लेखक (संकलन एवं प्रस्तुति)
सोहन लाल सिंगारिया

प्रस्तावना
आज का युग सूचना क्रांति का युग है, जहाँ ज्ञान का प्रचार-प्रसार पलक झपकते ही पूरी दुनिया में हो जाता है।

लेकिन इसी डिजिटल क्रांति का एक स्याह पहलू यह भी है कि सोशल मीडिया पर ‘अधकचरा ज्ञान’ और ‘काल्पनिक इतिहास’ भी उतनी ही तेजी से परोसा जा रहा है।

हाल ही में व्हाट्सएप और अन्य सोशल मीडिया मंचों पर एक भ्रामक पोस्ट तेजी से प्रसारित हो रही है, जिसमें यह दावा किया जा रहा है कि आज का ‘मेहतर’ शब्द दरअसल प्राचीन बौद्ध परंपरा के ‘महाथेरा शब्द का अपभ्रंश है, और करीब 1000 साल पहले इस समुदाय के लोग बौद्ध भिक्षु या महाविद्वान थे।

एक सामाजिक-आर्थिक चिंतक और बहुजन समाज के सजग नागरिक होने के नाते, हमारा यह नैतिक दायित्व बनता है कि हम ऐसी लोक-कथाओं या भावुक दावों का गहराई से विश्लेषण करें।

क्या ऐसी जानकारियां हमारे समाज को सच में जागरूक कर रही हैं, या फिर हमें एक काल्पनिक अतीत के झूठे दिलासे में रखकर वर्तमान के संघर्षों से भटका रही हैं?

आइए, ऐतिहासिक, भाषाई और अकादमिक साक्ष्यों की रोशनी में इसका निष्पक्ष विश्लेषण करते हैं।

तथ्य बनाम कल्पना,शब्दों का वैज्ञानिक एवं भाषाई विश्लेषण

किसी भी समाज का वास्तविक सशक्तिकरण वैज्ञानिक चेतना और अकादमिक प्रामाणिकता से होता है, न कि केवल ध्वन्यात्मक समानता (समान आवाज वाले शब्दों) के आधार पर इतिहास गढ़ने से।

‘महाथेरा’ और ‘मेहतर’ दोनों अलग-अलग कालखंडों, संस्कृतियों और बिल्कुल भिन्न भाषाओं के शब्द हैं

‘महाथेरा
(पालि भाषा का गौरव)
यह मूल रूप से पालि भाषा का शब्द है, जो बौद्ध धर्म की ‘थेरवाद’ परंपरा से आता है।

बौद्ध ग्रंथ ‘विनयपिटक’ और ‘महावंश’ के अनुसार, जब कोई बौद्ध भिक्षु अपनी दीक्षा (उपसंपदा) के 20 वर्ष सफलतापूर्वक पूरे कर लेता है और धम्म व दर्शन का प्रकांड विद्वान बन जाता है, तो उसे आदरपूर्वक ‘महाथेर’ या ‘महाथेरा’ कहा जाता है।

इसका अर्थ होता है,महान बुजुर्ग भिक्षु ।

‘मेहतर
(फारसी भाषा का प्रशासनिक शब्द)
यह शब्द पालि या संस्कृत मूल का है ही नहीं, यह फारसी
(Persian) भाषा का शब्द है।

प्रख्यात भाषाविद् और वैयाकरणों के अनुसार, फारसी में ‘मह’ का अर्थ होता है बड़ा या महान, और ‘तर’ एक तुलनात्मक प्रत्यय है
(जैसे अंग्रेजी में Great के आगे -er लगाकर Greater बनता है)।

इस प्रकार फारसी में ‘मेहतर’ का मूल अर्थ “अति श्रेष्ठ”, “बड़ा”, “प्रधान” या “राजकुमार” होता था

ऐतिहासिक संदर्भ
इतिहासकार जॉन बिडुलफ़ की पुस्तक, ट्राइब्स ऑफ द हिन्दू कुश में ज़िक्र है कि मध्यकाल में चित्तराल (वर्तमान पाकिस्तान/अफगानिस्तान सीमा) के शासकों को ‘मेहतर’ कहा जाता था।

मुगल काल में, जैसा कि अबुल फजल कृत ‘आईन-ए-अकबरी’ में संदर्भ मिलता है, शाही महलों के विभिन्न विभागों के मुखिया या प्रधान सेवकों को सम्मान के तौर पर ‘मेहतर’ (जैसे सफ़ाई, अस्तबल या गृह-प्रबंधन के प्रधान) की उपाधि दी जाती थी।

कालान्तर में, सामंती व्यवस्था के कुप्रभाव और भाषाई संकुचन के कारण यह आदर सूचक उपाधि एक विशिष्ट कार्य से जुड़े समुदाय का जातिवाचक नाम बन गई।

अतः, केवल ‘म’ और ‘थ’ की ध्वनि मिल जाने से ‘महाथेरा’ को ‘मेहतर’ का पूर्वज मान लेना भाषाई और ऐतिहासिक दृष्टि से पूरी तरह त्रुटिपूर्ण, अतार्किक और निराधार है।

डॉ. आंबेडकर का वास्तविक विज़न और अकादमिक संदर्भ

युगपुरुष डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर ने समाज को तार्किक, वैज्ञानिक और अकादमिक रूप से मजबूत होने की शिक्षा दी थी।

उन्होंने कहीं भी इस प्रकार की काल्पनिक शब्दावली का सहारा लेकर इतिहास सिद्ध करने की वकालत नहीं की।

