वैश्विक विश्वविद्यालयों, स्वीकृत पाठ्यक्रमों एवं प्रक्रियाओं पर आधारित एक विस्तृत मार्गदर्शिका

मार्गदर्शक एवं संकलन
सोहन लाल सिंगारिया
“शिक्षा वह शेरनी का दूध है, जो इसे पीएगा वह दहाड़ेगा।” बाबासाहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर का यह अमर संदेश आज भी उतना ही प्रासंगिक है।
आर्थिक रूप से कमजोर और वंचित समाज (SC, ST, OBC एवं EWS) के विद्यार्थियों के लिए विदेशों के शीर्ष विश्वविद्यालयों में पढ़ना हमेशा से एक दूर का सपना रहा है।
लेकिन आज समय बदल चुका है। यदि आपमें प्रतिभा है और कुछ कर गुजरने का जज्बा है, तो आपकी राह में गरीबी रोड़ा नहीं बन सकती।
भारत सरकार और राजस्थान सरकार की कई ऐसी कल्याणकारी योजनाएं हैं, जो विदेशों में स्नातक (UG), स्नातकोत्तर (PG), और रिसर्च (Ph.D./Post-Doc) के लिए 100% तक की स्कॉलरशिप
(पूर्ण वित्तीय सहायता)
प्रदान करती हैं।
यह लेख समाज की अंतिम पंक्ति में बैठे हर उस होनहार विद्यार्थी के लिए है, जो सात समंदर पार जाकर अपने और अपने परिवार का नाम रोशन करना चाहता है।
आइए, इन योजनाओं, स्वीकृत देशों, शीर्ष विश्वविद्यालयों और पाठ्यक्रमों को बहुत ही सरल और बारीक भाषा में विस्तार से समझते हैं।
- राजस्थान सरकार की विशेष योजना
(केवल राजस्थान के मूल निवासियों के लिए)
योजना का नाम: राजीव गांधी स्कॉलरशिप फॉर एकेडमिक एक्सीलेंस (RGS)
यह राजस्थान सरकार की सबसे महत्वाकांक्षी और क्रांतिकारी योजना है। इसके तहत हर साल राजस्थान के मेधावी विद्यार्थियों को दुनिया के शीर्ष 150 विश्वविद्यालयों में पढ़ने के लिए वित्तीय सहायता दी जाती है।
स्वीकृत देश और विश्वविद्यालय (Where can you study?)
यह योजना विश्व प्रसिद्ध QS वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग (QS World University Rankings) के शीर्ष 1-150 स्थानों पर आने वाले विश्वविद्यालयों को मान्यता देती है।
इसके अंतर्गत छात्र मुख्य रूप से निम्नलिखित देशों के प्रतिष्ठित संस्थानों में प्रवेश ले सकते हैं
अमेरिका (USA)
हार्वर्ड यूनिवर्सिटी, स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी, मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (MIT), कैलिफोर्निया इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (Caltech), यूनिवर्सिटी ऑफ शिकागो, कोलंबिया यूनिवर्सिटी, येल यूनिवर्सिटी, यूनिवर्सिटी ऑफ पेन्सिलवेनिया।
ब्रिटेन (UK)
यूनिवर्सिटी ऑफ ऑक्सफोर्ड, यूनिवर्सिटी ऑफ कैंब्रिज, यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन (UCL), इम्पीरियल कॉलेज लंदन, यूनिवर्सिटी ऑफ एडिनबर्ग, किंग्स कॉलेज लंदन, यूनिवर्सिटी ऑफ मैनचेस्टर।
सिंगापुर
नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ सिंगापुर (NUS), नानयांग टेक्नोलॉजिकल यूनिवर्सिटी (NTU)।
ऑस्ट्रेलिया
यूनिवर्सिटी ऑफ मेलबर्न, यूनिवर्सिटी ऑफ सिडनी, यूनिवर्सिटी ऑफ न्यू साउथ वेल्स (UNSW)।
अन्य देश
स्विट्जरलैंड (ETH ज्यूरिख, EPFL),
कनाडा (मैकगिल यूनिवर्सिटी, यूनिवर्सिटी ऑफ टोरंटो)
चीन (पेकिंग यूनिवर्सिटी, सिंघुआ यूनिवर्सिटी)
जापान (यूनिवर्सिटी ऑफ टोक्यो)
दक्षिण कोरिया (KAIST)।
स्वीकृत पाठ्यक्रम और विषय (Approved Courses & Disciplines)
सरकार ने इसके लिए बाकायदा सीटों का वर्गीकरण (Slots Allocation) किया है, जिसमें भारतीय छात्रों को निम्नलिखित विषयों के लिए स्वीकृति दी जाती है
मानविकी और सामाजिक विज्ञान (Humanities & Social Sciences): इतिहास, समाजशास्त्र, लोक प्रशासन, राजनीति विज्ञान, अंतरराष्ट्रीय संबंध (International Relations) आदि। इसके लिए 150 सीटें आरक्षित हैं।
प्रबंधन, व्यावसायिक प्रशासन, अर्थशास्त्र और वित्त (Management, MBA, Economics & Finance)
व्यावसायिक अर्थशास्त्र, वित्तीय प्रबंधन, डेटा एनालिटिक्स आदि। इसके लिए 25 सीटें तय हैं।
शुद्ध विज्ञान और सार्वजनिक स्वास्थ्य (Pure Science & Public Health)
भौतिकी, रसायन विज्ञान, जीव विज्ञान, महामारी विज्ञान (Epidemiology),
वैश्विक स्वास्थ्य नीतियां आदि।
इसके लिए 25 सीटें
आवंटित हैं।
कृषि, वानिकी, प्राकृतिक और पर्यावरण विज्ञान (Agriculture, Forestry & Environmental Science)
सतत विकास, जलवायु परिवर्तन अध्ययन, मृदा विज्ञान।
कानून (Law): अंतर्राष्ट्रीय कानून (International Law), मानवाधिकार कानून, कॉर्पोरेट कानून।
इंजीनियरिंग, चिकित्सा, दंत चिकित्सा और वास्तुकला (Engineering, Medicine, Dentistry & Architecture)
स्नातक (UG) स्तर पर इन चार तकनीकी पाठ्यक्रमों के लिए विशेष कड़ा नियम है।
इन पाठ्यक्रमों के लिए छात्र को शीर्ष 1-150 QS रैंकिंग वाली यूनिवर्सिटी में तो प्रवेश मिलना ही चाहिए, साथ ही वह यूनिवर्सिटी अपने ‘सब्जेक्ट-वाइज’ (Subject-wise) रैंकिंग में दुनिया की शीर्ष 25 में शामिल होनी चाहिए।
इन क्षेत्रों के लिए अधिकतम 37 सीटें (कुल सीटों का 7.5%) उपलब्ध हैं।
अध्ययन की अवधि (Course Duration Limit)
स्नातक (UG) के लिए अधिकतम 4 वर्ष,
स्नातकोत्तर (PG) के लिए 2 वर्ष
पीएच.डी. (Ph.D.) के लिए 3 वर्ष
पोस्ट-डॉक्टरल रिसर्च के लिए 1.5 वर्ष की अवधि तक छात्रवृत्ति स्वीकृत की जाती है।
पात्रता (Eligibility):
आवेदक राजस्थान का मूल निवासी होना चाहिए
उम्र आवेदन के वर्ष की 1 जुलाई को 35 वर्ष से कम होनी चाहिए।
एक परिवार से केवल एक ही बच्चा इस योजना का लाभ उठा सकता है।
विदेश के चिन्हित विश्वविद्यालय से अनकंडीशनल ऑफर लेटर
(Admission Letter) होना अनिवार्य है।
वर्ग वार विशेष प्रावधान एवं पारिवारिक आय सीमा
इस योजना में समाज के गरीब और पिछड़े वर्ग को प्राथमिकता देने के लिए आय सीमा के तीन स्लैब बनाए गए हैं
1 प्रथम श्रेणी
(E1 – ₹8 लाख से कम वार्षिक आय)
इस वर्ग के विद्यार्थियों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाती है। कुल सीटों का सबसे बड़ा हिस्सा इसी वर्ग के लिए है।
(SC, ST, OBC, EWS और सामान्य वर्ग के गरीब परिवार इसमें आते हैं)।
2 द्वितीय श्रेणी
(E2 – ₹8 लाख से ₹25 लाख तक वार्षिक आय)
प्रथम श्रेणी के छात्र उपलब्ध न होने पर इन्हें मौका मिलता है।
3 तृतीय श्रेणी
(E3 – ₹25 लाख से अधिक वार्षिक आय)
केवल सीमित सीटों पर ही विचार किया जाता है।
महिला आरक्षण
कुल उपलब्ध सीटों में से 30% सीटें छात्राओं (Girls) के लिए आरक्षित हैं।
मिलने वाली स्कॉलरशिप राशि
₹8 लाख से कम आय वाले परिवार (E1) शिक्षण शुल्क (Tuition Fee) और बेंच फीस का 100%
भुगतान
1 (अधिकतम ₹50 लाख तक) सरकार सीधे यूनिवर्सिटी को करती है।
2 रहने-खाने के लिए (Living Expenses) सालाना ₹10 लाख तक का खर्च और हवाई टिकट का खर्च सरकार उठाती है।
₹8 लाख से ₹25 लाख आय वाले परिवार (E2) शिक्षण शुल्क का 100% (अधिकतम ₹50 लाख) सरकार देती है, लेकिन रहने-खाने के खर्च का केवल आंशिक हिस्सा (लगभग ₹6 लाख सालाना) ही दिया जाता है।
विद्यार्थी/अभिभावक का स्वयं का खर्च
यदि छात्र प्रथम श्रेणी (₹8 लाख से कम आय) में आता है, तो उसे अपनी जेब से ₹1 भी खर्च नहीं करना पड़ता।
संपूर्ण वित्तीय भार सरकार उठाती है।
