“शिक्षित बेटी, सशक्त समाज।
जब बढ़ेगी लाडो, तभी बढ़ेगा राजस्थान।”

प्रस्तावना
लाडो प्रोत्साहन योजना की संशोधित मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) के आधार पर तैयार एक अत्यंत प्रेरणाप्रद, प्रभावी और विस्तृत लेख प्रस्तुत है, जो आमजन और संस्था प्रधानों को जागरूक करने के साथ-साथ इस पुनीत कार्य में भागीदारी के लिए प्रेरित करेगा।

राजस्थान सरकार द्वारा महिला सशक्तिकरण और बालिकाओं के सर्वांगीण विकास के लिए ‘लाडो प्रोत्साहन योजना’ के रूप में एक ऐतिहासिक और क्रांतिकारी कदम उठाया गया है। यह योजना केवल एक वित्तीय सहायता मात्र नहीं है, बल्कि यह हमारी लाडो के जन्म से लेकर उसकी उच्च शिक्षा तक के सपनों को उड़ान देने का एक पुनीत संकल्प है।

हाल ही में प्रारंभिक शिक्षा एवं पंचायतीराज विभाग, राजस्थान (बीकानेर) के आदेश क्रमांक शिविरा-प्रारं/छात्रवृति/3745/लाप्रोयो/2026-27/ द्वारा इस योजना की संशोधित मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) जारी की गई है, जिसके तहत व्यवस्था को और अधिक पारदर्शी, सरल और सुदृढ़ बनाया गया है।

आइए, इस पावन अभियान से जुड़ने और अपनी भूमिका निभाने के लिए इसके हर पहलू को सरल भाषा में समझें।

हमें क्यों जागरूक होना है?
(योजना के मुख्य उद्देश्य)
इस योजना का मुख्य ध्येय समाज की सोच में एक सकारात्मक बदलाव लाना है, जिसके अंतर्गत निम्नलिखित उद्देश्यों को समाहित किया गया है

1 लिंग भेद को मिटाना
बालिकाओं के पालन-पोषण, शिक्षा और स्वास्थ्य में होने वाले भेदभाव को रोकना।

2 स्वास्थ्य में सुधार
संस्थागत प्रसव (अस्पतालों में जन्म) को बढ़ावा देकर मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में कमी लाना।

3 शिक्षा को बढ़ावा
विद्यालयों में बेटियों का शत-प्रतिशत नामांकन सुनिश्चित करना, ड्रॉप-आउट रोकना और बाल विवाह जैसी कुप्रथाओं पर अंकुश लगाना।

योजना का लाभ: सात किश्तों में ₹1,50,000 की सौगात

योजना के अंतर्गत पात्र बालिकाओं को उनके जन्म से लेकर स्नातक स्तर की शिक्षा पूर्ण करने तक, कुल ₹1,50,000 (एक लाख पचास हजार रुपये) की वित्तीय सहायता प्रदान की जाएगी।

इस योजना की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि पूरी राशि सीधे बैंक खाते में डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के माध्यम से पारदर्शी रूप से सात विभिन्न महत्वपूर्ण चरणों (किश्तों) में हस्तांतरित की जाती है, जिसका विवरण निम्नानुसार है

प्रथम किश्त
(₹2,500/-): यह राशि पंजीकृत चिकित्सा संस्थान में बालिका के सुखद जन्म होने पर प्रोत्साहन स्वरूप दी जाती है।

द्वितीय किश्त (₹2,500/-)
बालिका की आयु 9 से 12 माह तक होने पर, उसके सभी आवश्यक स्वास्थ्य टीके पूर्ण होने की स्थिति में यह राशि देय होती है।

तृतीय किश्त
(₹4,000/-): बालिका के शैक्षणिक सफर की शुरुआत के समय, किसी भी राजकीय या मान्यता प्राप्त निजी विद्यालय की कक्षा 1 में प्रवेश लेने पर यह सहायता दी जाती है।

चतुर्थ किश्त
(₹5,000/-): उच्च प्राथमिक स्तर की शिक्षा को बढ़ावा देने के उद्देश्य से, राजकीय या मान्यता प्राप्त निजी विद्यालय की कक्षा 6 में प्रवेश लेने पर यह राशि प्रदान की जाती है।

पंचम किश्त
(₹11,000/-): माध्यमिक स्तर पर बालिकाओं का जुड़ाव बनाए रखने के लिए, राजकीय या मान्यता प्राप्त निजी विद्यालय की कक्षा 10 में प्रवेश पर यह प्रोत्साहन राशि हस्तांतरित की जाती है।

