लेखक
सोहनलाल सिंगारिया

प्रस्तावना
“राजनीतिक शक्ति की कुंजी से ही समाज की प्रगति के बंद दरवाजे खुलते हैं, और जब सामाजिक चेतना जागृत होती है, तो नीतियां केवल कागजों पर नहीं, बल्कि अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति के जीवन में बदलाव बनकर उतरती हैं।

बाबासाहेब डॉ. बी.आर. अम्बेडकर
सदियों के सामाजिक अलगाव, आर्थिक वंचना और संसाधनों पर असमान अधिकार के कारण हमारे बहुजन समाज (अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग और अल्पसंख्यक वर्ग) की कई पीढ़ियां केवल जीवन के संघर्षों में ही खप गईं।

हमारे बुजुर्गों ने अपना पूरा जीवन पसीना बहाने, समाज की रीढ़ बनकर उत्पादन और निर्माण कार्यों में लगाने के बावजूद, कभी अपने लिए दो पल सुकून के नहीं चुरा पाए।

एक आम गरीब बहुजन परिवार का बुजुर्ग अपनी पूरी उम्र बच्चों की परवरिश, कर्ज चुकाने और दो वक्त की रोटी का प्रबंध करने में बिता देता है। उसकी आंखों में देश के सुप्रसिद्ध सांस्कृतिक और धार्मिक स्थलों को देखने की, एक बार जीवन में तीर्थाटन करने की इच्छा तो होती है, लेकिन जेब की कंगाली और आर्थिक तंगहाली उन सपनों पर हमेशा के लिए बेड़ियां लगा देती है।

इसी आर्थिक असमानता और सामाजिक दूरी को पाटने के लिए, राज्य के लोक-कल्याणकारी स्वरूप को साकार करते हुए राजस्थान सरकार के देवस्थान विभाग द्वारा “वरिष्ठ नागरिक तीर्थ यात्रा योजना 2026” का संचालन किया जा रहा है।

एक सामाजिक-आर्थिक चिन्तक के रूप में, मैं इस योजना को केवल एक धार्मिक या आध्यात्मिक यात्रा के रूप में नहीं देखता, बल्कि यह बहुजन समाज के उस गरीब, वंचित और शोषित वर्ग के लिए ‘सामाजिक न्याय’ और ‘संवैधानिक गरिमा’ का एक जीता-जागता दस्तावेज है, जिसके तहत सरकार खुद आगे बढ़कर हमारे बुजुर्गों को देश-विदेश की यात्राएं ससम्मान करा रही है।

इस विस्तृत लेख के माध्यम से मेरा उद्देश्य बहुजन समाज के प्रत्येक सजग नागरिक, युवा और जागरूक जनमानस तक इस योजना की बारीक से बारीक जानकारी पहुंचाना है, ताकि गांव-ढाणी और झोपड़ियों में रहने वाला हमारा स्वाभिमानी और मेहनतकश आम आदमी इस योजना से प्रेरित हो सके, जागरूक हो सके और बिना किसी संकोच के इस सरकारी अधिकार का लाभ उठा सके।

  1. सामाजिक और आर्थिक दृष्टिकोण से इस योजना का महत्व
    बहुजन समाज के संदर्भ में जब हम आर्थिक और सामाजिक संरचना का विश्लेषण करते हैं, तो दो मुख्य बातें उभरकर सामने आती हैं

(क) आर्थिक बाधाओं से मुक्ति
एक गरीब मजदूर, किसान या छोटे शिल्पी के लिए अयोध्या, काशी, जगन्नाथ पुरी या नेपाल के पशुपतिनाथ मंदिर की यात्रा का खर्च उठाना एक वित्तीय बोझ की तरह होता है।

आने-जाने का टिकट, ठहरने की व्यवस्था, भोजन और चिकित्सा का खर्च मिलाकर हजारों रुपये का व्यय होता है।

राजस्थान सरकार ने इस वर्ष 150 करोड़ रुपये का भारी-भरकम बजट आवंटित करके इस आर्थिक बाधा को जड़ से समाप्त कर दिया है।