द्वितीय और तृतीय श्रेणी के छात्रों को रहने-खाने का आंशिक खर्च स्वयं वहन करना पड़ सकता है।
- भारत सरकार की प्रमुख स्कॉलरशिप योजनाएं (अखिल भारतीय स्तर पर)
(क) राष्ट्रीय प्रवासी छात्रवृत्ति (National Overseas Scholarship – NOS)
यह योजना केंद्रीय सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय द्वारा विशेष रूप से वंचित वर्गों के लिए चलाई जाती है।
स्वीकृत देश और विश्वविद्यालय
भारत सरकार की इस योजना के तहत छात्र दुनिया के किसी भी देश में जा सकते हैं, बशर्ते वह संस्थान या विश्वविद्यालय QS वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग में शीर्ष 500 (Top 500) के भीतर आता हो और उस देश की सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त (Accredited) हो।
इसमें अमेरिका, ब्रिटेन, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया, जर्मनी, फ्रांस, सिंगापुर और यूरोपीय संघ के देश शामिल हैं।
स्वीकृत पाठ्यक्रम और विषय
यह छात्रवृत्ति केवल मास्टर्स (PG) और पीएच.डी. (Ph.D.) पाठ्यक्रमों के लिए प्रदान की जाती है।
स्नातक (Bachelors level) पाठ्यक्रमों के लिए यह योजना लागू नहीं है।
इसके तहत इंजीनियरिंग, मैनेजमेंट, प्योर साइंसेज, सोशल साइंसेज, ह्यूमैनिटीज, इंटरनेशनल लॉ और एग्रीकल्चर सहित लगभग सभी विषयों (Any field of study) के लिए भारतीय छात्रों को स्वीकृति दी जाती है।
लक्षित वर्ग (Target Groups)
केवल अनुसूचित जाति (SC), विमुक्त, खानाबदोश और अर्ध-खानाबदोश जनजातियाँ, भूमिहीन कृषि मजदूर और पारंपरिक कारीगर वर्ग के लिए
(कुल 125 सीटें, जिसमें प्रत्येक राज्य के लिए 10% का कैप/सीमा होती है)।
पात्रता
पारिवारिक वार्षिक आय ₹8 लाख से कम होनी चाहिए।
पिछली डिग्री (जैसे मास्टर्स के लिए ग्रेजुएशन और पीएच.डी. के लिए पोस्ट-ग्रेजुएशन) में न्यूनतम 60% अंक होने अनिवार्य हैं। उम्र 35 वर्ष से कम होनी चाहिए।
मिलने वाली राशि
वास्तविक ट्यूशन फीस का 100% भुगतान।
इसके साथ ही वार्षिक रखरखाव भत्ता (अमेरिका व अन्य देशों के लिए $15,400 और यूके के लिए £9,900), आकस्मिक भत्ता (Contingency Allowance), चिकित्सा बीमा प्रीमियम, वीजा फीस और इकोनॉमी क्लास का हवाई टिकट।
स्वयं का खर्च
इस योजना के तहत चयनित होने पर विद्यार्थी का व्यक्तिगत खर्च शून्य हो जाता है।
(ख) राष्ट्रीय प्रवासी छात्रवृत्ति – अनुसूचित जनजाति (NOS – ST)
यह जनजातीय कार्य मंत्रालय (Ministry of Tribal Affairs) द्वारा संचालित है।
लक्षित वर्ग, देश और पाठ्यक्रम
यह केवल अनुसूचित जनजाति (ST) वर्ग के प्रतिभावान विद्यार्थियों के लिए है।
इसके नियम, देश, विश्वविद्यालय
(Top 500 QS रैंकिंग)
स्वीकृत पाठ्यक्रम
(केवल मास्टर्स और पीएच.डी.) सामाजिक न्याय मंत्रालय की NOS के समान ही हैं।
प्रतिवर्ष 20 नए ST छात्रों को यह स्कॉलरशिप दी जाती है।
मिलने वाली राशि
शिक्षण शुल्क, रहने का खर्च, चिकित्सा बीमा, वीजा फीस और हवाई टिकट का पूरा भुगतान भारत सरकार करती है।
(ग) अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) और ईडब्ल्यूएस (EWS) के लिए वित्तीय सहायता
केंद्रीय स्तर पर OBC और EWS के लिए वर्तमान में विदेशों में पढ़ाई हेतु ‘राष्ट्रीय प्रवासी छात्रवृत्ति’ जैसी कोई पूर्ण-वित्तपोषित योजना समर्पित रूप से प्रभावी नहीं है।
समाधान
OBC, EWS और सामान्य वर्ग के आर्थिक रूप से कमजोर छात्र राजस्थान सरकार की ‘राजीव गांधी स्कॉलरशिप (RGS)’ का लाभ उठा सकते हैं, जहाँ ₹8 लाख से कम आय वाले सभी वर्गों के छात्रों को समान रूप से 100% स्कॉलरशिप का लाभ मिलता है।
- विदेश में पढ़ाई का वास्तविक खर्च बनाम स्कॉलरशिप (तुलनात्मक विश्लेषण)
यदि कोई विद्यार्थी बिना स्कॉलरशिप के विदेश जाता है, तो खर्च का ढांचा औसतन इस प्रकार होता है स्नातक (UG) पाठ्यक्रम के लिए
यदि कोई छात्र अमेरिका या यूके जैसे देशों से स्नातक करना चाहता है, तो वहां औसतन वार्षिक शिक्षण शुल्क ₹25 लाख से ₹40 लाख तक होता है।
इसके साथ ही रहने-खाने का सालाना खर्च लगभग ₹10 लाख से ₹12 लाख आता है।
इस प्रकार बिना स्कॉलरशिप के कुल अनुमानित खर्च ₹35 लाख से ₹52 लाख प्रति वर्ष बैठता है।
लेकिन राजस्थान की RGS योजना के तहत श्रेणी-1 (₹8 लाख से कम आय) में चयनित होने पर छात्र का व्यक्तिगत खर्च पूरी तरह शून्य (₹0) हो जाता है।
स्नातकोत्तर (PG) पाठ्यक्रम के लिए
यूके, कनाडा या ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों से मास्टर्स करने पर औसतन वार्षिक शिक्षण शुल्क ₹20 लाख से ₹35 लाख तक आता है।
वहीं रहने-खाने का खर्च प्रति वर्ष ₹8 लाख से ₹10 लाख होता है।
बिना स्कॉलरशिप के इसका कुल सालाना खर्च ₹28 लाख से ₹45 लाख तक पहुँच जाता है।
RGS या NOS योजना के तहत चयन होने पर सरकार यह पूरा खर्च खुद उठाती है और छात्र का खर्च शून्य (₹0) रहता है।
रिसर्च (Ph.D.) पाठ्यक्रम के लिए
यूरोप या अमेरिका के शीर्ष संस्थानों से पीएच.डी. या रिसर्च करने पर वार्षिक शिक्षण शुल्क ₹15 लाख से ₹30 लाख और रहने-खाने का खर्च ₹8 लाख से ₹12 लाख आता है।
इस प्रकार बिना स्कॉलरशिप के कुल खर्च ₹23 लाख से ₹42 लाख प्रति वर्ष तक होता है।
स्कॉलरशिप योजनाओं के अंतर्गत आने वाले छात्रों के लिए पूर्ण वित्तीय सहायता उपलब्ध होने के कारण उनका खुद का खर्च शून्य (₹0) हो जाता है।
- आवेदन कैसे करें? (स्टेप-बाय-स्टेप प्रक्रिया)
एक गरीब और ग्रामीण पृष्ठभूमि का छात्र इस प्रक्रिया को इन चरणों में पूरा कर सकता है
स्टेप 1
भाषा और पात्रता परीक्षा की तैयारी (IELTS/TOEFL/GRE/GMAT)
विदेशों में पढ़ाई के लिए अंग्रेजी भाषा की पकड़ जरूरी है।
इसके लिए निःशुल्क ऑनलाइन सामग्री या यूट्यूब की मदद से तैयारी करें और परीक्षा पास करें।
स्टेप 2
विश्वविद्यालय का चयन और आवेदन
दुनिया के शीर्ष विश्वविद्यालयों (जो RGS के लिए टॉप 150 या NOS के लिए टॉप 500 की सूची में हों) की वेबसाइट पर जाकर ऑनलाइन आवेदन करें।
यदि आपकी प्रोफाइल अच्छी है, तो यूनिवर्सिटी आपको “Unconditional Offer Letter” (प्रवेश पत्र) जारी करेगी।
याद रखें, स्कॉलरशिप के लिए आवेदन करने से पहले यूनिवर्सिटी का एडमिशन लेटर होना पहली शर्त है।
स्टेप 3
सरकारी पोर्टल पर आवेदन
राजस्थान की RGS योजना के लिए SSO Portal (rajsso.rajasthan.gov.in) के माध्यम से उच्च शिक्षा विभाग के लिंक पर आवेदन करें।
भारत सरकार की NOS योजना के लिए संबंधित मंत्रालय (Social Justice/Tribal Affairs) के राष्ट्रीय स्कॉलरशिप पोर्टल (nosmsje.gov.in) पर ऑनलाइन फॉर्म भरें।
स्टेप 4
दस्तावेजों का सत्यापन
आय प्रमाण पत्र (तहसीलदार द्वारा जारी), जाति प्रमाण पत्र, मूल निवास, जन आधार/आधार नंबर, शैक्षणिक दस्तावेज और यूनिवर्सिटी का ऑफर लेटर अपलोड करें।
स्टेप 5
स्वीकृति और प्रस्थान
दस्तावेज सही पाए जाने पर सरकार द्वारा स्कॉलरशिप स्वीकृति पत्र (Award Letter) जारी किया जाता है।
इसके आधार पर वीजा आसानी से मिल जाता है और आप विदेश यात्रा के लिए तैयार हो जाते हैं।
- प्रायः पूछे जाने वाले पूरक प्रश्न (FAQs) – आम आदमी के लिए समाधान
प्रश्न 1: क्या सरकारी स्कूल या हिंदी माध्यम से पढ़ा हुआ विद्यार्थी भी विदेश जा सकता है?
