अजमेर/ब्यावर। भारतीय संविधान के अप्रतिम शिल्पी, आधुनिक भारत के निर्माता और करोड़ों वंचितों के एकमात्र मसीहा भारत रत्न बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर की 135वीं जन्म जयंती की पूर्व संध्या पर डॉ. भीमराव अंबेडकर प्रचार संस्थान, अजमेर के तत्वाधान में आयोजित समारोह ने सफलता के समस्त कीर्तिमानों को ध्वस्त कर दिया। सुभाष नगर स्थित ‘जय भीम पैलेस’ के प्रांगण में आयोजित यह समागम केवल एक उत्सव नहीं था, बल्कि यह बहुजन समाज की आर्थिक शक्ति, सेवा भाव और बौद्धिक सुदृढ़ता का एक जीवंत ऐतिहासिक दस्तावेज बन गया।
I. समारोह का शुभारम्भ एवं अतिथि अगवानी
भव्य अगवानी: समारोह का आगाज़ शाम 5:30 बजे मुख्य अतिथि श्री भगवान दास भोपरिया एवम कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथियों के आगमन के साथ हुआ। संस्थान की कार्यकारिणी द्वारा खानपुरा रोड पर ढोल-नगाड़ों और ‘जय भीम’ के उद्घोष के साथ अतिथियों पर पुष्प वर्षा करते हुए उपस्थित संपूर्ण संस्थान कार्यकारिणी द्वारा शाही अगवानी की गई।
माल्यार्पण एवं पुष्पांजलि: समारोह का विधिवत उद्घाटन बाबा साहेब की प्रतिमा पर माल्यार्पण के साथ हुआ। उपस्थित जनसमूह और आगंतुकों द्वारा बाबा साहेब के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें श्रद्धासुमन अर्पित किए गए।
दीप प्रज्वलन: अतिथियों द्वारा दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम की वैचारिक शुरुआत की गई।
आध्यात्मिक चेतना: कार्यक्रम की मुख्य शुरुआत श्री गुलाब चंद दौलिया संस्थान कोषाध्यक्ष द्वारा कराई गई भीम वंदना, त्रिशरण एवं पंचशील वंदना से हुई। मधुर स्वरों में गूंजते इन मंत्रों ने संपूर्ण वातावरण को धम्ममय और शांतिपूर्ण बना दिया।
अतिथियों का पुष्पहार व साफा सम्मान: संस्थान के अध्यक्ष एवं कार्यकारिणी द्वारा मंचासीन अतिथियों का पुष्पहार, साफा बांधकर और (नीला दुपट्टा) भीम ओढ़ा कर स्वागत किया गया。
II. मुख्य वक्ता एवं वैचारिक प्रबोधन
मुख्य वक्ता का ओजस्वी भाषण (विस्तृत): ब्यावर के प्रख्यात सामाजिक विचारक और प्रधानाचार्य श्री सोहनलाल सिंगारिया ने “महामानव की महागाथा: गुलामी के अंधेरे से सत्ता के शिखर तक” विषय पर अपना मुख्य व्याख्यान दिया。
सिंगारिया जी ने स्पष्ट किया कि बाबा साहेब का जीवन हजारों वर्षों की मानसिक दासता के विरुद्ध लड़ा गया विश्व का सबसे बड़ा बौद्धिक युद्ध है।
60 क्रांतिकारी बिंदुओं का वर्णन: सिंगारिया जी ने बाबा साहेब के समग्र जीवन दर्शन और उनके संघर्षों को 60 क्रांतिकारी बिंदुओं में पिरोकर समाज के समक्ष रखा।
”No Peon, No Water” का विश्लेषण (विस्तृत): सिंगारिया जी ने बाबा साहेब के बचपन के संघर्षों, विशेषकर सतारा के स्कूल में चपरासी के अभाव में पानी न मिलने की घटना का मार्मिक विश्लेषण किया। उन्होंने बताया कि इसी अपमान ने भीमराव को विश्व का सबसे शिक्षित व्यक्ति बनने की प्रेरणा दी।
विद्वत्ता और 32 डिग्रियाँ: व्याख्यान में बाबा साहेब की अगाध विद्वत्ता, उनकी 32 डिग्रियों और 9 भाषाओं के ज्ञान पर प्रकाश डालते हुए युवाओं को शिक्षा के प्रति प्रेरित किया गया।
संवैधानिक अधिकारों की महत्ता:
सिंगारिया जी ने अनुच्छेद 17 (छुआछूत का अंत) और ‘एक व्यक्ति, एक वोट’ के सिद्धांत को लोकतंत्र की असली शक्ति बताया।
III. आर्थिक सुदृढ़ता एवं भामाशाहों का समर्पण
माननीय बंसी लाल सुनेरीवाल का ऐतिहासिक दान: संस्थान के वरिष्ठ उपाध्यक्ष श्री बंसी लाल सुनेरीवाल ने समाज सेवा की नई मिसाल पेश करते हुए ₹1,21,000 का चेक संस्थान को भेंट किया。
