भाजपा अनुसूचित जाति मोर्चा के जिलाध्यक्ष बने अनिल चिरानिया, कार्यकर्ताओं में खुशी की लहर

सरदारशहर। भारतीय जनता पार्टी अनुसूचित जाति मोर्चा के प्रदेशाध्यक्ष एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री निहालचंद मेघवाल द्वारा अनील चिराणिया को चूरू जिला अनुसूचित जाति मोर्चा का जिलाध्यक्ष नियुक्त किया।इस अवसर पर…

इंसानियत की सूली पर व्यवस्था का तंत्र जब एक बेकसूर बहुजन की भलाई बनी उसका अभिशाप

विशेष आलेख भोपाल के राजेश विश्वकर्मा के जीवन-संघर्ष और विधिक सजगता पर आधारित एक मर्मस्पर्शी आलेख प्रस्तावना-सामाजिक चेतना का आह्वान एक समतावादी और मानवीय समाज की आधारशिला इस बात पर…

संस्कृत जगत का गौरव शिक्षाविद् प्रोफेसर डॉ. मूलचन्द“संस्कृत महामहोपाध्याय” की मानद उपाधि से अलंकृत

प्रयागराज । हिंदी साहित्य सम्मेलन प्रयाग के राजर्षि टंडन मंडपम् में हिंदी साहित्य सम्मेलन के उन्नायक एवं पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. प्रभात शास्त्री की 108वीं जयंती श्रद्धापूर्वक मनाई गई। समारोह के…

“छात्रों की आवाज़ दबाकर राष्ट्रवाद बेचने वाला मीडिया आखिर किस लोकतंत्र की रक्षा कर रहा है?”

जब सवाल पूछना “देशद्रोह” बन जाए — तब समझिए लोकतंत्र खतरे में है।भारत को दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र कहा जाता है। यह वही देश है जहाँ संविधान ने हर…

“रो लो बेटा… लेकिन अपने सपनों को मरने मत देना”

नीट परीक्षा में असफल होने पर एक वंचित समाज के पिता द्वारा अपने पुत्र को लिखा गया पत्र:-नीट से बड़ी है जिंदगी — और जिंदगी से बड़ा है तुम्हारा हौसला”…

“चमकते प्रचार अभियानों के पीछे छिपती अर्थव्यवस्था, महंगाई और जनता की बढ़ती आर्थिक बेचैनी?”

भूमिकाकिसी भी राष्ट्र की वास्तविक ताकत केवल बड़े नारों और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर दिए गए भाषणों से तय नहीं होती, बल्कि उसकी आर्थिक स्थिति, रोजगार, शिक्षा और आम नागरिक के…

“ब्लॉक नंबर”

ब्लॉक नंबर के पीछे दब गई एक अधूरी प्रेम कहानी,इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ़ टेक्नोलॉजी खरगपुरके विशाल और हरियाली से भरे परिसर में हर शाम कुछ कहानियाँ जन्म लेती थीं। कुछ किताबों…

“इंसान का दुख वास्तविक नहीं, बल्कि सामाजिक सोच और परंपराओं की मानसिक उपज है!”

भूमिका मनुष्य अपने जीवन में जिन भावनाओं को सबसे अधिक वास्तविक मानता है, वे अक्सर समाज द्वारा निर्मित धारणाएँ होती हैं। जन्म लेते समय कोई भी बच्चा न शर्म लेकर…

युगप्रवर्तक बाबा साहेब डॉ. बी.आर. अम्बेडकर की संबल- त्यागमूर्ति माता रमाबाई अम्बेडकर के मूक बलिदान और सामाजिक क्रांति की अमर गाथा

पुण्यतिथि 27 मई 2026 पर माता रमाबाई को सादर समर्पित प्रस्तावना: चेतना की पृष्ठभूमि और मूक क्रांति का उद्घोष किसी भी युगांतरकारी सामाजिक क्रांति की नींव केवल तात्कालिक और दृश्य…

भारत के मांस निर्यात और गो-वंश उद्योग की जमीनी सच्चाई: भ्रांतियां बनाम आर्थिक, कानूनी और सामाजिक यथार्थ

लेखकसोहनलाल सिंगारिया(सामाजिक-आर्थिक चिंतक एवं विचारक डिस्क्लेमर (अस्वीकरण):यह लेख पूरी तरह से भारत सरकार के वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय (APEDA), कॉर्पोरेट मामलों के मंत्रालय (MCA), भारतीय संविधान के अनुच्छेदों और विभिन्न…