उत्तर: बिल्कुल जा सकता है।
विदेशी विश्वविद्यालयों को आपके ज्ञान, मेहनत और लगन से मतलब होता है, इस बात से नहीं कि आपकी स्कूली शिक्षा कहाँ से हुई।
आपको बस अंग्रेजी भाषा की प्रवेश परीक्षा (जैसे IELTS) पास करनी होगी, जो अभ्यास से आसानी से संभव है।
प्रश्न 2: क्या आवेदन करने के लिए कोई फीस देनी होती है?
उत्तर: सरकारी स्कॉलरशिप पोर्टल्स पर आवेदन पूरी तरह निःशुल्क होता है।
हालांकि, विदेशी विश्वविद्यालयों में आवेदन करते समय कुछ प्रोसेसिंग फीस लग सकती है, जिसके लिए कई बार यूनिवर्सिटीज गरीब छात्रों की प्रार्थना पर फीस माफ
(Fee Waiver) भी कर देती हैं।
प्रश्न 3: यदि आय प्रमाण पत्र में थोड़ी भी गड़बड़ी हो तो क्या होगा?
उत्तर: आय और जाति प्रमाण पत्र पूरी तरह वैध, डिजिटल हस्ताक्षरित और नवीनतम होने चाहिए।
यदि इनमें कोई विसंगति पाई जाती है, तो आवेदन तुरंत निरस्त हो जाता है। अतः इसे पहले से ही सही बनवा कर रखें।
प्रश्न 4: क्या स्कॉलरशिप का पैसा सीधे विद्यार्थी के खाते में आता है?
उत्तर: शिक्षण शुल्क (Tuition Fee) सीधे संबंधित विदेशी विश्वविद्यालय के बैंक खाते में सरकार द्वारा जमा कराया जाता है।
रहने-खाने और भत्ते का पैसा विद्यार्थी के विदेशी बैंक खाते में किश्तों में ट्रांसफर किया जाता है।
- प्रेरणा संदेश: उठो, जागो और आसमान छुओ!
प्यारे नौजवानों, गरीबी केवल एक सामाजिक और आर्थिक स्थिति है, यह तुम्हारी बुद्धिमत्ता या तुम्हारे सपनों की सीमा तय नहीं कर सकती।
बाबासाहेब डॉ. अंबेडकर भी एक अत्यंत साधारण और वंचित पृष्ठभूमि से निकलकर बड़ौदा नरेश की छात्रवृत्ति के बदौलत कोलंबिया विश्वविद्यालय और लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स पढ़ने गए थे।
उन्होंने साबित किया कि ज्ञान ही सबसे बड़ा हथियार है।
आज सरकारें आपके द्वार पर खड़ी हैं, बस आपको अपनी आँखें खोलनी हैं, जानकारी जुटानी है, और सही दिशा में प्रयास करना है।
अपनी कमियों को अपनी कमजोरी नहीं, अपनी ताकत बनाओ।
गांवों की गलियों से निकलकर दुनिया के सबसे बड़े मंचों पर अपनी उपस्थिति दर्ज कराओ।
तुम सिर्फ अपना नहीं, बल्कि पूरे समाज और राष्ट्र का भविष्य बदलने की क्षमता रखते हो।
डिस्क्लेमर (Disclaimer)
अस्वीकरण
यह लेख केवल सामान्य सूचनात्मक और शैक्षणिक उद्देश्यों के लिए तैयार किया गया है।
भारत सरकार और राजस्थान सरकार की स्कॉलरशिप योजनाओं के नियम, पात्रता मानदंड, चिन्हित विश्वविद्यालयों की सूची (QS वर्ल्ड रैंकिंग), स्वीकृत पाठ्यक्रमों, आय सीमा और बजट प्रावधानों में समय-समय पर संशोधन और परिवर्तन किए जाते रहते हैं।
नवीनतम, सटीक और आधिकारिक जानकारी के लिए कृपया संबंधित विभागों की आधिकारिक वेबसाइटों (जैसे राजस्थान उच्च शिक्षा विभाग, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय, जनजातीय कार्य मंत्रालय के आधिकारिक पोर्टल) का अवश्य अवलोकन करें।
किसी भी तकनीकी या कानूनी विसंगति की स्थिति में सरकारी दिशानिर्देश ही अंतिम रूप से मान्य होंगे।
लेखक-मार्गदर्शक
(संकलन एवं प्रस्तुति)
सोहन लाल सिंगारिया
प्राचार्य (RES)
सामाजिक-आर्थिक चिन्तक
एवं विचारक ब्यावर, राजस्थान-94622-60179
सपनों को उड़ान, भारत सरकार एवं राजस्थान सरकार की विदेश अध्ययन स्कॉलरशिप योजनाएं
वैश्विक विश्वविद्यालयों, स्वीकृत पाठ्यक्रमों एवं प्रक्रियाओं पर आधारित एक विस्तृत मार्गदर्शिका
मार्गदर्शक एवं संकलन
सोहन लाल सिंगारिया
“शिक्षा वह शेरनी का दूध है, जो इसे पीएगा वह दहाड़ेगा।” बाबासाहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर का यह अमर संदेश आज भी उतना ही प्रासंगिक है।
आर्थिक रूप से कमजोर और वंचित समाज (SC, ST, OBC एवं EWS) के विद्यार्थियों के लिए विदेशों के शीर्ष विश्वविद्यालयों में पढ़ना हमेशा से एक दूर का सपना रहा है।
लेकिन आज समय बदल चुका है। यदि आपमें प्रतिभा है और कुछ कर गुजरने का जज्बा है, तो आपकी राह में गरीबी रोड़ा नहीं बन सकती।
भारत सरकार और राजस्थान सरकार की कई ऐसी कल्याणकारी योजनाएं हैं, जो विदेशों में स्नातक (UG), स्नातकोत्तर (PG), और रिसर्च (Ph.D./Post-Doc) के लिए 100% तक की स्कॉलरशिप
(पूर्ण वित्तीय सहायता)
प्रदान करती हैं।
यह लेख समाज की अंतिम पंक्ति में बैठे हर उस होनहार विद्यार्थी के लिए है, जो सात समंदर पार जाकर अपने और अपने परिवार का नाम रोशन करना चाहता है।
आइए, इन योजनाओं, स्वीकृत देशों, शीर्ष विश्वविद्यालयों और पाठ्यक्रमों को बहुत ही सरल और बारीक भाषा में विस्तार से समझते हैं।
- राजस्थान सरकार की विशेष योजना
(केवल राजस्थान के मूल निवासियों के लिए)
योजना का नाम: राजीव गांधी स्कॉलरशिप फॉर एकेडमिक एक्सीलेंस (RGS)
यह राजस्थान सरकार की सबसे महत्वाकांक्षी और क्रांतिकारी योजना है। इसके तहत हर साल राजस्थान के मेधावी विद्यार्थियों को दुनिया के शीर्ष 150 विश्वविद्यालयों में पढ़ने के लिए वित्तीय सहायता दी जाती है।
स्वीकृत देश और विश्वविद्यालय (Where can you study?)
