Month: October 2026

संवैधानिक संस्थाओं की स्वतंत्रता पर सवाल: चुनावों की पवित्रता से समझौता लोकतंत्र के लिए खतरे की घंटी

भूमिकालोकतंत्र केवल चुनाव नहीं, नागरिक अधिकारों की गारंटी भी है,भारत का संविधान प्रत्येक नागरिक को न्याय, स्वतंत्रता, समानता और गरिमा का अधिकार देता है। लोकतंत्र की वास्तविक शक्ति केवल प्रधानमंत्री,…

रूढ़ियों के अंधकार पर चेतना का प्रहार, इस्मत चुगताई का जीवन-संघर्ष, अनछुए तथ्य और प्रगतिशील बहुजन दृष्टि

लेखक (संकलन एवं प्रस्तुति)सोहनलाल सिंगारिया “हमारे ज़्यादातर पुराने रिवाज आदर पर नहीं, बल्कि डर पर टिके हैं— खुदा का डर, समाज का डर, बदनामी का डर। जो रिवाज आज़ाद दिमाग…

भारतीय अर्थव्यवस्था संकट में?: क्या भारत की मुद्रा, बाजार और नीतिगत प्रबंधन से उठ रहा है वैश्विक भरोसा?

भारतीय अर्थव्यवस्था इन दिनों एक बेहद नाजुक और चुनौतीपूर्ण दौर से गुजर रही है। देश के पूर्व वित्त सचिव सुभाष चंद्र गर्ग ने हाल ही में द वायर (The Wire)…

वंचित समाज की घुटन और अधूरी उम्मीद: जब शराब की महफिल में जाति की दीवारें गिर सकती हैं, तो पूरे समाज में ऊँच-नीच क्यों नहीं मिट सकती?

एक बहुजन शराबी की आत्मकथा दिन में जाति छोटी, शाम को प्याला बराबर!मैं एक बहुजन परिवार में पैदा हुआ। जब से होश सँभाला, तब से दुनिया को अपने और पराए,…

अंधविश्वास की बलिवेदी पर दम तोड़ती सांसें: आस्था या आत्मघाती अज्ञान? — बहुजन समाज के लिए एक गंभीर आत्ममंथन और वैज्ञानिक चेतना का आह्वान

लेखक (संकलन एवं प्रस्तुति) सोहनलाल सिंगारिया आमुख: संवेदना और विवेक की कसौटी पर हमारा समाजइक्कीसवीं सदी के वैज्ञानिक युग में जब दुनिया आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, अंतरिक्ष विज्ञान और चिकित्सा के चमत्कारों…

शराब की लत से टूटती जिंदगी को सहानुभूति, उपचार और आत्मविश्वास से नई दिशा देने का सामाजिक संकल्प।

एक शराबी की आत्मकथा :मेरी महफिल में दुनिया थी, मगर मेरे दर्द में कोई नहीं !मैं एक शराबी हूँ। यह मेरी पहचान बन गई है, लेकिन कोई यह नहीं पूछता…

जसमल ओड़न

साहित्यिक संदर्भ:मूल पुस्तक मांझल रातराजस्थानी लोक-कथावां रो प्रसिद्ध संग्रह मूल लेखिका:पद्मश्री रानी लक्ष्मी कुमारी चूंडावत लेखक (संकलन एवं प्रस्तुति) सोहन लाल सिंगारियाप्राचार्य (RES) ब्यावर मंगलाचरण एवं भूमिका मरुधरा री आ…

महफिल के छलकते जाम और झूठे वादों के बीच अंततः इंसान खुद को अकेले ही पाता है

जाम, झूठ और जीवन: एक शराबी की डायरी से शाम ढलती है, तो शहर की रौशनी के साथ मेरे भीतर का अँधेरा भी जगने लगता है। महफिल सजती है, जाम…

मैनेजमेंट और प्रोफेशनल लाइफ में बहुजन, वंचित युवाओं के लिए जवाबदेही, आत्मसम्मान, समान अवसर और नेतृत्व की महत्ता समझें।

भूमिका :विरासत में अभाव, फिर भी योग्यता सिद्ध करने की चुनौती!बहुजन और वंचित समाज के व्यक्ति की व्यावसायिक यात्रा अक्सर उन परिस्थितियों से शुरू होती है, जहाँ उसे विरासत में…

सबके अपने युद्ध, अपनी परिस्थितियाँ और अपनी मंजिलें हैं, इसलिए तुलना छोड़कर आत्मविकास की राह चुनिए

भूमिकाजीवन बाहर से जितना सरल दिखाई देता है, भीतर से उतना ही संघर्षपूर्ण हो सकता है। कोई आर्थिक परेशानियों से जूझ रहा है, कोई रिश्तों में उलझा है, कोई अपनी…