अब हमारे बुजुर्गों को अपने बच्चों के आगे हाथ फैलाने की या किसी साहूकार से कर्ज लेने की कतई आवश्यकता नहीं है।

(ख) सामाजिक समरसता और गरिमापूर्ण जीवन
संवैधानिक प्रावधानों के तहत प्रत्येक नागरिक को गरिमापूर्ण जीवन जीने का अधिकार (अनुच्छेद 21) प्राप्त है। जब हमारे समाज का एक बुजुर्ग हवाई जहाज में बैठकर नेपाल जाता है या वातानुकूलित (AC) ट्रेन की बोगी में ससम्मान बैठकर देश के कोने-कोने को देखता है, तो यह केवल एक यात्रा नहीं होती; यह उसके आत्मसम्मान की एक ऊंची उड़ान होती है।

यह योजना समाज में इस संदेश को सुदृढ़ करती है कि राज्य के संसाधनों पर देश के सबसे गरीब व्यक्ति का भी उतना ही अधिकार है जितना किसी पूंजीपति का।

  1. योजना के आकर्षण और आंकड़े
    इस वर्ष सरकार ने योजना के दायरे को व्यापक बनाया है ताकि अधिक से अधिक लोगों को लाभान्वित किया जा सके

कुल लाभार्थियों की संख्या
इस वर्ष कुल 56,000 वरिष्ठ नागरिकों को मुफ्त यात्रा का लाभ मिलेगा।

रेलमार्ग द्वारा यात्रा
कुल 50,000 यात्रियों को विशेष वातानुकूलित (AC) ट्रेनों के माध्यम से देश के 15 प्रमुख सांस्कृतिक एवं धार्मिक स्थलों की सैर कराई जाएगी।

हवाई मार्ग द्वारा यात्रा
कुल 6,000 भाग्यशाली वरिष्ठ नागरिकों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हवाई जहाज द्वारा पशुपतिनाथ मंदिर (काठमांडू, नेपाल) के दर्शन कराए जाएंगे।

संपूर्ण व्यय वहन
यात्रियों के घर के नजदीकी रेलवे स्टेशन/हवाई अड्डे से लेकर गंतव्य तक जाने, वहां ठहरने, सात्विक भोजन, गाइड की व्यवस्था और आपातकालीन चिकित्सा का पूरा खर्च राजस्थान सरकार स्वयं वहन करेगी।

यात्रियों को अपनी जेब से एक भी पैसा खर्च करने की आवश्यकता नहीं है।

  1. यात्रा के लिए चयनित प्रमुख तीर्थ स्थल
    इस योजना के अंतर्गत आवेदन करते समय आवेदक अपनी रुचि और श्रद्धा के अनुसार निम्नलिखित स्थलों में से किसी एक का चयन कर सकते हैं:

यात्रा का माध्यम

प्रमुख गंतव्य स्थल

विशेष रेल मार्ग (AC Train)

श्री राम जन्मभूमि (अयोध्या) और काशी विश्वनाथ (वाराणसी) जगन्नाथ पुरी (ओडिशा) रामेश्वरम (तमिलनाडु) द्वारकापुरी (गुजरात) तिरुपति बालाजी (आंध्र प्रदेश) वैष्णो देवी और अमृतसर
(गोल्डन टेम्पल)
उज्जैन (महाकालेश्वर-ओमकारेश्वर) समेत देश के 15 सुप्रसिद्ध स्थल।

हवाई मार्ग (Airplane)

  • पशुपतिनाथ मंदिर, काठमांडू (नेपाल) — यह अंतरराष्ट्रीय यात्रा का एक शानदार अवसर है।
  1. पात्रता के कड़े नियम और शर्तें: कौन कर सकता है आवेदन?