यह योजना विश्व प्रसिद्ध QS वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग (QS World University Rankings) के शीर्ष 1-150 स्थानों पर आने वाले विश्वविद्यालयों को मान्यता देती है।
इसके अंतर्गत छात्र मुख्य रूप से निम्नलिखित देशों के प्रतिष्ठित संस्थानों में प्रवेश ले सकते हैं
अमेरिका (USA)
हार्वर्ड यूनिवर्सिटी, स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी, मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (MIT), कैलिफोर्निया इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (Caltech), यूनिवर्सिटी ऑफ शिकागो, कोलंबिया यूनिवर्सिटी, येल यूनिवर्सिटी, यूनिवर्सिटी ऑफ पेन्सिलवेनिया।
ब्रिटेन (UK)
यूनिवर्सिटी ऑफ ऑक्सफोर्ड, यूनिवर्सिटी ऑफ कैंब्रिज, यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन (UCL), इम्पीरियल कॉलेज लंदन, यूनिवर्सिटी ऑफ एडिनबर्ग, किंग्स कॉलेज लंदन, यूनिवर्सिटी ऑफ मैनचेस्टर।
सिंगापुर
नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ सिंगापुर (NUS), नानयांग टेक्नोलॉजिकल यूनिवर्सिटी (NTU)।
ऑस्ट्रेलिया
यूनिवर्सिटी ऑफ मेलबर्न, यूनिवर्सिटी ऑफ सिडनी, यूनिवर्सिटी ऑफ न्यू साउथ वेल्स (UNSW)।
अन्य देश
स्विट्जरलैंड (ETH ज्यूरिख, EPFL),
कनाडा (मैकगिल यूनिवर्सिटी, यूनिवर्सिटी ऑफ टोरंटो)
चीन (पेकिंग यूनिवर्सिटी, सिंघुआ यूनिवर्सिटी)
जापान (यूनिवर्सिटी ऑफ टोक्यो)
दक्षिण कोरिया (KAIST)।
स्वीकृत पाठ्यक्रम और विषय (Approved Courses & Disciplines)
सरकार ने इसके लिए बाकायदा सीटों का वर्गीकरण (Slots Allocation) किया है, जिसमें भारतीय छात्रों को निम्नलिखित विषयों के लिए स्वीकृति दी जाती है
मानविकी और सामाजिक विज्ञान (Humanities & Social Sciences): इतिहास, समाजशास्त्र, लोक प्रशासन, राजनीति विज्ञान, अंतरराष्ट्रीय संबंध (International Relations) आदि। इसके लिए 150 सीटें आरक्षित हैं।
प्रबंधन, व्यावसायिक प्रशासन, अर्थशास्त्र और वित्त (Management, MBA, Economics & Finance)
व्यावसायिक अर्थशास्त्र, वित्तीय प्रबंधन, डेटा एनालिटिक्स आदि। इसके लिए 25 सीटें तय हैं।
शुद्ध विज्ञान और सार्वजनिक स्वास्थ्य (Pure Science & Public Health)
भौतिकी, रसायन विज्ञान, जीव विज्ञान, महामारी विज्ञान (Epidemiology),
वैश्विक स्वास्थ्य नीतियां आदि।
इसके लिए 25 सीटें
आवंटित हैं।
कृषि, वानिकी, प्राकृतिक और पर्यावरण विज्ञान (Agriculture, Forestry & Environmental Science)
सतत विकास, जलवायु परिवर्तन अध्ययन, मृदा विज्ञान।
कानून (Law): अंतर्राष्ट्रीय कानून (International Law), मानवाधिकार कानून, कॉर्पोरेट कानून।
इंजीनियरिंग, चिकित्सा, दंत चिकित्सा और वास्तुकला (Engineering, Medicine, Dentistry & Architecture)
स्नातक (UG) स्तर पर इन चार तकनीकी पाठ्यक्रमों के लिए विशेष कड़ा नियम है।
इन पाठ्यक्रमों के लिए छात्र को शीर्ष 1-150 QS रैंकिंग वाली यूनिवर्सिटी में तो प्रवेश मिलना ही चाहिए, साथ ही वह यूनिवर्सिटी अपने ‘सब्जेक्ट-वाइज’ (Subject-wise) रैंकिंग में दुनिया की शीर्ष 25 में शामिल होनी चाहिए।
इन क्षेत्रों के लिए अधिकतम 37 सीटें (कुल सीटों का 7.5%) उपलब्ध हैं।
अध्ययन की अवधि (Course Duration Limit)
स्नातक (UG) के लिए अधिकतम 4 वर्ष,
स्नातकोत्तर (PG) के लिए 2 वर्ष
पीएच.डी. (Ph.D.) के लिए 3 वर्ष
पोस्ट-डॉक्टरल रिसर्च के लिए 1.5 वर्ष की अवधि तक छात्रवृत्ति स्वीकृत की जाती है।
पात्रता (Eligibility):
आवेदक राजस्थान का मूल निवासी होना चाहिए
उम्र आवेदन के वर्ष की 1 जुलाई को 35 वर्ष से कम होनी चाहिए।
एक परिवार से केवल एक ही बच्चा इस योजना का लाभ उठा सकता है।
विदेश के चिन्हित विश्वविद्यालय से अनकंडीशनल ऑफर लेटर
(Admission Letter) होना अनिवार्य है।
वर्ग वार विशेष प्रावधान एवं पारिवारिक आय सीमा
इस योजना में समाज के गरीब और पिछड़े वर्ग को प्राथमिकता देने के लिए आय सीमा के तीन स्लैब बनाए गए हैं
1 प्रथम श्रेणी
(E1 – ₹8 लाख से कम वार्षिक आय)
इस वर्ग के विद्यार्थियों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाती है। कुल सीटों का सबसे बड़ा हिस्सा इसी वर्ग के लिए है।
(SC, ST, OBC, EWS और सामान्य वर्ग के गरीब परिवार इसमें आते हैं)।
2 द्वितीय श्रेणी
(E2 – ₹8 लाख से ₹25 लाख तक वार्षिक आय)
प्रथम श्रेणी के छात्र उपलब्ध न होने पर इन्हें मौका मिलता है।
3 तृतीय श्रेणी
(E3 – ₹25 लाख से अधिक वार्षिक आय)
केवल सीमित सीटों पर ही विचार किया जाता है।
महिला आरक्षण
कुल उपलब्ध सीटों में से 30% सीटें छात्राओं (Girls) के लिए आरक्षित हैं।
मिलने वाली स्कॉलरशिप राशि
₹8 लाख से कम आय वाले परिवार (E1) शिक्षण शुल्क (Tuition Fee) और बेंच फीस का 100%
भुगतान
1 (अधिकतम ₹50 लाख तक) सरकार सीधे यूनिवर्सिटी को करती है।
2 रहने-खाने के लिए (Living Expenses) सालाना ₹10 लाख तक का खर्च और हवाई टिकट का खर्च सरकार उठाती है।
₹8 लाख से ₹25 लाख आय वाले परिवार (E2) शिक्षण शुल्क का 100% (अधिकतम ₹50 लाख) सरकार देती है, लेकिन रहने-खाने के खर्च का केवल आंशिक हिस्सा (लगभग ₹6 लाख सालाना) ही दिया जाता है।
विद्यार्थी/अभिभावक का स्वयं का खर्च
यदि छात्र प्रथम श्रेणी (₹8 लाख से कम आय) में आता है, तो उसे अपनी जेब से ₹1 भी खर्च नहीं करना पड़ता।
संपूर्ण वित्तीय भार सरकार उठाती है।
द्वितीय और तृतीय श्रेणी के छात्रों को रहने-खाने का आंशिक खर्च स्वयं वहन करना पड़ सकता है।
- भारत सरकार की प्रमुख स्कॉलरशिप योजनाएं (अखिल भारतीय स्तर पर)
(क) राष्ट्रीय प्रवासी छात्रवृत्ति (National Overseas Scholarship – NOS)
यह योजना केंद्रीय सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय द्वारा विशेष रूप से वंचित वर्गों के लिए चलाई जाती है।
स्वीकृत देश और विश्वविद्यालय
भारत सरकार की इस योजना के तहत छात्र दुनिया के किसी भी देश में जा सकते हैं, बशर्ते वह संस्थान या विश्वविद्यालय QS वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग में शीर्ष 500 (Top 500) के भीतर आता हो और उस देश की सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त (Accredited) हो।
इसमें अमेरिका, ब्रिटेन, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया, जर्मनी, फ्रांस, सिंगापुर और यूरोपीय संघ के देश शामिल हैं।
