नागौर। समता सैनिक दल जिला शाखा डीडवाना – कुचामन के तत्वावधान में आज दिनांक 4 अप्रैल 2026 वार शनिवार को दल के मकराना स्थित कार्यालय में वीरांगना झलकारी बाई की पुण्यतिथि श्रद्धा पूर्वक मनाई गई। इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि ओमप्रकाश कांसोटिया प्रदेश महासचिव समता सैनिक दल राजस्थान थे। जबकि अध्यक्षता वरिष्ठ सैनिक देवराज देवरिया ने की ।

समारोह का प्रारंभ फूले दंपति एवं झलकारी बाई के चित्र पर पुष्प एवं माला द्वारा किया गया। समारोह को संबोधित करते हुए धीमान ओमप्रकाश कांसोटिया ने बताया कि झलकारी बाई बचपन से ही बहुत साहसी एवं दृढ़ प्रतिज्ञ वाली बालिका थी। झलकारी के घर के काम के अलावा पशुओं का रख रखाव और जंगल से लकड़ी इकट्ठा करने का काम भी करती थी ।झलकारी बाई के बहादुरी के किस्से गांव में चर्चा का विषय था। लॉर्ड डलहौजी ने राज्य हड़पने की नीति से ब्रिटिशों ने निसंतान लक्ष्मी बाई को उनके उत्तराधिकारी को लेने की अनुमति नहीं दी ।

क्योंकि वह ऐसा करके राज्य को अपने नियंत्रण में लाना चाहते थे ।हालांकि ब्रिटिश की इस कार्रवाई के विरोध में रानी के सेनिको में से एक ने उन्हें धोखा दिया। उसने दक्षिण द्वार ब्रिटिशों के लिए खोल दिया जब किले का पतन निश्चित हो गया तो रानी ने सेनापतियों और झलकारी ने उन्हें कुछ सैनिकों के साथ किला छोड़कर भागने की सलाह दी ।रानी अपने घोड़े पर बैठ झांसी से दूर निकल गई ।झलकारी बाई का पति पूर्णन कोरी किले की रक्षा करते हुए शहीद हो गया था ।लेकिन झलकारी बाई ने अपने पति की मृत्यु का शोक मनाने के बजाय ब्रिटिश को धोखा देने की एक योजना बनाई और लक्ष्मीबाई की तरह कपड़े पहने और झांसी की सेना की कमान अपने हाथ में ले ली। इसके बाद में वह अकेले ही बाहर निकाल ब्रिटिश जनरल के सीवर में उनसे मिलने पहुंची ।ब्रिटिश सीवर में पहुंचने पर उसने चिल्लाकर कहा कि वह जनरल से मिलना चाहती है। जनरल और उसके सैनिक खुश थे कि उन्होंने झांसी पर कब्जा कर लिया बल्कि जीवित रानी भी उनके कब्जे में है ।जनरल ने उसे रानी समझ रहा था। झलकारी बाई से पूछा कि उसके साथ क्या किया जाना चाहिए तो उसने निडरता के साथ कहा मुझे फांसी दे दो। जनरल झलकारी का सहास और उसकी नेतृत्व क्षमता से बहुत प्रभावित हुआ और झलकारी को रिहा कर दिया गया ।इसके विपरीत कुछ इतिहासकार मानते हैं की झलकारी बाई इस युद्ध के दौरान वीरगति को प्राप्त हो गई । कांसोटिया ने आगे बताया कि झलकारी बाई के इतिहास को इतिहासकार द्वारा सही विस्तार से नहीं बताया गया लेकिन आधुनिक लिखको ने उन्हें गुमनामी से उभरा है ।जन कवी बिहारी लाल हरित ने वीरांगना झलकारी बाई की काव्य की रचना की है। वरिष्ठ सैनिक देवराज दिवालिया ने भी झलकारी बाई के योगदान को विस्तार से बताया। आज के इस कार्यक्रम में गौतम नायक, लक्ष्मी नायक ,अजीत नायक, पवन नायक ,दक्ष ,रंजीत नायक दीपक मेघवाल ,महेश नायक ,कमल नायक, मयंक धाधल ,गीता नायक, कुसुम लता नायक, सोनू नायक ,माधुरी नायक ,जीविका, नीहारीका, पायल मेघवाल, सोनिया, गीता ,मोनिका सुमन गुर्जर ,महेश मेघवाल , नितेश गुर्जर ,तेजपाल गुर्जर ,माया नायक ,महेश नायक योगेश वाल्मीकि ,संदीप वाल्मीकि , सूरज धांधल,कृष्णा नायक के अलावा कई गणमान्य लोग उपस्थित थे।

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