यदि हम उनके साहित्य का गहराई से अध्ययन करें, तो स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो जाती है

प्राचीन भारत में क्रांति और प्रतिक्रांति
भारत सरकार द्वारा प्रकाशित डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर: राइटिंग्स एंड स्पीचेस”(BAWS) के खंड 3 (Volume 3) में संकलित इस ग्रंथ में बाबासाहेब ने बहुत स्पष्ट किया है कि भारत का इतिहास बौद्ध धर्म
(जो समता की ‘क्रांति’ था) और ब्राह्मणवाद (जो बौद्ध धर्म के प्रभाव को कुचलने के लिए ‘प्रतिक्रांति’ था) के बीच का वैचारिक संघर्ष है।

उन्होंने मौर्य साम्राज्य के पतन और पुष्यमित्र शुंग के उभार को इसी प्रतिक्रांति का हिस्सा माना है।

द अनटचेबल्स, हू वर दे एंड व्हाई दे बिगेम अनटचेबल्स? (1948): इस ऐतिहासिक पुस्तक के अध्याय 4 से 6 में बाबासाहेब ने अछूत प्रथा की उत्पत्ति का गहरा सामाजिक और ऐतिहासिक विश्लेषण किया है।

उनका स्पष्ट सिद्धांत था कि जो लोग प्राचीन काल में ‘बिखरे हुए लोग थे, वे बौद्ध धर्म के कट्टर अनुयायी थे।

जब गुप्त काल और उसके बाद ब्राह्मणवाद का पुनरुत्थान हुआ, तो जिन बौद्धों ने अपनी वैचारिक चेतना और खान-पान की स्वतंत्रता को नहीं छोड़ा, उन्हें सामाजिक मुख्यधारा से बाहर कर दिया गया और उन पर अमानवीय नागरिक अक्षमताएं थोप दी गईं।

बाबासाहेब ने अछूतपन की उत्पत्ति के पीछे वैचारिक, धार्मिक और सामाजिक संघर्षों को कारण माना है, न कि किसी शब्द के बिगड़ने की प्रक्रिया को।

व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी के भ्रम से सावधान

बहुजन समाज के लिए संदेश

सोशल मीडिया पर फैलाई जाने वाली ऐसी अप्रमाणिक पोस्टें अनजाने में समाज का भारी बौद्धिक नुकसान करती हैं।

इनके दुष्परिणामों को समझना बेहद जरूरी है

सत्य और विज्ञान से भटकाव

जब हम किसी झूठी कहानी को सच मानकर आत्ममुग्ध हो जाते हैं, तो हम उन वास्तविक सामाजिक, राजनीतिक और आर्थिक कारणों का अध्ययन करना बंद कर देते हैं जिन्होंने हमारे समाज को पीछे धकेला।

बौद्धिक साख को नुकसान
जब बहुजन समाज का कोई युवा किसी अकादमिक, प्रशासनिक या अदालती मंच पर इस तरह के अप्रमाणिक तर्क रखता है, तो विरोधी विचारधारा के लोग पूरे बहुजन आंदोलन की बौद्धिक क्षमता और तार्किकता पर सवाल उठाने लगते हैं।

अतीत की बैसाखी बनाम वर्तमान का संघर्ष

हमें अतीत के काल्पनिक गौरव की बैसाखियों की जरूरत नहीं है।

हमारा वर्तमान संघर्ष शिक्षा, आर्थिक समृद्धि, संवैधानिक अधिकारों की रक्षा और आधुनिक विज्ञान के प्रसार पर टिका होना चाहिए।

आह्वान,प्रेरणा और सच्ची चेतना का मार्ग

शिक्षित बनो, संगठित रहो और संघर्ष करो

बाबासाहेब के इस अमर संदेश में ‘शिक्षित बनो’ का पहला अर्थ ही विवेकशील, तार्किक और तर्कसंगत बनना है।

बहुजन समाज के बुद्धिजीवियों, युवाओं और सोशल मीडिया यूजर्स से मेरा विनम्र आह्वान है कि व्हाट्सएप पर आने वाली किसी भी ऐसी आकर्षक या भावुक पोस्ट को आगे (Forward) बढ़ाने से पहले उसकी ऐतिहासिक प्रामाणिकता की जांच अवश्य करें।

जब तक किसी तथ्य के पीछे ठोस पुरातात्विक, भाषाई या अकादमिक साक्ष्य न हों, तब तक उसे स्वीकार न करें।

आइए, हम अंधविश्वास और भाषाई भ्रम के जालों को तोड़कर बाबासाहेब के ‘प्रबुद्ध भारत’ के सपने को साकार करें।

अपनी ऊर्जा को झूठे इतिहास की खोज में व्यर्थ करने के बजाय, अपने बच्चों को उच्च शिक्षित बनाने,

देश की अर्थव्यवस्था व शासन-प्रशासन में अपनी हिस्सेदारी तय करने

और संवैधानिक मूल्यों को बचाने में लगाएं।

हमारी वास्तविक प्रेरणा हमारे महापुरुषों के वास्तविक संघर्ष और हमारे तार्किक विचार हैं, न कि सोशल मीडिया के भ्रामक संदेश।

चेतना ही जागृति है, और विवेक ही हमारा कवच है!

लेखक (संकलन एवं प्रस्तुति)
सोहन लाल सिंगारिया सामाजिक-आर्थिक चिन्तक
एवं विचारक ब्यावर राजस्थान 94622-60179)

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *