अंधविश्वास की बलिवेदी पर दम तोड़ती सांसें: आस्था या आत्मघाती अज्ञान? — बहुजन समाज के लिए एक गंभीर आत्ममंथन और वैज्ञानिक चेतना का आह्वान
लेखक (संकलन एवं प्रस्तुति) सोहनलाल सिंगारिया आमुख: संवेदना और विवेक की कसौटी पर हमारा समाजइक्कीसवीं सदी के वैज्ञानिक युग में जब दुनिया आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, अंतरिक्ष विज्ञान और चिकित्सा के चमत्कारों…
शराब की लत से टूटती जिंदगी को सहानुभूति, उपचार और आत्मविश्वास से नई दिशा देने का सामाजिक संकल्प।
एक शराबी की आत्मकथा :मेरी महफिल में दुनिया थी, मगर मेरे दर्द में कोई नहीं !मैं एक शराबी हूँ। यह मेरी पहचान बन गई है, लेकिन कोई यह नहीं पूछता…
जसमल ओड़न
साहित्यिक संदर्भ:मूल पुस्तक मांझल रातराजस्थानी लोक-कथावां रो प्रसिद्ध संग्रह मूल लेखिका:पद्मश्री रानी लक्ष्मी कुमारी चूंडावत लेखक (संकलन एवं प्रस्तुति) सोहन लाल सिंगारियाप्राचार्य (RES) ब्यावर मंगलाचरण एवं भूमिका मरुधरा री आ…
महफिल के छलकते जाम और झूठे वादों के बीच अंततः इंसान खुद को अकेले ही पाता है
जाम, झूठ और जीवन: एक शराबी की डायरी से शाम ढलती है, तो शहर की रौशनी के साथ मेरे भीतर का अँधेरा भी जगने लगता है। महफिल सजती है, जाम…
मैनेजमेंट और प्रोफेशनल लाइफ में बहुजन, वंचित युवाओं के लिए जवाबदेही, आत्मसम्मान, समान अवसर और नेतृत्व की महत्ता समझें।
भूमिका :विरासत में अभाव, फिर भी योग्यता सिद्ध करने की चुनौती!बहुजन और वंचित समाज के व्यक्ति की व्यावसायिक यात्रा अक्सर उन परिस्थितियों से शुरू होती है, जहाँ उसे विरासत में…
सबके अपने युद्ध, अपनी परिस्थितियाँ और अपनी मंजिलें हैं, इसलिए तुलना छोड़कर आत्मविकास की राह चुनिए
भूमिकाजीवन बाहर से जितना सरल दिखाई देता है, भीतर से उतना ही संघर्षपूर्ण हो सकता है। कोई आर्थिक परेशानियों से जूझ रहा है, कोई रिश्तों में उलझा है, कोई अपनी…
बहुजन और वंचित समाज : अंधविश्वास की बेड़ियाँ तोड़कर शिक्षा, विवेक और आत्मसम्मान का मार्ग अपनाइए
भूमिका ज़िंदगी में कभी-कभी उल्टा चलना भी ज़रूरी है। बिल्ली रास्ता काट जाए, तो वहीं से जाइए। चप्पलें उल्टी पड़ी हों, तो उन्हें सीधा कर दीजिए और मंगलवार को बाल…
समानता की आड़ में कानूनी कत्ल: झूठे मुकदमों के चक्रव्यूह में घुटती बेकसूर मर्दों की जिंदगी
भूमिकारिश्तों की पवित्रता और समाज के ताने-बाने में आज एक ऐसा सन्नाटा पसर गया है, जिसकी चीखें तो बहुत बुलंद हैं, मगर उन्हें सुनने वाला कोई नहीं है। एक दौर…
सफल बहुजन और वंचित समाज के प्रबुद्ध लोगों को सोशल मीडिया पर गरिमा बनाए रखना चाहिए।
भूमिका भारत का बहुजन और वंचित समाज स्वभाव से बहुत सीधा, सच्चा और सब पर तुरंत भरोसा करने वाला होता है। इस समाज के लोगों को विरासत में कोई झूठा…
ऐतिहासिक प्रताड़ना से वैचारिक स्वतंत्रता तक: वंचित समाज के पुरुषों का नया आत्मविश्वास और उदय
प्रस्तावना: इतिहास का बोझ और वर्तमान की हकीकत यह एक कड़वी हकीकत है कि बहुजन और वंचित समाज में जन्म लेने वाले पुरुष को विरासत में वे सुख-सुविधाएं या आर्थिक…
