सम्पादकीय बारह वर्षों में बदली इंसानियत: लोकतंत्र, तर्क और भाईचारे के क्षरण की भारतीय कथा आज!
बीते बारह वर्षों में देश के सार्वजनिक जीवन में जो सबसे बड़ा बदलाव दिखता है, वह हमारी इंसानियत (मनुष्यता) का क्षरण है। लोकतांत्रिक परंपराओं से उपजा संवाद और सह-अस्तित्व कमजोर…
