“महिला आरक्षण के नाम पर दक्षिण भारत की राजनीतिक ताकत कमजोर करने की साजिश!?”
भूमिका भारत का लोकतंत्र केवल वोटों का खेल नहीं, बल्कि एक संवैधानिक व्यवस्था है जहाँ न्याय, समानता और संतुलन की रूह (आत्मा) बसती है। संसद में महिला आरक्षण पर चर्चा…
आशीष कुमार जोशी का राजस्थान प्रशासनिक सेवा (RAS) में हुआ चयन
सरदारशहर उपखंड क्षेत्र के रातुसर गांव के आशीष कुमार जोशी का राजस्थान प्रशासनिक सेवा (RAS) में हुआ चयनउन्होंने इस प्रतिष्ठित परीक्षा में पूरे राजस्थान में 418वीं रैंक हासिल की है।…
“जब बहुजन वंचित नेतृत्व भीतर से मजबूत हो: एकांत, चरित्र और विवेक से समाज बदलने की असली ताकत!?”
भूमिका बहुजन वंचित समाज के नेता, संत, समाजसेवी, बिजनेस आईकॉन, आर्मी ऑफिसर, शिक्षक, ऐरिष्टोक्रेट, विचारक और ब्यूरोक्रेट केवल पहचान नहीं, बल्कि समाज की जीवंत दिशा हैं। उनका हर निर्णय समाज…
“बहुजन वंचित समाज के विकास में रुकावट बनी रूढ़िवादी सोच और परम्पराओं का प्रभाव!?’
मानवीय जीवन से बढ़कर परम्पराओं का कोई स्थान नहीं हो सकता—यह बात जितनी सरल है, उतनी ही गहरी भी। बहुजन वंचित समाज के संदर्भ में यह प्रश्न और अधिक महत्वपूर्ण…
खोखला आडंबर बनाम मिशनरी जज़्बा: बहुजन आंदोलन के भस्मासुरों से सावधान!
लेखकसोहनलाल सिंगारियासामाजिक विचारक एवं विश्लेषक, ब्यावर प्रस्तावना अंतर्मन की वेदना और एडवोकेट राकेश जयपाल लवेरा पोकरण की वह पुकारआज बहुजन समाज के वैचारिक धरातल पर एक अजीब सी बेचैनी व्याप्त…
“अतीत की बेड़ियों से मुक्ति: जागरूक, संवेदनशील और कर्मठ बहुजन वंचित पुरुष का उदय!?’
बहुजन वंचित समाज के संदर्भ में “सच्चा मर्द” केवल एक शारीरिक पहचान नहीं, बल्कि एक गहरी सामाजिक, नैतिक और वैचारिक परिभाषा है। यह वह व्यक्ति है जो अपने अतीत की…
अजमेर की धरा पर बहुजन चेतना का विराट शंखनाद: बाबा साहेब की 135वीं जयंती पर वैचारिक क्रांति का आगाज़
अजमेर/ब्यावर। भारतीय संविधान के अप्रतिम शिल्पी, आधुनिक भारत के निर्माता और करोड़ों वंचितों के एकमात्र मसीहा भारत रत्न बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर की 135वीं जन्म जयंती की पूर्व संध्या…
“सकारात्मक नामों से बढ़ेगा आत्मविश्वास, बहुजन वंचित समाज के बच्चों को मिलेगी गरिमा और पहचान!?
राजस्थान सरकार द्वारा शुरू किया गया “सार्थक नाम अभियान” केवल एक प्रशासनिक पहल नहीं, बल्कि सामाजिक बदलाव की दिशा में उठाया गया महत्वपूर्ण कदम है। यह अभियान उन बच्चों को…
“उम्र नहीं, लगन मायने रखती है—ज्ञान की राह पर बहुजन वंचित युवा अपनी पहचान खुद गढ़ते हैं!”
“ज्ञान के लिए कोई उम्र नहीं होती”—यह विचार यूनान (ग्रीस) के महान दार्शनिक Epicurus का है, जो आज से लगभग 2300 वर्ष पहले हुए थे। उन्होंने कहा था—“युवावस्था में ज्ञान…
“बाबासाहेब का बंधुत्व संदेश और रक्तदान अभियान : सामाजिक न्याय में व्यवहारिक कोताही का समालोचनात्मक विश्लेषण!!?”
14 अप्रैल—डॉ. भीमराव अंबेडकर की जयंती—भारत में सामाजिक समानता, शिक्षा, न्याय और बंधुत्व के प्रतीक दिवस के रूप में मनाई जाती है। इस अवसर पर अनेक अंबेडकरवादी संगठन रक्तदान शिविर…
