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“संसद, न्यायालय और संस्थाओं की निष्पक्षता पर प्रश्न, जनता का विश्वास संकट में पड़ा?”

आज का समय भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में एक ऐसे मोड़ पर खड़ा दिखाई देता है, जहाँ प्रश्न केवल सत्ता परिवर्तन का नहीं, बल्कि व्यवस्था की विश्वसनीयता का है। प्रतिपक्ष…

“हदों की पहचान से वंचित समाज का सशक्तिकरण और सम्मानपूर्ण रिश्तों की नई परिभाषा!”

वंचित समाज के जीवन में हदें केवल सामाजिक दायरे नहीं बल्कि आत्मसम्मान की रेखाएँ होती हैं। जब कोई व्यक्ति अपनी सीमाओं को समझता है, तो वह अपने अस्तित्व को बचाने…

“मुस्लिम भाइयों के प्रति प्रेम, सम्मान और सद्भावना ही भारत की असली पहचान और ताकत!”

आज जब हम अपने आसपास की दुनिया को देखते हैं, तो खबरों और चर्चाओं का एक अलग ही मंजर (दृश्य) दिखाई देता है। लेकिन यदि हम थोड़ी देर के लिए…

” शिक्षा और चेतना से सशक्त वंचित समाज: ईमानदार नेताओं पर विश्वास बढ़ाने का मार्ग!?’

भारत की प्रजातांत्रिक व्यवस्था में कुछ शब्द अत्यंत लोकप्रिय हो चुके हैं—जैसे सुशासन, जनता की सरकार, और भ्रष्टाचार उन्मूलन। ये शब्द केवल भाषणों तक सीमित रह जाते हैं और एक…

“कर्मों की सच्चाई से सामना कर इंसानियत और आत्मा के शुद्ध मार्ग की खोज!?”

हम सब अपने-अपने जीवन में इंसाफ़ (न्याय) की बातें बड़े गर्व से करते हैं, जैसे हम स्वयं पूरी तरह निष्कलंक हों। पर जब आत्मा की गहराई में उतरकर देखते हैं,…

वीरांगना झलकारी बाई की पुण्यतिथि श्रद्धा पूर्वक मनाई गई

नागौर। समता सैनिक दल जिला शाखा डीडवाना – कुचामन के तत्वावधान में आज दिनांक 4 अप्रैल 2026 वार शनिवार को दल के मकराना स्थित कार्यालय में वीरांगना झलकारी बाई की…

बाबू जगजीवन राम, सामाजिक क्रांति के महानायक और आधुनिक भारत के आधार स्तंभ

यह लेख 5 अप्रैल 2026 को जन्म जयंती पर हार्दिक श्रद्धांजलि स्वरूप बाबू जगजीवन राम जी को समर्पित लेखकसोहन लाल सिंगारियासामाजिक विचारक एवं विश्लेषक भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में बाबू…

“बदलते रिश्तों की सच्चाई में खोती इंसानियत और बढ़ती दिखावे की खतरनाक संस्कृति!”

वो ज़माना सचमुच किसी दास्तान (कहानी) की तरह लगता है, जहाँ रिश्तों की नींव विश्वास और अपनापन हुआ करता था। तब जीवन में ग्लैमर (चमक-दमक) नहीं, बल्कि सादगी की महक…

“खाली जेब, टूटी उम्मीदें और रसोई में पड़ा सिलेंडर देश की सच्चाई बयान करता है!”

देश में आजकल मौसम विभाग की चेतावनियाँ कम और समस्याओं की चेतावनियाँ ज़्यादा सुनाई देती हैं। कभी महँगाई की सुनामी आती है, कभी बेरोज़गारी की आंधी, तो कभी सड़कों के…

“वंचित का “आस्था” का दीपक अंधविश्वास के तेल से जलता है और..”तर्क” के फूंक से बुझ जाता है।”

भूमिका अंधविश्वास मानव समाज की एक कॉम्प्लेक्स (जटिल) समस्या है, जो विशेष रूप से वंचित वर्गों में अधिक दिखाई देती है। यह केवल किसी एक मज़हब (धर्म) तक सीमित नहीं,…