षष्ठम किश्त
(₹25,000/-): उच्च माध्यमिक स्तर की शिक्षा पूरी करने हेतु, राजकीय या मान्यता प्राप्त निजी विद्यालय की कक्षा 12 में प्रवेश लेने पर यह वित्तीय सहायता दी जाती है।

सप्तम किश्त
(₹1,00,000/-): बेटियों के पूर्ण सशक्तिकरण और आत्मनिर्भरता के लिए, किसी भी मान्यता प्राप्त संस्थान से स्नातक (Graduation) परीक्षा सफलतापूर्वक उत्तीर्ण करने तथा 21 वर्ष की आयु पूर्ण करने पर यह अंतिम व सबसे बड़ी एक लाख रुपये की मुश्त राशि दी जाती है।

विशेष नोट व नवीन परिवर्तन
स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा केवल तीसरी से लेकर छठी किश्त
(कक्षा 1 से कक्षा 12 में प्रवेश)
तक के भुगतान की कार्यवाही
‘शाला दर्पण’ पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन निष्पादित की जाएगी।

यह भी विशेष रूप से ध्यान रखने योग्य है कि पूर्व में चल रही ‘मुख्यमंत्री राजश्री योजना’ को अब पूर्ण रूप से इसी ‘लाडो प्रोत्साहन योजना’ में समाहित कर दिया गया है।

किसे मिलेगा लाभ?
(मुख्य पात्रता शर्तें)
प्रसूता (माता) अनिवार्य रूप से राजस्थान की मूल निवासी होनी चाहिए।

बालिका के माता-पिता के पास आधार कार्ड एवं जन-आधार कार्ड होना कानूनी व तकनीकी रूप से अनिवार्य है।

बालिका का जन्म अनिवार्य रूप से किसी राजकीय चिकित्सा संस्थान या जननी सुरक्षा योजना (JSY) के तहत अधिस्वीकृत निजी अस्पताल में हुआ होना चाहिए।

संशोधित नियमों की सबसे उदार व्यवस्था के तहत, योजना की तीसरी और उत्तरवर्ती किश्तों के लिए संतानों की संख्या की सीमा का अब कोई बंधन नहीं रखा गया है।

हमें क्या करना है और कैसे करना है?

(स्टेप-बाय-स्टेप ऑनलाइन प्रक्रिया)

संशोधित नियमों के अनुसार, अब बालिकाओं के माता-पिता को बार-बार दफ्तरों के चक्कर काटने या नया आवेदन करने की कोई आवश्यकता नहीं है।

पूरी प्रक्रिया को पूर्णतः ऑनलाइन, सुगम और बेहद सरल बना दिया गया है

स्टेप 1
(दस्तावेज जमा करना)
माता-पिता अथवा अभिभावक को बालिका के स्कूल (कक्षा 1, 6, 10 या 12) में प्रवेश के समय बालिका की PCTS ID
(यूनिक आईडी), जन-आधार कार्ड और बैंक पासबुक की स्पष्ट छायाप्रति विद्यालय कार्यालय में जमा करानी होगी।

स्टेप 2
(विद्यालय स्तर पर प्रविष्टि व कार्य) संस्था प्रधान द्वारा विद्यालय के किसी एक योग्य शिक्षक या शिक्षिका को इस योजना का विशेष प्रभारी नियुक्त किया जाएगा।

प्राप्त PCTS ID को शाला दर्पण पोर्टल पर ‘प्रपत्र-9’ में दर्ज किया जाएगा, जिससे बालिका का पूर्व का समस्त डेटा सिस्टम द्वारा स्वतः ही ट्रैक कर लिया जाएगा।

स्टेप 3

(सत्यापन और उच्च स्तर पर फॉरवर्डिंग)
स्कूल द्वारा ऑनलाइन प्रविष्टि पूर्ण करने के बाद, आवेदन स्वतः ही PEEO / UCEEO की लॉग-इन आईडी पर प्रेषित हो जाएगा।

वे दस्तावेजों की गहन जांच के उपरांत, माध्यमिक शिक्षा के स्कूलों के आवेदनों को जिला शिक्षा अधिकारी (माध्यमिक) को

और प्रारंभिक शिक्षा (कक्षा 1 से 8) के स्कूलों के आवेदनों को जिला शिक्षा अधिकारी (प्रारंभिक) को सुरक्षित ओटीपी (OTP) के माध्यम से लॉक कर अग्रेषित करेंगे।

