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“बहुजन वंचित समाज के सुधारक की आत्मकथा: भीतर पलता द्वंद्व, अस्वीकार और करुणा की यात्रा!

मैं अक्सर सोचता हूँ—क्या सचमुच मैं एक सामान्य मनुष्य हूँ, या फिर उन अनगिनत अनकहे दर्दों का संग्रह, जिन्हें इस समाज ने कभी स्वीकार ही नहीं किया। किसी का दर्द…

बाड़मेर के कुलदीप का सहायक आचार्य पद पर चयन होने पर किया अभिनन्दन

बाड़मेर – पिछले कुछ वर्षों से शिक्षा के क्षेत्र में मेहनत कर सरकारी सेवा में अग्रणी रहकर जिले का नाम रोशन कर रहे है। इसी कड़ी में आज कॉलेज शिक्षा…

सांचौर क्षेत्र के मेघवाल समाज को मिला पहला आरएएस अधिकारी,महेंद्र पांचल की 1634वीं रैंक से चयन।

सांचौर। मंजिल उन्हीं को मिलती है जिनके सपनों में जान होती है पंखों में कुछ नहीं होता है हौसलों में उड़ान होती हैं ऐसा हि कुछ कर दिखाया जालोर जिले…

मोबाइल के दौर में खोता अखबार : -पढ़ना सब चाहते हैं, पर मंगवाता कोई नहीं ,समाज की असली सच्चाई”

आज के दौर में एक अजीब विडंबना देखने को मिलती है—अखबार पढ़ना सब चाहते हैं, लेकिन घर पर मंगवाने की पहल बहुत कम लोग करते हैं। हर पढ़ा-लिखा व्यक्ति देश-दुनिया…

“पसमांदा हाशियाकरण, आर्थिक असमानता और मुस्लिम समाज में छिपे जातिवाद का कठोर सच?”

भूमिकाभारतीय समाज की सबसे बड़ी विडंबना यह रही है कि यहाँ समानता के आदर्शों के बावजूद व्यवहार में भेदभाव गहराई तक मौजूद है। अक्सर यह धारणा बनाई जाती है कि…

सामाजिक सरोकार के साथ सादगीपूर्ण अंदाज में सम्पन्न हुई कमलेश कुमार की शादी, संस्थाओं को दी आर्थिक सहायता

जैसलमेर । भानु सेवा संस्थान के संरक्षक एवं राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय दव जिला जैसलमेर में कार्यरत अध्यापक दमाराम मेघवाल ने अपने सुपुत्र कमलेश कुमार का विवाह सामाजिक सरोकार और…

साहित्य मित्र समूह ने अरविंद कालमा को परिणय सूत्र में बंधने पर बाबा साहेब की प्रतिमा भेंट कर दी बधाई।

चितलवाना (अरविन्द डाभी)पश्चिमी राजस्थान के सांचौर क्षेत्र में साहित्यिक के लिए प्रसिद्ध साहित्य मित्र समूह के संस्थापक भादरूणा निवासी अरविंद कालमा को उनके परिणय सूत्र में बंधने के शुभ अवसर…

“बहुजन वंचित जीवन के दर्द को समझे बिना प्रेम अधूरा, स्वीकार से ही रिश्ते मुकम्मल होते!”

बहुजन वंचित समाज का जीवन सिर्फ अभाव की कहानी नहीं, बल्कि पीढ़ियों से मिले दर्द, अन्याय और उपेक्षा की सच्चाई है। ऐसे लोग अक्सर बाहर से सामान्य दिखते हैं, पर…

डिस्पोजेबल पेपर कप: सुविधा के नाम पर शरीर में घुलता धीमा जहर

संकलन एवं प्रस्तुतिसोहनलाल सिंगारियाप्राचार्य,सामाजिक-आर्थिक चिन्तक 1. प्रस्तावनाआधुनिकता का छलावा और लुप्त होती परंपराएंमानव इतिहास में ‘विकास’ की परिभाषा हमेशा जीवन को सुगम बनाने की रही है, लेकिन वर्तमान दौर में…