स्वीकृत पाठ्यक्रम और विषय
यह छात्रवृत्ति केवल मास्टर्स (PG) और पीएच.डी. (Ph.D.) पाठ्यक्रमों के लिए प्रदान की जाती है।
स्नातक (Bachelors level) पाठ्यक्रमों के लिए यह योजना लागू नहीं है।
इसके तहत इंजीनियरिंग, मैनेजमेंट, प्योर साइंसेज, सोशल साइंसेज, ह्यूमैनिटीज, इंटरनेशनल लॉ और एग्रीकल्चर सहित लगभग सभी विषयों (Any field of study) के लिए भारतीय छात्रों को स्वीकृति दी जाती है।
लक्षित वर्ग (Target Groups)
केवल अनुसूचित जाति (SC), विमुक्त, खानाबदोश और अर्ध-खानाबदोश जनजातियाँ, भूमिहीन कृषि मजदूर और पारंपरिक कारीगर वर्ग के लिए
(कुल 125 सीटें, जिसमें प्रत्येक राज्य के लिए 10% का कैप/सीमा होती है)।
पात्रता
पारिवारिक वार्षिक आय ₹8 लाख से कम होनी चाहिए।
पिछली डिग्री (जैसे मास्टर्स के लिए ग्रेजुएशन और पीएच.डी. के लिए पोस्ट-ग्रेजुएशन) में न्यूनतम 60% अंक होने अनिवार्य हैं। उम्र 35 वर्ष से कम होनी चाहिए।
मिलने वाली राशि
वास्तविक ट्यूशन फीस का 100% भुगतान।
इसके साथ ही वार्षिक रखरखाव भत्ता (अमेरिका व अन्य देशों के लिए $15,400 और यूके के लिए £9,900), आकस्मिक भत्ता (Contingency Allowance), चिकित्सा बीमा प्रीमियम, वीजा फीस और इकोनॉमी क्लास का हवाई टिकट।
स्वयं का खर्च
इस योजना के तहत चयनित होने पर विद्यार्थी का व्यक्तिगत खर्च शून्य हो जाता है।
(ख) राष्ट्रीय प्रवासी छात्रवृत्ति – अनुसूचित जनजाति (NOS – ST)
यह जनजातीय कार्य मंत्रालय (Ministry of Tribal Affairs) द्वारा संचालित है।
लक्षित वर्ग, देश और पाठ्यक्रम
यह केवल अनुसूचित जनजाति (ST) वर्ग के प्रतिभावान विद्यार्थियों के लिए है।
इसके नियम, देश, विश्वविद्यालय
(Top 500 QS रैंकिंग)
स्वीकृत पाठ्यक्रम
(केवल मास्टर्स और पीएच.डी.) सामाजिक न्याय मंत्रालय की NOS के समान ही हैं।
प्रतिवर्ष 20 नए ST छात्रों को यह स्कॉलरशिप दी जाती है।
मिलने वाली राशि
शिक्षण शुल्क, रहने का खर्च, चिकित्सा बीमा, वीजा फीस और हवाई टिकट का पूरा भुगतान भारत सरकार करती है।
(ग) अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) और ईडब्ल्यूएस (EWS) के लिए वित्तीय सहायता
केंद्रीय स्तर पर OBC और EWS के लिए वर्तमान में विदेशों में पढ़ाई हेतु ‘राष्ट्रीय प्रवासी छात्रवृत्ति’ जैसी कोई पूर्ण-वित्तपोषित योजना समर्पित रूप से प्रभावी नहीं है।
समाधान
OBC, EWS और सामान्य वर्ग के आर्थिक रूप से कमजोर छात्र राजस्थान सरकार की ‘राजीव गांधी स्कॉलरशिप (RGS)’ का लाभ उठा सकते हैं, जहाँ ₹8 लाख से कम आय वाले सभी वर्गों के छात्रों को समान रूप से 100% स्कॉलरशिप का लाभ मिलता है।
- विदेश में पढ़ाई का वास्तविक खर्च बनाम स्कॉलरशिप (तुलनात्मक विश्लेषण)
यदि कोई विद्यार्थी बिना स्कॉलरशिप के विदेश जाता है, तो खर्च का ढांचा औसतन इस प्रकार होता है स्नातक (UG) पाठ्यक्रम के लिए
यदि कोई छात्र अमेरिका या यूके जैसे देशों से स्नातक करना चाहता है, तो वहां औसतन वार्षिक शिक्षण शुल्क ₹25 लाख से ₹40 लाख तक होता है।
इसके साथ ही रहने-खाने का सालाना खर्च लगभग ₹10 लाख से ₹12 लाख आता है।
इस प्रकार बिना स्कॉलरशिप के कुल अनुमानित खर्च ₹35 लाख से ₹52 लाख प्रति वर्ष बैठता है।
लेकिन राजस्थान की RGS योजना के तहत श्रेणी-1 (₹8 लाख से कम आय) में चयनित होने पर छात्र का व्यक्तिगत खर्च पूरी तरह शून्य (₹0) हो जाता है।
स्नातकोत्तर (PG) पाठ्यक्रम के लिए
यूके, कनाडा या ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों से मास्टर्स करने पर औसतन वार्षिक शिक्षण शुल्क ₹20 लाख से ₹35 लाख तक आता है।
वहीं रहने-खाने का खर्च प्रति वर्ष ₹8 लाख से ₹10 लाख होता है।
बिना स्कॉलरशिप के इसका कुल सालाना खर्च ₹28 लाख से ₹45 लाख तक पहुँच जाता है।
RGS या NOS योजना के तहत चयन होने पर सरकार यह पूरा खर्च खुद उठाती है और छात्र का खर्च शून्य (₹0) रहता है।
रिसर्च (Ph.D.) पाठ्यक्रम के लिए
यूरोप या अमेरिका के शीर्ष संस्थानों से पीएच.डी. या रिसर्च करने पर वार्षिक शिक्षण शुल्क ₹15 लाख से ₹30 लाख और रहने-खाने का खर्च ₹8 लाख से ₹12 लाख आता है।
इस प्रकार बिना स्कॉलरशिप के कुल खर्च ₹23 लाख से ₹42 लाख प्रति वर्ष तक होता है।
स्कॉलरशिप योजनाओं के अंतर्गत आने वाले छात्रों के लिए पूर्ण वित्तीय सहायता उपलब्ध होने के कारण उनका खुद का खर्च शून्य (₹0) हो जाता है।
- आवेदन कैसे करें? (स्टेप-बाय-स्टेप प्रक्रिया)
एक गरीब और ग्रामीण पृष्ठभूमि का छात्र इस प्रक्रिया को इन चरणों में पूरा कर सकता है
स्टेप 1
भाषा और पात्रता परीक्षा की तैयारी (IELTS/TOEFL/GRE/GMAT)
विदेशों में पढ़ाई के लिए अंग्रेजी भाषा की पकड़ जरूरी है।
इसके लिए निःशुल्क ऑनलाइन सामग्री या यूट्यूब की मदद से तैयारी करें और परीक्षा पास करें।
स्टेप 2
विश्वविद्यालय का चयन और आवेदन
दुनिया के शीर्ष विश्वविद्यालयों (जो RGS के लिए टॉप 150 या NOS के लिए टॉप 500 की सूची में हों) की वेबसाइट पर जाकर ऑनलाइन आवेदन करें।
यदि आपकी प्रोफाइल अच्छी है, तो यूनिवर्सिटी आपको “Unconditional Offer Letter” (प्रवेश पत्र) जारी करेगी।
याद रखें, स्कॉलरशिप के लिए आवेदन करने से पहले यूनिवर्सिटी का एडमिशन लेटर होना पहली शर्त है।
स्टेप 3
सरकारी पोर्टल पर आवेदन
राजस्थान की RGS योजना के लिए SSO Portal (rajsso.rajasthan.gov.in) के माध्यम से उच्च शिक्षा विभाग के लिंक पर आवेदन करें।
भारत सरकार की NOS योजना के लिए संबंधित मंत्रालय (Social Justice/Tribal Affairs) के राष्ट्रीय स्कॉलरशिप पोर्टल (nosmsje.gov.in) पर ऑनलाइन फॉर्म भरें।
स्टेप 4
दस्तावेजों का सत्यापन
आय प्रमाण पत्र (तहसीलदार द्वारा जारी), जाति प्रमाण पत्र, मूल निवास, जन आधार/आधार नंबर, शैक्षणिक दस्तावेज और यूनिवर्सिटी का ऑफर लेटर अपलोड करें।
स्टेप 5
स्वीकृति और प्रस्थान
दस्तावेज सही पाए जाने पर सरकार द्वारा स्कॉलरशिप स्वीकृति पत्र (Award Letter) जारी किया जाता है।
इसके आधार पर वीजा आसानी से मिल जाता है और आप विदेश यात्रा के लिए तैयार हो जाते हैं।
- प्रायः पूछे जाने वाले पूरक प्रश्न (FAQs) – आम आदमी के लिए समाधान
प्रश्न 1: क्या सरकारी स्कूल या हिंदी माध्यम से पढ़ा हुआ विद्यार्थी भी विदेश जा सकता है?
