“बेरोजगारी खा गई जवान नस्लों को साहब•••अब लड़के किसी त्यौहार पर खुश नज़र नहीं आते•••!”
“बेरोज़गार आदमी का कोई त्योहार नहीं होता,ये गरीबी है दोस्त इसका कोई ऐतबार नहीं होता! — गरीबी का सबसे कड़वा सच है।बेरोज़गार आदमी का कोई त्योहार नहीं होता”—यह पंक्ति किसी…
