Month: August 2026

तकनीकी जानकारी से आगे बढ़कर संतुलित सोच, शांति और सार्थक जीवन जीना ही सच्ची बुद्धिमत्ता है

आज का युग सूचनाओं की प्रचुरता का युग है। विवेक (सही निर्णय) हमें यह समझाता है कि अधिक जानकारी होना और अधिक बुद्धिमान होना एक जैसी बात नहीं है। आज…

जो स्वयं जागता है, वही समाज को जगाता है और परिवर्तन का इतिहास रचने का साहस करता है

भूमिकाआज भी बहुजन और वंचित समाज का बड़ा वर्ग परिस्थितियों के प्रवाह में जीवन जीने को विवश है।जागृति ( चेतना) के बिना व्यक्ति अपने भीतर छिपी शक्ति को पहचान नहीं…

राजस्थान शारीरिक शिक्षा शिक्षक संघ शाखा खैरथल तिजारा में अध्यक्ष चुनाव तथा कार्यकारणी गठन

तिजारा ।राजस्थान शारीरिक शिक्षा शिक्षक संघ शाखा खैरथल तिजारा में अध्यक्ष चुनाव तथा जिला कार्यकारिणी के गठन हेतु शारीरिक शिक्षकों की एक आम बैठक का 07 अगस्त को आयोजन जिला…

डांगावास कांड, न्याय व्यवस्था का यथार्थ, ऐतिहासिक घटनाक्रम और बहुजन चेतना का महा-आलेख

लेखक (संकलन एवं प्रस्तुति) सोहन लाल सिंगारिया डिस्क्लेमर (अस्वीकरण)विशेष सूचना, यह आलेख विशुद्ध रूप से शैक्षणिक, विधिक साक्षरता, सामाजिक जागरूकता तथा भारत के संविधान में निहित मूल्यों के संवर्धन के…

अध्यापकों के धरने को राजस्थान शारीरिक शिक्षा शिक्षक संघ का समर्थन

जयपुर।तृतीय श्रेणी संवर्ग के स्थानांतरण को लेकर 5 अगस्त से चल रहे धरने को राजस्थान के शारीरिक शिक्षा शिक्षक संघ द्वारा प्रदेश संरक्षक सुरेंद्र सिंह, प्रदेश मंत्री देवेंद्र सिंह सिद्धू,…

डांगावास कांड में आरोपियों के बरी होने से पीड़ित परिवार में मायूसी: “यदि आरोपी बरी हैं, तो हत्याएँ किसने की?”

कांड मामले में अदालत द्वारा आरोपियों को बरी किए जाने के बाद दलित समाज में गहरी निराशा और पीड़ा देखने को मिल रही है। अनेक सामाजिक संगठनों और लोगों के…

डांगावास कांड, न्याय व्यवस्था का यथार्थ, ऐतिहासिक घटनाक्रम और बहुजन चेतना का महा-आलेख

डांगावास कांड, न्याय व्यवस्था का यथार्थ, ऐतिहासिक घटनाक्रम और बहुजन चेतना का महा-आलेख लेखक (संकलन एवं प्रस्तुति) सोहन लाल सिंगारिया डिस्क्लेमर (अस्वीकरण)विशेष सूचना, यह आलेख विशुद्ध रूप से शैक्षणिक, विधिक…

डांगावास फैसला: वंचित समाज खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहा, न्याय पर उठे गंभीर सवाल?

भूमिका डांगावास हत्याकांड राजस्थान के नागौर जिले के डांगावास गांव में 14 मई 2015 को हुई एक दर्दनाक घटना थी, जिसमें मेघवाल समाज के छह लोगों की मृत्यु हुई। यह…

बहुजन और वंचित समाज के लिए मृत्यु का निर्भय बोध ही सम्मान, संघर्ष और सच्चे जीवन का आधार!

भूमिकाबहुजन और वंचित समाज का इतिहास केवल पीड़ा का इतिहास नहीं, बल्कि संघर्ष, आत्मसम्मान और परिवर्तन का इतिहास भी है। संकल्प (दृढ़ निश्चय) ही वह शक्ति है, जिसने हर अन्याय…

सत्ता, विरोध और भाषा की मर्यादा: इंदिरा गांधी से मोदी तक लोकतंत्र की परीक्षा?

भूमिका प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा बच्चों से जुड़े एक वीडियो के बाद राजनीतिक भाषा, संस्कार और लोकतांत्रिक मर्यादा पर बहस तेज हो गई है। “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जंतर-मंतर की…