उत्तर: बिल्कुल जा सकता है।
विदेशी विश्वविद्यालयों को आपके ज्ञान, मेहनत और लगन से मतलब होता है, इस बात से नहीं कि आपकी स्कूली शिक्षा कहाँ से हुई।
आपको बस अंग्रेजी भाषा की प्रवेश परीक्षा (जैसे IELTS) पास करनी होगी, जो अभ्यास से आसानी से संभव है।
प्रश्न 2: क्या आवेदन करने के लिए कोई फीस देनी होती है?
उत्तर: सरकारी स्कॉलरशिप पोर्टल्स पर आवेदन पूरी तरह निःशुल्क होता है।
हालांकि, विदेशी विश्वविद्यालयों में आवेदन करते समय कुछ प्रोसेसिंग फीस लग सकती है, जिसके लिए कई बार यूनिवर्सिटीज गरीब छात्रों की प्रार्थना पर फीस माफ
(Fee Waiver) भी कर देती हैं।
प्रश्न 3: यदि आय प्रमाण पत्र में थोड़ी भी गड़बड़ी हो तो क्या होगा?
उत्तर: आय और जाति प्रमाण पत्र पूरी तरह वैध, डिजिटल हस्ताक्षरित और नवीनतम होने चाहिए।
यदि इनमें कोई विसंगति पाई जाती है, तो आवेदन तुरंत निरस्त हो जाता है। अतः इसे पहले से ही सही बनवा कर रखें।
प्रश्न 4: क्या स्कॉलरशिप का पैसा सीधे विद्यार्थी के खाते में आता है?
उत्तर: शिक्षण शुल्क (Tuition Fee) सीधे संबंधित विदेशी विश्वविद्यालय के बैंक खाते में सरकार द्वारा जमा कराया जाता है।
रहने-खाने और भत्ते का पैसा विद्यार्थी के विदेशी बैंक खाते में किश्तों में ट्रांसफर किया जाता है।
- प्रेरणा संदेश: उठो, जागो और आसमान छुओ!
प्यारे नौजवानों, गरीबी केवल एक सामाजिक और आर्थिक स्थिति है, यह तुम्हारी बुद्धिमत्ता या तुम्हारे सपनों की सीमा तय नहीं कर सकती।
बाबासाहेब डॉ. अंबेडकर भी एक अत्यंत साधारण और वंचित पृष्ठभूमि से निकलकर बड़ौदा नरेश की छात्रवृत्ति के बदौलत कोलंबिया विश्वविद्यालय और लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स पढ़ने गए थे।
उन्होंने साबित किया कि ज्ञान ही सबसे बड़ा हथियार है।
आज सरकारें आपके द्वार पर खड़ी हैं, बस आपको अपनी आँखें खोलनी हैं, जानकारी जुटानी है, और सही दिशा में प्रयास करना है।
अपनी कमियों को अपनी कमजोरी नहीं, अपनी ताकत बनाओ।
गांवों की गलियों से निकलकर दुनिया के सबसे बड़े मंचों पर अपनी उपस्थिति दर्ज कराओ।
तुम सिर्फ अपना नहीं, बल्कि पूरे समाज और राष्ट्र का भविष्य बदलने की क्षमता रखते हो।
डिस्क्लेमर (Disclaimer)
अस्वीकरण
यह लेख केवल सामान्य सूचनात्मक और शैक्षणिक उद्देश्यों के लिए तैयार किया गया है।
भारत सरकार और राजस्थान सरकार की स्कॉलरशिप योजनाओं के नियम, पात्रता मानदंड, चिन्हित विश्वविद्यालयों की सूची (QS वर्ल्ड रैंकिंग), स्वीकृत पाठ्यक्रमों, आय सीमा और बजट प्रावधानों में समय-समय पर संशोधन और परिवर्तन किए जाते रहते हैं।
नवीनतम, सटीक और आधिकारिक जानकारी के लिए कृपया संबंधित विभागों की आधिकारिक वेबसाइटों (जैसे राजस्थान उच्च शिक्षा विभाग, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय, जनजातीय कार्य मंत्रालय के आधिकारिक पोर्टल) का अवश्य अवलोकन करें।
किसी भी तकनीकी या कानूनी विसंगति की स्थिति में सरकारी दिशानिर्देश ही अंतिम रूप से मान्य होंगे।
लेखक-मार्गदर्शक
(संकलन एवं प्रस्तुति)
सोहन लाल सिंगारिया
प्राचार्य (RES)
सामाजिक-आर्थिक चिन्तक
एवं विचारक ब्यावर, राजस्थान-94622-60179
वैश्विक विश्वविद्यालयों, स्वीकृत पाठ्यक्रमों एवं प्रक्रियाओं पर आधारित एक विस्तृत मार्गदर्शिका
मार्गदर्शक एवं संकलन
सोहन लाल सिंगारिया
“शिक्षा वह शेरनी का दूध है, जो इसे पीएगा वह दहाड़ेगा।” बाबासाहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर का यह अमर संदेश आज भी उतना ही प्रासंगिक है।
आर्थिक रूप से कमजोर और वंचित समाज (SC, ST, OBC एवं EWS) के विद्यार्थियों के लिए विदेशों के शीर्ष विश्वविद्यालयों में पढ़ना हमेशा से एक दूर का सपना रहा है।
लेकिन आज समय बदल चुका है। यदि आपमें प्रतिभा है और कुछ कर गुजरने का जज्बा है, तो आपकी राह में गरीबी रोड़ा नहीं बन सकती।
भारत सरकार और राजस्थान सरकार की कई ऐसी कल्याणकारी योजनाएं हैं, जो विदेशों में स्नातक (UG), स्नातकोत्तर (PG), और रिसर्च (Ph.D./Post-Doc) के लिए 100% तक की स्कॉलरशिप
(पूर्ण वित्तीय सहायता)
प्रदान करती हैं।
यह लेख समाज की अंतिम पंक्ति में बैठे हर उस होनहार विद्यार्थी के लिए है, जो सात समंदर पार जाकर अपने और अपने परिवार का नाम रोशन करना चाहता है।
आइए, इन योजनाओं, स्वीकृत देशों, शीर्ष विश्वविद्यालयों और पाठ्यक्रमों को बहुत ही सरल और बारीक भाषा में विस्तार से समझते हैं।
- राजस्थान सरकार की विशेष योजना
(केवल राजस्थान के मूल निवासियों के लिए)
योजना का नाम: राजीव गांधी स्कॉलरशिप फॉर एकेडमिक एक्सीलेंस (RGS)
यह राजस्थान सरकार की सबसे महत्वाकांक्षी और क्रांतिकारी योजना है। इसके तहत हर साल राजस्थान के मेधावी विद्यार्थियों को दुनिया के शीर्ष 150 विश्वविद्यालयों में पढ़ने के लिए वित्तीय सहायता दी जाती है।
स्वीकृत देश और विश्वविद्यालय (Where can you study?)
