डा.अंबेडकर रिमेंबरेस सेलिब्रेशन 2026 राजसमंद 10 मई को “महिला सशक्तिकरण – एक शाम बाबा साहब के नाम” हुआ
राजसमंद। डा.अंबेडकर रिमेंबरेस सेलिब्रेशन 2026 राजसमंद मे दिनांक 10 मई 2026 को शानदार आयोजन हुआ जिसमें विषय “महिला सशक्तिकरण – एक शाम बाबा साहब के नाम” रखा । महिला वक्ता…
“एक संवेदनशील नवयुवती का अपने भविष्य के पति को प्रेम पत्र!”
प्रिय होने वाले जीवनसाथी, जब मैं भविष्य के हमारे जीवन की कल्पना करती हूँ, तो मेरे मन में सबसे पहले एक ऐसे रिश्ते की तस्वीर उभरती है, वैसे मैं भी…
“एक बहुजन वंचित युवती का अपने भविष्य के साथी को पत्र!
प्रिय ,होने वाले जीवनसाथी,मेरे भविष्य के साथी,सादर नमस्कार। आपके मन :स्थिति को मैं अच्छी तरह से समझ कर आपको यह बताना उचित समझती हूं कि बहुजन और वंचित समाज की…
अंबेडकर मेमोरियल वेलफेयर सोसायटी की आवश्यक बैठक आयोजित, सरदारशहर तहसील एवं भानीपुरा तहसील कार्यकारिणी गठन पर बनाई
सरदारशहर। डॉ. अंबेडकर मेमोरियल वेलफेयर सोसायटी तहसील सरदारशहर की आवश्यक बैठक जिला अध्यक्ष श्रवण कुमार चिराणिया की अध्यक्षता में ओमकार गेस्ट हाउस में आयोजित हुई। बैठक में सरदारशहर तहसील अध्यक्ष…
मेरिट का मायाजाल विशेषाधिकार और अवसर का द्वंद
लेखकसोहनलाल सिंगारियासामाजिक-आर्थिक चिन्तक प्रस्तावनावैचारिक दासता से मुक्ति का मार्गकिसी भी समाज को गुलाम बनाए रखने का सबसे सशक्त हथियार ‘शारीरिक बेड़ियाँ’ नहीं, बल्कि ‘मानसिक बेड़ियाँ’ होती हैं। जब शोषक वर्ग…
मेरिट का मायाजाल विशेषाधिकार और अवसर का द्वंद
लेखकसोहनलाल सिंगारियासामाजिक-आर्थिक चिन्तक प्रस्तावनावैचारिक दासता से मुक्ति का मार्गकिसी भी समाज को गुलाम बनाए रखने का सबसे सशक्त हथियार ‘शारीरिक बेड़ियाँ’ नहीं, बल्कि ‘मानसिक बेड़ियाँ’ होती हैं। जब शोषक वर्ग…
कन्यादान के साथ-साथ शिक्षा दान, चूनारामजी बुला इंद्राणा परिवार की ओर से बालोतरा छात्रावास को बिटिया की शादी में 51000 का चेक सप्रेम भेट
बालोतरा। इंद्राणा निवासी चुनारामजी बुला सुपुत्र राणाराम बुला ने अपनी पुत्री सौ.कां.ममता के शादी की सभा मांगलिक कार्यक्रम में मेघवाल शिक्षा एवं विकास संस्थान बालोतरा कार्यकारिणी के अध्यक्ष आसुराम बोखा,…
प्रशासनिक निरंकुशता और शैक्षिक मूल्यों का क्षरणएक गंभीर आत्मचिंतन
संदर्भ: दैनिक भास्कर (ब्यावर-किशनगढ़ संस्करण), दिनांक 07 मई 2026, पृष्ठ संख्या 03 शिक्षा का आंगन वह पावन स्थल है जहाँ राष्ट्र के भविष्य का निर्माण होता है। किंतु जब इस…
“संविधान पंथनिरपेक्ष लेकिन समाज सांप्रदायिक, आखिर बुद्धिजीवी सच बोलने से डरते क्यों हैं?”
भूमिकाभारतीय लोकतंत्र केवल चुनावों की प्रक्रिया नहीं बल्कि विविधताओं के सम्मान की एक ऐतिहासिक व्यवस्था है। संविधान निर्माताओं ने भारत को पंथनिरपेक्ष राष्ट्र घोषित करते समय यह कल्पना की थी…
“बहुजन,वंचित समाज की नई ताकत, तर्क, प्रमाण, शिक्षा, जागरूकता, वैज्ञानिक सोच से बदलो भाग्य, बनाओ सशक्त भविष्य!”
भूमिकाभारत जैसा विशाल और विविध समाज केवल परंपराओं के सहारे आगे नहीं बढ़ सकता, उसे तर्क, समझ और प्रमाण की रोशनी की भी उतनी ही आवश्यकता है। वैज्ञानिक सोच केवल…
