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महात्मा ज्योतिबा फुले: आधुनिक भारत के निर्माता और सामाजिक न्याय के महामानव

जन्म जयंती 11 अप्रैल 2026 के पावन अवसर पर सादर समर्पित लेखकसोहनलाल सिंगारियासामाजिक विचारक एवं विश्लेषक भारत का इतिहास केवल उन राजाओं की गाथा नहीं है जिन्होंने तलवारों के दम…

गांव-गांव में किया डॉ. अंबेडकर जयंती सम्मान समारोह का पोस्टर विमोचन

चौमूं (सुरेन्द्र सिंह हरसोलिया)। शहर में बलाई विकास समिति जयपुर मुख्यालय-चौमूं के तत्वावधान में बलाई सभा-भवन, मोरीजा रोड, चौमूं में आयोजित होने वाले डॉ. भीमराव अंबेडकर जयंती सम्मान समारोह का…

सांचौर में ब्लड बैंक शुभारंभ पर रक्तदान शिविर आयोजित, मातृ शक्ति ने पेश की मिसाल

सांचौर। स्थानीय अस्पताल में ब्लड बैंक के शुभारंभ के अवसर पर एक भव्य रक्तदान शिविर का आयोजन किया गया। इस अवसर पर क्षेत्र के युवाओं एवं आम नागरिकों ने बढ़-चढ़कर…

रैगर समाज धर्मशाला में अम्बेडकर जयंती की तैयारीयों को लेकर बैठक का हुआ आयोजन

सांचौर। अम्बेडकर सेवा समिति सांचौर की बैठक अध्यक्ष नरेश पातलिया की अध्यक्षता में रैगर समाज धर्मशाला सांचौर में आयोजित हुई । बैठक में 14 अप्रेल 2026 को भारतरत्न, संविधान निर्माता,…

“शोषण से उपजा वंचित का व्यक्तित्व द्वंद्व, संबंधों में तनाव और आत्मसम्मान की खोज का मनोवैज्ञानिक सच!?”

समाज का एक बड़ा वर्ग आज भी उस अदृश्य दबाव के साथ जीवन जी रहा है, जिसे हम शोषण, असमानता और उपेक्षा के नाम से जानते हैं। वंचित समाज की…

“संसद, न्यायालय और संस्थाओं की निष्पक्षता पर प्रश्न, जनता का विश्वास संकट में पड़ा?”

आज का समय भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में एक ऐसे मोड़ पर खड़ा दिखाई देता है, जहाँ प्रश्न केवल सत्ता परिवर्तन का नहीं, बल्कि व्यवस्था की विश्वसनीयता का है। प्रतिपक्ष…

“हदों की पहचान से वंचित समाज का सशक्तिकरण और सम्मानपूर्ण रिश्तों की नई परिभाषा!”

वंचित समाज के जीवन में हदें केवल सामाजिक दायरे नहीं बल्कि आत्मसम्मान की रेखाएँ होती हैं। जब कोई व्यक्ति अपनी सीमाओं को समझता है, तो वह अपने अस्तित्व को बचाने…

“मुस्लिम भाइयों के प्रति प्रेम, सम्मान और सद्भावना ही भारत की असली पहचान और ताकत!”

आज जब हम अपने आसपास की दुनिया को देखते हैं, तो खबरों और चर्चाओं का एक अलग ही मंजर (दृश्य) दिखाई देता है। लेकिन यदि हम थोड़ी देर के लिए…

” शिक्षा और चेतना से सशक्त वंचित समाज: ईमानदार नेताओं पर विश्वास बढ़ाने का मार्ग!?’

भारत की प्रजातांत्रिक व्यवस्था में कुछ शब्द अत्यंत लोकप्रिय हो चुके हैं—जैसे सुशासन, जनता की सरकार, और भ्रष्टाचार उन्मूलन। ये शब्द केवल भाषणों तक सीमित रह जाते हैं और एक…

“कर्मों की सच्चाई से सामना कर इंसानियत और आत्मा के शुद्ध मार्ग की खोज!?”

हम सब अपने-अपने जीवन में इंसाफ़ (न्याय) की बातें बड़े गर्व से करते हैं, जैसे हम स्वयं पूरी तरह निष्कलंक हों। पर जब आत्मा की गहराई में उतरकर देखते हैं,…