बहुजन समाज के लोगों को अक्सर सूचना के अभाव में यह समझ नहीं आता कि वे पात्र हैं या नहीं।

सरकार ने इसके लिए बहुत ही स्पष्ट और पारदर्शी नियम बनाए हैं, जिन्हें समझना आवश्यक है

राजस्थान का मूल निवासी
आवेदक अनिवार्य रूप से राजस्थान राज्य का स्थायी निवासी होना चाहिए।

आयु सीमा
(सबसे महत्वपूर्ण शर्त): आवेदक की आयु 1 अप्रैल 2026 को 60 वर्ष या उससे अधिक होनी चाहिए। अर्थात, आवेदक का जन्म 1 अप्रैल 1966 से पहले का होना चाहिए। आयु की गणना के लिए जन आधार कार्ड में दर्ज जन्मतिथि को ही अंतिम आधार माना जाएगा।

गैर-आयकरदाता
आवेदक या उसका जीवनसाथी इनकम टैक्स पेयर नहीं होना चाहिए।

यह शर्त हमारे गरीब और मध्यम वर्ग के बहुजन भाइयों के लिए एक सुरक्षा कवच है, जिससे अमीर लोग इस दौड़ से बाहर हो जाते हैं और वास्तविक गरीबों को मौका मिलता है।

पूर्व में लाभ न लिया हो
आवेदक ने पूर्व में देवस्थान विभाग की किसी भी वरिष्ठ नागरिक तीर्थ यात्रा योजना का लाभ न उठाया हो।

इस संबंध में आवेदन के समय ऑनलाइन ही एक स्व-घोषणा पत्र देना होगा।

शारीरिक एवं मानसिक स्वास्थ्य
चूंकि यात्राएं लंबी होती हैं, इसलिए आवेदक शारीरिक और मानसिक रूप से स्वस्थ होना चाहिए।

वह किसी गंभीर संक्रामक रोग
(जैसे टीबी, संक्रामक त्वचा रोग आदि) से ग्रसित न हो।

चयन के बाद सरकारी डॉक्टर से मेडिकल फिटनेस सर्टिफिकेट बनवाना अनिवार्य होगा।

अन्य शर्त
भिक्षावृत्ति पर जीवन यापन करने वाले व्यक्ति इस योजना के अंतर्गत पात्र नहीं माने गए हैं।

  1. जीवनसाथी और सहायक के नियम
    बुजुर्गों के लिए बड़ी राहत
    अक्सर हमारे समाज के बुजुर्ग इस चिंता में आवेदन नहीं करते कि बुढ़ापे में अकेले इतनी दूर कैसे जाएंगे? हाथ-पैर दर्द करते हैं, सामान कौन उठाएगा ?

सरकार ने इस मानवीय पहलू को समझते हुए बहुत ही संवेदनशील नियम बनाए हैं
(क) जीवनसाथी को साथ ले जाने की छूट
यदि कोई वरिष्ठ नागरिक आवेदन कर रहा है, तो वह अपने वैध जीवनसाथी (पति या पत्नी) को अपने साथ यात्रा पर ले जा सकता है।

सबसे बड़ी राहत यह है कि यदि जीवनसाथी की आयु 60 वर्ष से कम भी है (मान लीजिए पत्नी की उम्र 52 या 55 वर्ष ही है), तब भी वह अपने बुजुर्ग पति के साथ मुफ्त यात्रा पर जाने की हकदार होगी।

इसके लिए दोनों का आवेदन एक साथ संयुक्त रूप से भरा जाना चाहिए।

(ख) सहायक ले जाने की सुविधा
70 वर्ष से अधिक आयु के एकल आवेदक
यदि कोई बुजुर्ग अकेले यात्रा कर रहा है और उसकी उम्र 70 वर्ष या उससे अधिक है, तो वह अपने साथ सेवा-टहल और देखभाल के लिए अपने परिवार के किसी एक वयस्क सदस्य (जैसे बेटा, बेटी, बहू, पोता या कोई नजदीकी रिश्तेदार) को ‘सहायक’ के रूप में ले जा सकता है।

उस सहायक की यात्रा भी पूरी तरह मुफ्त होगी।

75 वर्ष से अधिक आयु के दंपत्ति: यदि पति-पत्नी दोनों साथ जा रहे हैं और दोनों की ही आयु 75 वर्ष से अधिक है, तो वे भी अपने साथ एक सहायक ले जाने के अधिकारी हैं।

