
पाली। शिक्षक दिवस के अवसर पर भारतीय दलित साहित्य अकादमी, जिला शाखा पाली द्वारा ऑनलाइन परिचर्चा का आयोजन किया गया। परिचर्चा में शिक्षक की समाज एवं राष्ट्र निर्माण में भूमिका, शिक्षा का महत्व तथा सामाजिक चेतना के विभिन्न पहलुओं पर विचार व्यक्त किए गए।
कार्यक्रम के संरक्षक डॉ. पन्नालाल कटारिया, अध्यक्ष डॉ. मोहनलाल सोनल,उपाध्यक्ष चूनाराम बारसा, एवं सचिव हरीश सुवासिया, मांगीलाल रांगी, वक्ताराम बामणिया के मार्गदर्शन में आयोजित इस ऑनलाइन परिचर्चा का प्रभावी संचालन कपूराराम मेघसेतु ने किया।
कार्यक्रम में डॉ. तेजाराम परिहार एवं मान्यवर भोमाराम बोस विशेष अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। वक्ताओं ने शिक्षक दिवस के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि शिक्षक केवल ज्ञान प्रदान करने वाला व्यक्ति ही नहीं, बल्कि विद्यार्थियों के व्यक्तित्व निर्माण तथा समाज को सही दिशा देने वाला मार्गदर्शक भी होता है।
वक्ताओं ने कहा कि शिक्षा सामाजिक परिवर्तन और समानतामूलक समाज की स्थापना का सशक्त माध्यम है। दलित साहित्य भी समाज में व्याप्त असमानताओं, वंचितों की पीड़ा और सामाजिक न्याय के प्रश्नों को अभिव्यक्ति प्रदान करते हुए चेतना एवं परिवर्तन का महत्वपूर्ण कार्य कर रहा है।
ऑनलाइन परिचर्चा में उपस्थित साहित्यकारों, शिक्षकों एवं प्रतिभागियों ने शिक्षक दिवस के अवसर पर शिक्षकों के योगदान को नमन करते हुए शिक्षा और साहित्य के माध्यम से सामाजिक सरोकारों को मजबूत बनाने का संकल्प व्यक्त किया।
कार्यक्रम के अंत में सभी अतिथियों, वक्ताओं एवं प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया गया।
प्रेषक
हरीश सुवासिया
सचिव
भारतीय दलित साहित्य अकादमी, जिला शाखा पाली