स्टेप 4
(पात्रता जांच एवं भुगतान स्वीकृति)
अंतिम चरण में, जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय द्वारा ऑनलाइन ही पात्रता की सूक्ष्म जांच की जाएगी और ऑटो-सिस्टम आधारित भुगतान स्वीकृति (Auto-Approval) जारी की जाएगी।

इसके तुरंत बाद स्वीकृत राशि सीधे बालिका/माता के बैंक खाते में बिना किसी मानवीय हस्तक्षेप के ट्रांसफर हो जाएगी।

कब तक करना है?
(महत्वपूर्ण समयावधि व समयबद्ध कार्य)

01 जुलाई 2026 से नया मॉड्यूल प्रभावी
शासन के निर्देशानुसार संशोधित SOP के तहत शाला दर्पण पोर्टल पर आवश्यक सभी तकनीकी व नीतिगत बदलाव 01 जुलाई 2026 से पूर्ण रूप से प्रभावी व लागू कर दिए जाएंगे।

वर्तमान आवेदनों का निस्तारण (तत्काल प्राथमिकता)
वर्तमान में जिला शिक्षा अधिकारी प्रारंभिक शिक्षा की आईडी पर जितने भी पुराने व नए आवेदन लंबित हैं, उनकी अविलंब भुगतान स्वीकृतियां जारी की जानी हैं।

इन सभी के बिल कोष कार्यालय (Treasury) भिजवाकर 01 जुलाई 2026 से पूर्व डीबीटी (DBT) के माध्यम से भुगतान करवाना सुनिश्चित करना अनिवार्य है।

कमियों व त्रुटियों का त्वरित सुधार
जिन आवेदनों में किसी भी प्रकार की तकनीकी त्रुटि, नाम का बेमेल होना या कोई कमी है, उन्हें भी 01 जुलाई 2026 से पहले हर हाल में सुधार हेतु विद्यालय स्तर पर रिवर्ट (वापस) करवाया जाना आवश्यक है ताकि समय रहते विद्यालय स्तर से उनमें वांछित संशोधन किया जा सके।

प्रेरणा संदेश
आइए, जिम्मेदारी निभाएं
यह योजना केवल एक प्रशासनिक आदेश या सरकारी दस्तावेज़ नहीं है, बल्कि यह हमारी बेटियों के प्रति समाज की सोच बदलने और महिला सशक्तिकरण का एक पावन महायज्ञ है।

क्षेत्र के सभी सम्मानीय संस्था प्रधानों, कर्मठ शिक्षकों और प्रबुद्ध नागरिकों से विनम्र आह्वान है कि वे अपने आस-पास की हर एक पात्र बालिका को समय रहते इस कल्याणकारी योजना से जोड़ें।

कोई भी निर्धन या ग्रामीण परिवेश की बेटी केवल उचित जानकारी के अभाव अथवा तकनीकी अज्ञानता के कारण इस बड़े लाभ से वंचित नहीं रहनी चाहिए।

आइए, हम सब मिलकर हाथ बढ़ाएं और अपनी लाडो के सुरक्षित, समृद्ध और स्वर्णिम भविष्य की मजबूत नींव रखें।

आदेश का आधिकारिक संदर्भ
यह सारगर्भित लेख कार्यालय निदेशक, प्रारम्भिक शिक्षा एवं पंचायतीराज विभाग, राजस्थान, बीकानेर के आधिकारिक आदेश क्रमांक शिविरा-प्रारं/छात्रवृति/3745/लाप्रोयो/2026-27/ (राजकाज संदर्भ संख्या: 22585058) जो कि संयुक्त शासन सचिव प्रारम्भिक शिक्षा (आयोजना) विभाग, जयपुर के पत्रांक दिनांक 19.05.2026 एवं 27.05.2026 के अनुक्रम में जारी हुआ है, पर पूर्णतः आधारित है।

डिस्क्लेमर (Disclaimer)
यह लेख केवल आमजन की जागरूकता, सामान्य मार्गदर्शन और विभागीय अधिकारियों/कर्मचारियों की सुगमता हेतु तैयार किया गया है।

किसी भी प्रकार के विरोधाभास, विधिक पेंच या तकनीकी संशय की स्थिति में शासन द्वारा समय-समय पर जारी मूल संशोधित मानक संचालन प्रक्रिया (SOP), विभागीय गाइडलाइन तथा आधिकारिक शाला दर्पण पोर्टल के निर्देशों को ही अंतिम, सर्वमान्य व प्रामाणिक माना जाए।

लेखक, (संकलन एवं प्रस्तुति)
सोहनलाल सिंगारिया
प्रधानाचार्य एवं पीईईओ
भादसी ब्लॉक बदनोर, ब्यावर-94622-60179

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