6.समय को समझें, चूकना नहीं है!
हमारे समाज के लोग अक्सर अंतिम तिथियों की परवाह नहीं करते और अंत में पोर्टल बंद होने पर पछताते हैं। इस वर्ष की समय-सीमा अत्यंत संक्षिप्त है, इसलिए इसे नोट कर लें

ऑनलाइन आवेदन प्रारंभ होने की तिथि 27 मई 2026

ऑनलाइन आवेदन की अंतिम तिथि
10 जून 2026

लॉटरी एवं चयन प्रक्रिया
जून 2026 के मध्य से अंतिम सप्ताह तक।

यात्राओं का शुभारंभ
जुलाई 2026 से चरणबद्ध तरीके से ट्रेनें और उड़ानें शुरू हो जाएंगी।

  1. आवश्यक दस्तावेज
    आवेदन करने से पहले अपने झोले या अलमारी में से निम्नलिखित दस्तावेजों को निकालकर दुरुस्त कर लें

जन आधार कार्ड
यह सबसे महत्वपूर्ण दस्तावेज है। आवेदन की पूरी प्रक्रिया इसी के माध्यम से संचालित होगी।

यदि आपके जन आधार में नाम की स्पेलिंग, जन्मतिथि या मोबाइल नंबर गलत है, तो उसे आज ही ई-मित्र पर जाकर सुधरवा लें।

आधार कार्ड
आवेदक और साथ जाने वाले जीवनसाथी/सहायक दोनों का आधार कार्ड अनिवार्य है।

सक्रिय मोबाइल नंबर
जो आपके जन आधार और आधार कार्ड से लिंक हो, क्योंकि उसी पर चयन और यात्रा की तारीखों का ओटीपी और एसएमएस आएगा।

राजकीय चिकित्सक द्वारा जारी चिकित्सा प्रमाण पत्र: यह फॉर्म का प्रारूप ऑनलाइन मिल जाता है, जिसे किसी भी सरकारी अस्पताल के डॉक्टर से जांच करवाकर हस्ताक्षरित करवाना होता है।

आयकरदाता न होने का स्व-घोषणा पत्र
जो ऑनलाइन फॉर्म भरते समय टिक मार्क करना होता है।

  1. चयन की पारदर्शी प्रक्रिया लॉटरी सिस्टम
    बहुजन समाज के भाइयों में अक्सर यह संशय रहता है कि “हम तो गरीब हैं, हमारी कोई सिफारिश नहीं है, तो हमारा नंबर कैसे आएगा?

मैं आपको आश्वस्त करना चाहता हूँ कि इस योजना में किसी भी प्रकार की राजनैतिक सिफारिश या भाई-भतीजावाद नहीं चलता।

आवेदन प्रक्रिया पूर्ण होने के बाद, देवस्थान विभाग प्रत्येक जिले की जनसंख्या और प्राप्त आवेदनों के अनुपात में कम्प्यूटरीकृत लॉटरी ड्रा (आयोजित करता है।

यह प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी और डिजिटल होती है।

लॉटरी में जिन आवेदकों का नाम मुख्य सूची में आता है, उन्हें सीधे एसएमएस द्वारा सूचित किया जाता है।

इसके अतिरिक्त एक वेटिंग लिस्ट भी बनाई जाती है, ताकि यदि मुख्य सूची का कोई यात्री स्वास्थ्य कारणों से या किसी अन्य कारण से नहीं जा पाता है, तो हमारे दूसरे गरीब भाई को मौका मिल सके।

  1. आवेदन कैसे करें?योजना का लाभ उठाने के लिए आवेदन करने के दो बेहद सरल तरीके हैं

तरीका 1: स्वयं की SSO ID द्वारा (घर बैठे)
यदि घर में कोई पढ़ा-लिखा युवा है, तो वह अपनी या बुजुर्ग की SSO ID के माध्यम से राजस्थान सरकार के ऑफिशियल देवस्थान पोर्टल (edevasthan.rajasthan.gov.in) पर लॉगिन कर सकता है।

