Author: wp_client

राष्ट्रवाद का निर्यात और रिश्तों का दिवालियापन: दुनिया भारतीयों से दूर क्यों हो रही है?

भूमिकापिछले कुछ वर्षों में भारत की विदेशों में बनती इमेज (छवि) तेजी से बदली है। कभी मेहनत और योग्यता से पहचाने जाने वाले प्रवासी भारतीय अब कई जगह राजनीतिक बहस…

“हालात नहीं, हौंसले तय करेंगे मंज़िल: बोर्ड और CUET जीतने की प्रेरक कहानी हर SC.ST विद्यार्थी के लिए”

भूमिकाभारत के अनुसूचित जाति और जनजाति के बच्चों के लिए शिक्षा केवल डिग्री पाने का साधन नहीं, बल्कि इज़्ज़त (सम्मान), आत्मनिर्भरता और सामाजिक बदलाव की रोशनी है। आज का विद्यार्थी…

अंधविश्वास का धंधा और एससी–एसटी समाज की लूटी हुई चेतना

भूमिका : सदियों से दबाए गए दिमाग़ और आज का सबसे बड़ा धोखाअनुसूचित जाति और जनजाति समाज सदियों से ज़िल्लत (अपमान), जलालत (बेइज्जती) और जहालत (अज्ञान) की मार झेलता आया…

ग्रामीण युवाओं के लिए शिक्षा का नया द्वार: CUET बना देश की टॉप यूनिवर्सिटीज़ तक पहुंचने का सबसे सशक्त माध्यम

ग्रामीण युवाओं के लिए शिक्षा का नया द्वार: CUET बना देश की टॉप यूनिवर्सिटीज़ तक पहुंचने का सबसे सशक्त माध्यम ऑनलाइन आवेदन शुरू, अंतिम तिथि 30 जनवरी 2026 भोपालगढ़ ।…

“अंबेडकरवादी पीठ का समापन : यह प्रशासनिक फ़ैसला नहीं, मनुवादी सत्ता की वैचारिक हिंसा है?

यह साफ़–साफ़ समझ लेना चाहिए कि राजस्थान की दक्षिणपंथी सरकार द्वारा अंबेडकरवादी पीठ को समाप्त करना कोई सामान्य शैक्षणिक पुनर्गठन नहीं है, बल्कि यह एक आइडियोलॉजिकल (विचारधारात्मक) हमला है। यह…

“अंबेडकरवादी पीठ का समापन : यह प्रशासनिक फ़ैसला नहीं, मनुवादी सत्ता की वैचारिक हिंसा है?

यह साफ़–साफ़ समझ लेना चाहिए कि राजस्थान की दक्षिणपंथी सरकार द्वारा अंबेडकरवादी पीठ को समाप्त करना कोई सामान्य शैक्षणिक पुनर्गठन नहीं है, बल्कि यह एक आइडियोलॉजिकल (विचारधारात्मक) हमला है। यह…

“अंबेडकरवादी दृष्टि से बहुजन संत परंपरा का पुनरुत्थान : समय की मांग और सामाजिक आवश्यकता” (एक विश्लेषण)

विनम्र निवेदन 🙏🏻- अपने समाज के साधु-संतों, बापजी, पीरजी, पीठाधीश, बाबाजी, महंत, प्रगतिशील विचारधारा के समाज बंधुओं और डॉ आंबेडकर विचारधारा से अभिप्रेरित युवाओं को सामाजिक चिंतक लेखक प्रशासक, पाखंड…

डॉ. गुलाबचंद जिंदल का निम्नलिखित आलेख पढा,इस लेख से प्रेरणा लेते हुए बहुजन संतो पर निम्नलिखित लेख लिखने का प्रयास किया है- मेघवंशी

मेरा कुछ वर्षों पूर्व लिखा आलेख पुनः अवलोकनार्थ 👇🏻🙏🏻 साधु-सन्तों, बाबाओं के लिए ओरियनटेशन प्रोग्राम आयोजित हो अपने समाज के सभी पंथों के साधु-सन्त, महंत,बावजी, बापजी, बाबा, पीठाधीश,पीठाधीश्वरों के लिए…

“आरक्षण पर भ्रम फैलाने वालों से एक सीधा सवाल: कभी हमारा जीवन जीकर देखा है?”

भारत में आज प्रतियोगी परीक्षाओं से लेकर संसद तक एक अजीब-सी बहस छिड़ी है—ज्यादा नंबर वाले रह जाते हैं, कम नंबर वाले निकल जाते हैं। यही आधा-अधूरा सच दिखाकर कुछ…

“पूर्वाग्रह का ज़हर: रिश्तों की रूह तक घुसा सामाजिक अंध- पक्षपात “

भारतीय समाज में मनुष्य की पहचान कई स्तरों पर बनती है, लेकिन सबसे दुखद यह है कि इन स्तरों में काबिलियत से पहले जाति को जगह दी जाती है। जब…