13अगस्त 2022 का दिन शायद याद होगा आप सभी को ,अनुसूचित जाति के सदस्यों के लिए ही नहीं इस पूरे समाज के लिए दर्दनाक और शर्मनाक घटना थी जब जालौर के एक स्कूल के बच्चे इंद्र मेघवाल को सिर्फ इसलिए जान गंवानी पड़ी क्योंकि उसने उस मटके से पानी पीने का गुनाह किया था जो अनुसूचित जाति के बच्चे के छूने से पीने लायक नहीं रहा था …..
और पानी पीने की ये कोशिश उस बच्चे के लिए जानलेवा साबित हुई थी .. उस बच्चे के साथ जो मारपीट हुई वो उसकी मौत का कारण बनी …ये किसी प्रेमचंद के उपन्यास का हिस्सा लगता होगा लोगो को मगर ये हक़ीक़त है हमारे समाज के प्रति सोच की ।
हमारे तमाम संगठनों ने सायला ,जालौर में लगातार प्रदर्शन किये , लाठियां भी खाई मगर फिर भी हटे नहीं ।
क्योंकि बिना शोर के हमारे पीड़ितों की आवाज सुनाई देती ही नहीं है प्रशासन को।
विडंबना ये है कि आज भी हमारे समाज के लोगों के हालात जातिगत भेदभाव की पराकाष्ठा सहन कर रहे हैं , उनके साथ हुए अन्याय के लिए जब तक हमारे लोग शोर नहीं मचाते प्रदर्शन नहीं करते FIR तक दर्ज नहीं होती और फिर इस दवाब में रिपोर्ट तो दर्ज हो जाती हैं मगर अनुसन्धान के समय पीड़ित का परिवार अकेला पड़ जाता है , कानूनी तकनीकियों को समझना मुश्किल होता है इसलिए कही महसूस ही नहीं कर पाता कि कुछ गलत अब भी हो रहा है , बस इसी बात का लाभ उठाते हुए अक्सर चार्ज शीट तो कोर्ट में फाइल होती है मुलजिम के खिलाफ मगर इतनी खामियों के साथ की उसी समय ये सुनिश्चित हो जाता है कि इन कमियों का लाभ येन केन प्रकरण मुलजिम को प्राप्त होगा और वो बरी हो जाएगा । यही डांगावास के प्रकरण में हुआ यही , इंद्र कुमार के प्रकरण में हुआ है जबकि इंद्र कुमार के प्रकरण में चार्ज शीट की खामियों को मैने स्वयं ने सबके समक्ष उठा दिया था ।क्या डांगावास के प्रकरण के बाद ये विषय हमारे बुद्धिजीवियों के लिए विचार का बिंदु नहीं होना चाहिए कि आखिर कहाँ कमी रह गई है और उस कमी से होने वाले नुकसान की भरपाई करने का सर्वोत्तम उपाय क्या है ..?
अभी तक लोगों के विचार सुने , पढ़े आक्रोश को महसूस किया मगर सिर्फ आक्रोश से स्थायी समाधान नहीं निकल सकता ये सभी जानते हैं । वंचित और शोषित समुदाय के लोगों के साथ हुए हर अन्याय का सामना करने के लिए , न्याय की लड़ाई लड़ने के लिए विधिक रूप से संगठित ,समर्पित ,सशक्त टीम का गठन जरूरी है हर स्तर पर जिससे विधिक रूप से लड़ी जाने वाली हर लड़ाई की नींव मजबूत हो और सतर्क टीम सिर्फ FIR दर्ज करवाने तक नहीं पूरे प्रकरण में अपना दखल रखे ,जब जहां जो जरूरी हो कदम उठाए जिससे कि अनुसन्धान अधिकारी एवं लोक अभियोजक भी अपना कार्य पूर्ण सतर्कता से करें। सही समय पर समस्या पता चले और उचित समय में उसका समाधान हो पाए । मगर हमारी विडंबना ये हैं कि हमारे पास आज तक ये टीम तो दूर ये सोच तक नहीं हैं अगर हमारे लोगों के साथ हुए अन्याय के लिए सामाजिक रूप से संवेदना है तो सामाजिक रूप से ये प्रयास प्राथमिकता से करना चाहिए मगर ये विचार विमर्श ही कही नजर नहीं आ रहा । बहुत लोग अपने अपने स्तर पर इन कानूनी लड़ाइयों के लिए अपना फर्ज निःशुल्क पैरवी कोर्ट में करके या करवाकर निभा रहे हैं मगर फिर भी आज की सबसे बड़ी जरूरत है विधिक रूप से सशक्त, सक्षम , समर्पित ,संगठित टीम की और उसमें जो शामिल हो सामाजिक न्याय की इस लड़ाई में वो स्वयं स्वेच्छा से इसका हिस्सा बने किसी प्रभाव या मजबूरी में नहीं । बाबा साहेब ने हाथों में कलम दी है और उनके दिए अधिकारों ने शिक्षा इसलिए आज सही समझने के साथ सही कह देने का हौंसला भी है । क्योंकि फिर डांगावास के दर्दनाक प्रकरण की तरह वही इतिहास दोहराया जाएगा एक बार नहीं बार बार … फिर किसी प्रकरण में अपराधी हमारे तमाम विरोध प्रदर्शन के बाद भी उन गलियों से बरी होंगे जो हमारी कानूनी अक्षमता ,और जागरूकता के अभाव का परिणाम होगी । हमारी तमाम सामाजिक संस्थाओं के लिए सही वक्त है सोचने का ,समझने का ,सही निर्णय लेकर समस्या का स्थाई समाधान निकालने का पृथक् पृथक नहीं संगठित होकर जिससे हमारे समाज के पीड़ित फिर कही ये सोच कर असमंजस में पड़ते रहें कि किस संस्था के पास जाऊं। हमारे पास हमारे अधिवक्ताओं की कमी नहीं है , समर्पित अधिवक्ता आज भी अपने स्तर पर कार्य कर ही रहे हैं मगर इस मुद्दे पर संगठित नहीं किया गया है उनको अभी तक जो जरूरी है
जब बात समाज के हित की हो तो सभी संस्था और सभी लोगों को एक साथ होना सबसे ज्यादा जरूरी हो जाता हैं । उम्मीद है एक बार इस मुद्दे पर संजीदगी से विचार किया जाकर कोई समाधान निकालने की दिशा में कोई कदम उठाया जाएगा । और अगर इस संदर्भ में कोई विचार हो तो उसे साझा करे ।
हमारी छोटी छोटी कमियां बहुत बड़ा प्रभाव डाल देती हैं मुकदमों पर , फिर सिर्फ अफसोस रह जाता है कि काश ये कर देते उस वक़्त तो कुछ और हो सकता था …
ऐसा न सोचना पड़े उसके लिए जरूरी है कि जिस लम्हे कुछ खामी नजर आए अपने ही किरदार में उसे उसी वक्त सुधार लिया जाए ।क्योंकि जो हो रहा है उसमें हम सब जिम्मेदार हैं ।
रजनी ब्रिजेश✍️
पूर्व न्यायिक मजिस्ट्रेट
9414430656