वहां Citizen Apps (G2C) में जाकर Devasthan विभाग का चयन करें और “Senior Citizen Tirth Yatra 2026” के फॉर्म को सावधानीपूर्वक भरें।

तरीका 2
नजदीकी ई-मित्र केंद्र पर जाकर
यह सबसे सुरक्षित और आसान तरीका है।

हमारे बुजुर्ग अपने जन आधार, आधार कार्ड और मोबाइल को लेकर अपने गांव या मोहल्ले के ई-मित्र केंद्र पर जाएं। वहां का संचालक मामूली शुल्क लेकर आपका फॉर्म ऑनलाइन सबमिट कर देगा।

फॉर्म भरने के बाद रसीद अवश्य प्राप्त करें।

  1. बहुजन समाज के शिक्षित युवाओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं से मेरी अपील

एक सामाजिक चिंतक होने के नाते, मेरा यह दृढ़ विश्वास है कि कोई भी सरकारी योजना तब तक सफल नहीं हो सकती जब तक समाज का पढ़ा-लिखा वर्ग उसमें अपनी भागीदारी न निभाए।

हमारे बहुजन समाज के युवाओं, छात्र संगठनों, सरकारी कर्मचारियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का यह नैतिक और संवैधानिक दायित्व है कि वे

अपने-अपने मोहल्लों, बस्तियों, गांवों और ढाणियों में चौपालें लगाएं और इस योजना के बारे में अनपढ़ व गरीब बुजुर्गों को जानकारी दें।

बुजुर्गों के जन आधार कार्ड में यदि कोई त्रुटि है, तो उसे ठीक करवाने में उनकी मदद करें।

उन्हें सरकारी अस्पतालों में ले जाकर डॉक्टरों से उनका मेडिकल फिटनेस सर्टिफिकेट बनवाने में सहयोग करें।

ई-मित्र पर ले जाकर उनका ऑनलाइन फॉर्म 10 जून 2026 से पहले भरवाना सुनिश्चित करें।

याद रखिए, किसी गरीब, शोषित और साधनहीन बुजुर्ग को देश के किसी भव्य स्थल की यात्रा करवाना और उसके चेहरे पर मुस्कान लाना, सबसे बड़ा सामाजिक और मानवीय पुण्य का कार्य है।

निष्कर्ष: अधिकारों के प्रति जागिए और अवसर को पहचानिए
बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर ने हमेशा कहा था कि चेतना ही प्रगति की पहली सीढ़ी है।

जब तक हम राज्य द्वारा दी जा रही सुविधाओं और अपने अधिकारों के प्रति सचेत नहीं होंगे, तब तक हमारा आर्थिक और सामाजिक उत्थान संभव नहीं है।

राजस्थान सरकार की यह देवस्थान यात्रा योजना हमारे समाज के उन बुजुर्गों के लिए सम्मान और सुकून के पल जीने का एक अनमोल झरोखा है, जिन्होंने जीवन भर केवल अभावों का सामना किया है।

मैं ब्यावर, राजस्थान की धरती से अपने समस्त बहुजन समाज के स्वाभिमानी नागरिकों, माताओं और पितातुल्य बुजुर्गों से करबद्ध प्रार्थना करता हूँ कि हीनभावना को त्यागिए, आर्थिक तंगी की चिंताओं को पीछे छोड़िए और सरकार की इस जनकल्याणकारी योजना का बढ़-चढ़कर लाभ उठाइए।

10 जून 2026 की अंतिम तिथि को अपने मस्तिष्क में अंकित कर लीजिए और आज ही अपने कदम ई-मित्र केंद्र की ओर बढ़ाइए।

आइए, हम सब मिलकर सूचना के इस अभाव को दूर करें और अपने समाज के अंतिम व्यक्ति तक इस अधिकार की रोशनी पहुंचाएं।

लेखक
सोहन लाल सिंगारिया
सामाजिक आर्थिक चिन्तक
एवं विचारक ब्यावर राजस्थान

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