यह योजना विश्व प्रसिद्ध QS वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग (QS World University Rankings) के शीर्ष 1-150 स्थानों पर आने वाले विश्वविद्यालयों को मान्यता देती है।
इसके अंतर्गत छात्र मुख्य रूप से निम्नलिखित देशों के प्रतिष्ठित संस्थानों में प्रवेश ले सकते हैं
अमेरिका (USA)
हार्वर्ड यूनिवर्सिटी, स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी, मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (MIT), कैलिफोर्निया इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (Caltech), यूनिवर्सिटी ऑफ शिकागो, कोलंबिया यूनिवर्सिटी, येल यूनिवर्सिटी, यूनिवर्सिटी ऑफ पेन्सिलवेनिया।
ब्रिटेन (UK)
यूनिवर्सिटी ऑफ ऑक्सफोर्ड, यूनिवर्सिटी ऑफ कैंब्रिज, यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन (UCL), इम्पीरियल कॉलेज लंदन, यूनिवर्सिटी ऑफ एडिनबर्ग, किंग्स कॉलेज लंदन, यूनिवर्सिटी ऑफ मैनचेस्टर।
सिंगापुर
नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ सिंगापुर (NUS), नानयांग टेक्नोलॉजिकल यूनिवर्सिटी (NTU)।
ऑस्ट्रेलिया
यूनिवर्सिटी ऑफ मेलबर्न, यूनिवर्सिटी ऑफ सिडनी, यूनिवर्सिटी ऑफ न्यू साउथ वेल्स (UNSW)।
अन्य देश
स्विट्जरलैंड (ETH ज्यूरिख, EPFL),
कनाडा (मैकगिल यूनिवर्सिटी, यूनिवर्सिटी ऑफ टोरंटो)
चीन (पेकिंग यूनिवर्सिटी, सिंघुआ यूनिवर्सिटी)
जापान (यूनिवर्सिटी ऑफ टोक्यो)
दक्षिण कोरिया (KAIST)।
स्वीकृत पाठ्यक्रम और विषय (Approved Courses & Disciplines)
सरकार ने इसके लिए बाकायदा सीटों का वर्गीकरण (Slots Allocation) किया है, जिसमें भारतीय छात्रों को निम्नलिखित विषयों के लिए स्वीकृति दी जाती है
मानविकी और सामाजिक विज्ञान (Humanities & Social Sciences): इतिहास, समाजशास्त्र, लोक प्रशासन, राजनीति विज्ञान, अंतरराष्ट्रीय संबंध (International Relations) आदि। इसके लिए 150 सीटें आरक्षित हैं।
प्रबंधन, व्यावसायिक प्रशासन, अर्थशास्त्र और वित्त (Management, MBA, Economics & Finance)
व्यावसायिक अर्थशास्त्र, वित्तीय प्रबंधन, डेटा एनालिटिक्स आदि। इसके लिए 25 सीटें तय हैं।
शुद्ध विज्ञान और सार्वजनिक स्वास्थ्य (Pure Science & Public Health)
भौतिकी, रसायन विज्ञान, जीव विज्ञान, महामारी विज्ञान (Epidemiology),
वैश्विक स्वास्थ्य नीतियां आदि।
इसके लिए 25 सीटें
आवंटित हैं।
कृषि, वानिकी, प्राकृतिक और पर्यावरण विज्ञान (Agriculture, Forestry & Environmental Science)
सतत विकास, जलवायु परिवर्तन अध्ययन, मृदा विज्ञान।
कानून (Law): अंतर्राष्ट्रीय कानून (International Law), मानवाधिकार कानून, कॉर्पोरेट कानून।
इंजीनियरिंग, चिकित्सा, दंत चिकित्सा और वास्तुकला (Engineering, Medicine, Dentistry & Architecture)
स्नातक (UG) स्तर पर इन चार तकनीकी पाठ्यक्रमों के लिए विशेष कड़ा नियम है।
इन पाठ्यक्रमों के लिए छात्र को शीर्ष 1-150 QS रैंकिंग वाली यूनिवर्सिटी में तो प्रवेश मिलना ही चाहिए, साथ ही वह यूनिवर्सिटी अपने ‘सब्जेक्ट-वाइज’ (Subject-wise) रैंकिंग में दुनिया की शीर्ष 25 में शामिल होनी चाहिए।
इन क्षेत्रों के लिए अधिकतम 37 सीटें (कुल सीटों का 7.5%) उपलब्ध हैं।
अध्ययन की अवधि (Course Duration Limit)
स्नातक (UG) के लिए अधिकतम 4 वर्ष,
स्नातकोत्तर (PG) के लिए 2 वर्ष
पीएच.डी. (Ph.D.) के लिए 3 वर्ष
पोस्ट-डॉक्टरल रिसर्च के लिए 1.5 वर्ष की अवधि तक छात्रवृत्ति स्वीकृत की जाती है।
पात्रता (Eligibility):
आवेदक राजस्थान का मूल निवासी होना चाहिए
उम्र आवेदन के वर्ष की 1 जुलाई को 35 वर्ष से कम होनी चाहिए।
एक परिवार से केवल एक ही बच्चा इस योजना का लाभ उठा सकता है।
विदेश के चिन्हित विश्वविद्यालय से अनकंडीशनल ऑफर लेटर
(Admission Letter) होना अनिवार्य है।
वर्ग वार विशेष प्रावधान एवं पारिवारिक आय सीमा
इस योजना में समाज के गरीब और पिछड़े वर्ग को प्राथमिकता देने के लिए आय सीमा के तीन स्लैब बनाए गए हैं
1 प्रथम श्रेणी
(E1 – ₹8 लाख से कम वार्षिक आय)
इस वर्ग के विद्यार्थियों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाती है। कुल सीटों का सबसे बड़ा हिस्सा इसी वर्ग के लिए है।
(SC, ST, OBC, EWS और सामान्य वर्ग के गरीब परिवार इसमें आते हैं)।
2 द्वितीय श्रेणी
(E2 – ₹8 लाख से ₹25 लाख तक वार्षिक आय)
प्रथम श्रेणी के छात्र उपलब्ध न होने पर इन्हें मौका मिलता है।
3 तृतीय श्रेणी
(E3 – ₹25 लाख से अधिक वार्षिक आय)
केवल सीमित सीटों पर ही विचार किया जाता है।
महिला आरक्षण
कुल उपलब्ध सीटों में से 30% सीटें छात्राओं (Girls) के लिए आरक्षित हैं।
मिलने वाली स्कॉलरशिप राशि
₹8 लाख से कम आय वाले परिवार (E1) शिक्षण शुल्क (Tuition Fee) और बेंच फीस का 100%
भुगतान
1 (अधिकतम ₹50 लाख तक) सरकार सीधे यूनिवर्सिटी को करती है।
2 रहने-खाने के लिए (Living Expenses) सालाना ₹10 लाख तक का खर्च और हवाई टिकट का खर्च सरकार उठाती है।
₹8 लाख से ₹25 लाख आय वाले परिवार (E2) शिक्षण शुल्क का 100% (अधिकतम ₹50 लाख) सरकार देती है, लेकिन रहने-खाने के खर्च का केवल आंशिक हिस्सा (लगभग ₹6 लाख सालाना) ही दिया जाता है।
विद्यार्थी/अभिभावक का स्वयं का खर्च
यदि छात्र प्रथम श्रेणी (₹8 लाख से कम आय) में आता है, तो उसे अपनी जेब से ₹1 भी खर्च नहीं करना पड़ता।
संपूर्ण वित्तीय भार सरकार उठाती है।
द्वितीय और तृतीय श्रेणी के छात्रों को रहने-खाने का आंशिक खर्च स्वयं वहन करना पड़ सकता है।
- भारत सरकार की प्रमुख स्कॉलरशिप योजनाएं (अखिल भारतीय स्तर पर)
(क) राष्ट्रीय प्रवासी छात्रवृत्ति (National Overseas Scholarship – NOS)
यह योजना केंद्रीय सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय द्वारा विशेष रूप से वंचित वर्गों के लिए चलाई जाती है।
स्वीकृत देश और विश्वविद्यालय
भारत सरकार की इस योजना के तहत छात्र दुनिया के किसी भी देश में जा सकते हैं, बशर्ते वह संस्थान या विश्वविद्यालय QS वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग में शीर्ष 500 (Top 500) के भीतर आता हो और उस देश की सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त (Accredited) हो।
इसमें अमेरिका, ब्रिटेन, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया, जर्मनी, फ्रांस, सिंगापुर और यूरोपीय संघ के देश शामिल हैं।
स्वीकृत पाठ्यक्रम और विषय
यह छात्रवृत्ति केवल मास्टर्स (PG) और पीएच.डी. (Ph.D.) पाठ्यक्रमों के लिए प्रदान की जाती है।
स्नातक (Bachelors level) पाठ्यक्रमों के लिए यह योजना लागू नहीं है।
इसके तहत इंजीनियरिंग, मैनेजमेंट, प्योर साइंसेज, सोशल साइंसेज, ह्यूमैनिटीज, इंटरनेशनल लॉ और एग्रीकल्चर सहित लगभग सभी विषयों (Any field of study) के लिए भारतीय छात्रों को स्वीकृति दी जाती है।
लक्षित वर्ग (Target Groups)