’पे-बैक टू सोसाइटी’ का जीवंत उदाहरण: सुनेरीवाल जी का यह समर्पण समाज को वापस देने के सिद्धांत का सबसे बड़ा प्रमाण बना。
श्रीमती सरोज खटनावलिया का सहयोग: वरिष्ठ आरएएस अधिकारी श्री मोहनलाल जी खटनावलिया की जीवन संगिनी श्रीमती सरोज खटनावलिया ने संस्थान को ₹11,000 की नगद राशि भेंट कर महिला नेतृत्व का परिचय दिया।
सिंगारिया परिवार का समर्पित योगदान: ब्यावर से पधारे प्राचार्य श्री सोहनलाल सिंगारिया एवं प्राचार्य श्रीमती रेखा सिंगारिया ने ₹5,100 की नगद राशि संस्थान के विकास हेतु समर्पित की。
म्यूजिक सिस्टम का अर्पण: श्री पूरण मल जी, श्री कालूराम जी मंडरावलिया और श्री दुर्गा लाल जी देवत ने संयुक्त रूप से ₹28,000 की लागत का अत्याधुनिक म्यूजिक सिस्टम संस्थान को भेंट किया。
पंखों का उपहार: सेवानिवृत्त अधिशासी अभियंता (PWD) श्री कल्याणमल जी मंडावरिया ने संस्थान भवन हेतु ₹10,500 मूल्य के 6 सीलिंग फैन भेंट किए。
योगेशजी मौर्य का सहयोग: मुख्य महाप्रबंधक (BSNL) श्री योगेश कुमार जी मौर्य ने संस्थान को ₹16,000 की राशि का सहयोग प्रदान किया。
भवानी शंकर जी राठोरिया का अंशदान: श्री भवानी शंकर राठोरिया ने ₹11,000 का सहयोग कर समाज के प्रति अपनी जवाबदेही निभाई。
दिनेश कुमार जी नवल का दान: समाजसेवी श्री दिनेश कुमार जी नवल ने ₹8,000 की राशि प्रदान कर सामाजिक कार्यों को गति दी。
संस्थान के प्रति समर्पित मिशनरी साथियों का मंच पर सम्मान: संस्थान को विशेष योगदान करने वाले सभी समर्पित मिशनरी साथियों को मंच पर पुष्पहार, साफा, एवम (भीम) नीला दुपट्टा ओढ़ा कर एवम स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया गया।
IV. महिला सशक्तिकरण एवं नारी शक्ति
श्रीमती रेखा सिंगारिया के विचार संस्थान सचिव और प्रधानाचार्य श्रीमती रेखा सिंगारिया ने महिलाओं के मुक्तिदाता के रूप में बाबा साहेब के योगदान पर प्रकाश डाला। उन्होंने हिंदू कोड बिल के महत्व को समझाते हुए नारी शिक्षा पर जोर दिया।
नारी शक्ति का आह्वान: रेखा सिंगारिया जी बाबासाहेब के पश्चात की तीसरी और चौथी पीढ़ी को व्यावहारिक रूप से सामाजिक आंदोलनों में शामिल करने का पुरजोर आह्वान किया।
बीके श्रीमति सुनीता जी की शीतल पेय सेवा: भीषण गर्मी को देखते हुए माननीया बीके सुनीता जी ने अपने हाथों से निर्मित ‘आम पन्ना’ रस समस्त अतिथियों को पिलाकर सेवा की अनूठी मिसाल पेश की।
प्रेरणादायी कैलेंडर वितरण: श्रीमती बीके सुनीता जी द्वारा पधारे हुए महानुभावों को प्रेरणादायी कैलेंडर भी भेंट किए गए।
मातृशक्ति की विशाल उपस्थिति: समारोह में बड़ी संख्या में महिलाओं की भागीदारी ने नारी सशक्तिकरण के बढ़ते कदमों को प्रदर्शित किया।
V. प्रतिभा सम्मान एवं शैक्षणिक गौरव
मेधावी छात्र सम्मान: मुख्य अतिथि श्री भगवान दास भोपरिया के आर्थिक सहयोग से अनु. जाति/जनजाति के मेधावी छात्र-छात्राओं को 20 ‘सिल्वर मेडल’ प्रदान किए गए。
कक्षा 10वीं के मेधावी: 86.50% अंक प्राप्त करने वाली कु. प्रिश्मा, दिव्या और मीनाक्षी को सम्मानित किया गया。
कक्षा 12वीं के मेधावी: 95.80% अंक प्राप्त करने वाले दक्ष और 94.80% प्राप्त करने वाली कु. मनस्वी को सिल्वर मेडल दिया गया。
उच्च शिक्षा का गौरव: 94.61% प्राप्त करने वाले एम.ए. के छात्र मोहित जाजोरिया को विशेष रूप से सम्मानित किया गया。
डॉ. हरीश वर्मा का उद्बोधन: प्रोफेसर एवं परीक्षा नियंत्रक डॉ. हरीश वर्मा ने उच्च शिक्षा के महत्व पर जोर देते हुए विद्यार्थियों को निरंतर आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया。
VI. सांस्कृतिक संध्या एवं कलात्मक संगम
