग्राउंड…

कॉकरोच आंदोलन ने बदला जनविमर्श, नई पीढ़ी ने नफ़रत पर लोकतांत्रिक चेतना और संवाद को चुना !

भूमिका सहअस्तित्व ( मिल-जुलकर साथ रहने की भावना) भारतीय समाज की सबसे बड़ी शक्ति है। लंबे समय तक धर्म आधारित बहसों ने जनहित के अनेक प्रश्नों को पीछे धकेला, किंतु…

शिक्षा, नवाचार और सतत विकास के अग्रदूत, सोनम वांगचुक

शिक्षा, नवाचार और सतत विकास के अग्रदूत, सोनम वांगचुक “शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य मस्तिष्क को केवल सूचनाओं से भरना नहीं, बल्कि मनुष्य को अपने परिवेश की व्यावहारिक समस्याओं के समाधान…

दीवारें नहीं, व्यवस्था को पहचानिए; जनता की एकता ही लोकतंत्र और सामाजिक न्याय की सबसे बड़ी शक्ति। भूमिकागजब का प्रबंध है इस देश में — मुनाफा निजी तिजोरियों में जाता…

आने वाली पीढ़ियाँ पूछेंगी, भ्रष्टाचार के दौर में नागरिक जागे थे या केवल तमाशा देखते रहे!

भूमिकासदाचार (श्रेष्ठ आचरण) किसी भी राष्ट्र की सबसे बड़ी नैतिक पूँजी माना जाता है। जब समाज में ईमानदारी का सम्मान घटने लगे और अनैतिकता सामान्य व्यवहार का रूप धारण कर…

अंतरात्मा का अंतरावलोकन, जब टूटता है पाखंड और पिघलता है अहंकार

लेखक (संकलन एवं प्रस्तुति)सोहनलाल सिंगारियाप्रधानाचार्य (RES)सामाजिक-आर्थिक चिन्तकएवं विचारक, ब्यावर किस्मत सखी नहीं फिर भी रूठ जाती है, बुद्धि लोहा नहीं फिर भी जंग लग जाता है, आत्मसम्मान शरीर नहीं फिर…