समायरा की जादुई प्रस्तुति (विस्तृत): नन्हीं समायरा (सुपुत्री श्रीमती रेखा सिंगारिया) ने “मेरे मन में भीम है, मेरी सांसों में भीम है” गीत पर ओजस्वी नृत्य प्रस्तुत कर जनसमूह को मंत्रमुग्ध कर दिया。
माही तंवर का नृत्य: कु. माही सुपुत्री श्री गजेंद्र तंवर ने अपनी कला के माध्यम से बाबा साहेब के संघर्षों को
मंच पर जीवंत किया。
रिषिका और कृषिता की प्रस्तुति: रिषिका दौलिया और कृषिता तुनगरिया ने शानदार नृत्य प्रस्तुतियां दीं。
तनिष्का और पदम प्रिया का प्रदर्शन: तनिष्का सुनेरीवाल और पदम प्रिया राठौड़िया के सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने दर्शकों की खूब तालियां बटोरीं。
अथर्व नवल का गायन/नृत्य: नन्हे कलाकार अथर्व नवल की प्रस्तुति ने भी सभी का मन मोह लिया。
स्मृति चिह्न वितरण: सांस्कृतिक प्रतियोगियों को स्मृति चिह्न और पुरस्कार देकर उनका उत्साहवर्धन किया गया。
VII. प्रशासनिक एवं संस्थागत प्रबंधन
माननीय मोहनलाल जी खटनावलिया (RAS) का संदेश: वरिष्ठ आरएएस अधिकारी ने समाज के शिक्षित वर्ग और अधिकारियों को ‘रेगर ऑफिसर क्लब’ के माध्यम से की जा रही समाज सेवा के बारे में विस्तार से बताते हुए समाज सेवा के लिए प्रेरित किया ।
प्रबंधन एवं जल सेवा: संस्थान के महासचिव श्री सुरेश कुमार तुनगरिया ने समस्त अतिथियों के लिए जल सेवा और नाश्ते की चाक-चौबंद व्यवस्था अपने व्व्यक्तिगत खर्चे (सौजन्य)से की。
ऊर्जावान संचालन: संस्थान के ऑडिटर श्री महेश चंद्र मोहनपुरिया ने मंच का अत्यंत प्रभावशाली और ओजस्वी संचालन किया。
स्वागत उद्बोधन : संस्थान संरक्षक श्री छगन लाल मौर्य ने आगंतुकों का स्वागत करते हुए संस्थान की विकास यात्रा साझा की और पाखंडवाद मुक्त समाज की अपील की。
’भीम ज्योति-2026′ का विमोचन: संस्थान के वैचारिक दर्पण ‘भीम ज्योति’ पत्रिका का मुख्य अतिथियों द्वारा गरिमामय विमोचन किया गया。
VIII. अन्य विशिष्ट सहयोग एवं गतिविधियां
माननीय आनन्द कुमार जी तंवर का सहयोग: प्रशासनिक अधिकारी (LIC) श्री आनंद कुमार जी तंवर ने ₹5,100 का सहयोग देकर कार्यक्रम की गरिमा बढ़ाई。
कैलाश चन्द जाटोलिया का योगदान: व०लेखा परीक्षक श्री कैलाश चन्द जाटोलिया ने संस्थान के वित्तीय प्रबंधन में अपनी सेवाएं अर्पित कीं。
उपस्थिति: श्री राम सिंह जी रैगर ने समाज के आर्थिक सुदृढ़ीकरण हेतु ₹5,100 की राशि प्रदान की。
अन्य योगदान एवं समर्थन: श्री नोरत मल जी बोहरा ने बाबा साहेब के सामाजिक कार्यों पर अपने विचार व्यक्त कर प्रेरित किया。
परीक्षार्थी सहायतार्थ दान: अजमेर आने वाले परीक्षार्थियों के भोजन और ठहरने की व्यवस्था हेतु सहयोग देने वाले दानदाताओं का विशेष आभार अध्यक्ष महोदय द्वारा व्यक्त किया गया。
आजीवन सदस्यों का सम्मान: संस्थान के आजीवन सदस्यों को उनकी दीर्घकालिक निष्ठा हेतु मंच पर सम्मानित किया गया。
मगन लाल जी मौर्य का संबोधन: वयोवृद्ध श्री मगन लाल जी मौर्य ने नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जुड़ने की प्रेरणा दी。
नोरत मल जी जाजोरिया के विचार: समाजसेवी श्री नोरत मल जी जाजोरिया ने वैचारिक क्रांति पर प्रकाश डाला。
IX. संकल्प एवं समापन
सामूहिक संकल्प और स्नेह भोज: समारोह का समापन सभाध्यक्ष श्री भगवान स्वरूप मंडावरिया के संबोधन और सामूहिक स्नेह भोज के साथ हुआ, जहाँ सभी ने हाथ उठाकर बाबा साहेब के कारवां को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया。
आओ मिलकर संकल्प लें, बाबा साहेब के कारवां को रुकने नहीं देंगे!जय भीम जय भारत जय संविधान नमो बुद्धाय

लेखक
सोहन लाल सिंगारिया
सामाजिक विचारक एवं विश्लेषक ब्यावर