केवल अनुसूचित जाति (SC), विमुक्त, खानाबदोश और अर्ध-खानाबदोश जनजातियाँ, भूमिहीन कृषि मजदूर और पारंपरिक कारीगर वर्ग के लिए
(कुल 125 सीटें, जिसमें प्रत्येक राज्य के लिए 10% का कैप/सीमा होती है)।
पात्रता
पारिवारिक वार्षिक आय ₹8 लाख से कम होनी चाहिए।
पिछली डिग्री (जैसे मास्टर्स के लिए ग्रेजुएशन और पीएच.डी. के लिए पोस्ट-ग्रेजुएशन) में न्यूनतम 60% अंक होने अनिवार्य हैं। उम्र 35 वर्ष से कम होनी चाहिए।
मिलने वाली राशि
वास्तविक ट्यूशन फीस का 100% भुगतान।
इसके साथ ही वार्षिक रखरखाव भत्ता (अमेरिका व अन्य देशों के लिए $15,400 और यूके के लिए £9,900), आकस्मिक भत्ता (Contingency Allowance), चिकित्सा बीमा प्रीमियम, वीजा फीस और इकोनॉमी क्लास का हवाई टिकट।
स्वयं का खर्च
इस योजना के तहत चयनित होने पर विद्यार्थी का व्यक्तिगत खर्च शून्य हो जाता है।
(ख) राष्ट्रीय प्रवासी छात्रवृत्ति – अनुसूचित जनजाति (NOS – ST)
यह जनजातीय कार्य मंत्रालय (Ministry of Tribal Affairs) द्वारा संचालित है।
लक्षित वर्ग, देश और पाठ्यक्रम
यह केवल अनुसूचित जनजाति (ST) वर्ग के प्रतिभावान विद्यार्थियों के लिए है।
इसके नियम, देश, विश्वविद्यालय
(Top 500 QS रैंकिंग)
स्वीकृत पाठ्यक्रम
(केवल मास्टर्स और पीएच.डी.) सामाजिक न्याय मंत्रालय की NOS के समान ही हैं।
प्रतिवर्ष 20 नए ST छात्रों को यह स्कॉलरशिप दी जाती है।
मिलने वाली राशि
शिक्षण शुल्क, रहने का खर्च, चिकित्सा बीमा, वीजा फीस और हवाई टिकट का पूरा भुगतान भारत सरकार करती है।
(ग) अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) और ईडब्ल्यूएस (EWS) के लिए वित्तीय सहायता
केंद्रीय स्तर पर OBC और EWS के लिए वर्तमान में विदेशों में पढ़ाई हेतु ‘राष्ट्रीय प्रवासी छात्रवृत्ति’ जैसी कोई पूर्ण-वित्तपोषित योजना समर्पित रूप से प्रभावी नहीं है।
समाधान
OBC, EWS और सामान्य वर्ग के आर्थिक रूप से कमजोर छात्र राजस्थान सरकार की ‘राजीव गांधी स्कॉलरशिप (RGS)’ का लाभ उठा सकते हैं, जहाँ ₹8 लाख से कम आय वाले सभी वर्गों के छात्रों को समान रूप से 100% स्कॉलरशिप का लाभ मिलता है।
- विदेश में पढ़ाई का वास्तविक खर्च बनाम स्कॉलरशिप (तुलनात्मक विश्लेषण)
यदि कोई विद्यार्थी बिना स्कॉलरशिप के विदेश जाता है, तो खर्च का ढांचा औसतन इस प्रकार होता है स्नातक (UG) पाठ्यक्रम के लिए
यदि कोई छात्र अमेरिका या यूके जैसे देशों से स्नातक करना चाहता है, तो वहां औसतन वार्षिक शिक्षण शुल्क ₹25 लाख से ₹40 लाख तक होता है।
इसके साथ ही रहने-खाने का सालाना खर्च लगभग ₹10 लाख से ₹12 लाख आता है।
इस प्रकार बिना स्कॉलरशिप के कुल अनुमानित खर्च ₹35 लाख से ₹52 लाख प्रति वर्ष बैठता है।
लेकिन राजस्थान की RGS योजना के तहत श्रेणी-1 (₹8 लाख से कम आय) में चयनित होने पर छात्र का व्यक्तिगत खर्च पूरी तरह शून्य (₹0) हो जाता है।
स्नातकोत्तर (PG) पाठ्यक्रम के लिए
यूके, कनाडा या ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों से मास्टर्स करने पर औसतन वार्षिक शिक्षण शुल्क ₹20 लाख से ₹35 लाख तक आता है।
वहीं रहने-खाने का खर्च प्रति वर्ष ₹8 लाख से ₹10 लाख होता है।
बिना स्कॉलरशिप के इसका कुल सालाना खर्च ₹28 लाख से ₹45 लाख तक पहुँच जाता है।
RGS या NOS योजना के तहत चयन होने पर सरकार यह पूरा खर्च खुद उठाती है और छात्र का खर्च शून्य (₹0) रहता है।
रिसर्च (Ph.D.) पाठ्यक्रम के लिए
यूरोप या अमेरिका के शीर्ष संस्थानों से पीएच.डी. या रिसर्च करने पर वार्षिक शिक्षण शुल्क ₹15 लाख से ₹30 लाख और रहने-खाने का खर्च ₹8 लाख से ₹12 लाख आता है।
इस प्रकार बिना स्कॉलरशिप के कुल खर्च ₹23 लाख से ₹42 लाख प्रति वर्ष तक होता है।
स्कॉलरशिप योजनाओं के अंतर्गत आने वाले छात्रों के लिए पूर्ण वित्तीय सहायता उपलब्ध होने के कारण उनका खुद का खर्च शून्य (₹0) हो जाता है।
- आवेदन कैसे करें? (स्टेप-बाय-स्टेप प्रक्रिया)
एक गरीब और ग्रामीण पृष्ठभूमि का छात्र इस प्रक्रिया को इन चरणों में पूरा कर सकता है
स्टेप 1
भाषा और पात्रता परीक्षा की तैयारी (IELTS/TOEFL/GRE/GMAT)
विदेशों में पढ़ाई के लिए अंग्रेजी भाषा की पकड़ जरूरी है।
इसके लिए निःशुल्क ऑनलाइन सामग्री या यूट्यूब की मदद से तैयारी करें और परीक्षा पास करें।
स्टेप 2
विश्वविद्यालय का चयन और आवेदन
दुनिया के शीर्ष विश्वविद्यालयों (जो RGS के लिए टॉप 150 या NOS के लिए टॉप 500 की सूची में हों) की वेबसाइट पर जाकर ऑनलाइन आवेदन करें।
यदि आपकी प्रोफाइल अच्छी है, तो यूनिवर्सिटी आपको “Unconditional Offer Letter” (प्रवेश पत्र) जारी करेगी।
याद रखें, स्कॉलरशिप के लिए आवेदन करने से पहले यूनिवर्सिटी का एडमिशन लेटर होना पहली शर्त है।
स्टेप 3
सरकारी पोर्टल पर आवेदन
राजस्थान की RGS योजना के लिए SSO Portal (rajsso.rajasthan.gov.in) के माध्यम से उच्च शिक्षा विभाग के लिंक पर आवेदन करें।
भारत सरकार की NOS योजना के लिए संबंधित मंत्रालय (Social Justice/Tribal Affairs) के राष्ट्रीय स्कॉलरशिप पोर्टल (nosmsje.gov.in) पर ऑनलाइन फॉर्म भरें।
स्टेप 4
दस्तावेजों का सत्यापन
आय प्रमाण पत्र (तहसीलदार द्वारा जारी), जाति प्रमाण पत्र, मूल निवास, जन आधार/आधार नंबर, शैक्षणिक दस्तावेज और यूनिवर्सिटी का ऑफर लेटर अपलोड करें।
स्टेप 5
स्वीकृति और प्रस्थान
दस्तावेज सही पाए जाने पर सरकार द्वारा स्कॉलरशिप स्वीकृति पत्र (Award Letter) जारी किया जाता है।
इसके आधार पर वीजा आसानी से मिल जाता है और आप विदेश यात्रा के लिए तैयार हो जाते हैं।
- प्रायः पूछे जाने वाले पूरक प्रश्न (FAQs) – आम आदमी के लिए समाधान
प्रश्न 1: क्या सरकारी स्कूल या हिंदी माध्यम से पढ़ा हुआ विद्यार्थी भी विदेश जा सकता है?
उत्तर: बिल्कुल जा सकता है।
विदेशी विश्वविद्यालयों को आपके ज्ञान, मेहनत और लगन से मतलब होता है, इस बात से नहीं कि आपकी स्कूली शिक्षा कहाँ से हुई।
आपको बस अंग्रेजी भाषा की प्रवेश परीक्षा (जैसे IELTS) पास करनी होगी, जो अभ्यास से आसानी से संभव है।
प्रश्न 2: क्या आवेदन करने के लिए कोई फीस देनी होती है?
उत्तर: सरकारी स्कॉलरशिप पोर्टल्स पर आवेदन पूरी तरह निःशुल्क होता है।
हालांकि, विदेशी विश्वविद्यालयों में आवेदन करते समय कुछ प्रोसेसिंग फीस लग सकती है, जिसके लिए कई बार यूनिवर्सिटीज गरीब छात्रों की प्रार्थना पर फीस माफ
(Fee Waiver) भी कर देती हैं।
प्रश्न 3: यदि आय प्रमाण पत्र में थोड़ी भी गड़बड़ी हो तो क्या होगा?
उत्तर: आय और जाति प्रमाण पत्र पूरी तरह वैध, डिजिटल हस्ताक्षरित और नवीनतम होने चाहिए।
यदि इनमें कोई विसंगति पाई जाती है, तो आवेदन तुरंत निरस्त हो जाता है। अतः इसे पहले से ही सही बनवा कर रखें।
प्रश्न 4: क्या स्कॉलरशिप का पैसा सीधे विद्यार्थी के खाते में आता है?
उत्तर: शिक्षण शुल्क (Tuition Fee) सीधे संबंधित विदेशी विश्वविद्यालय के बैंक खाते में सरकार द्वारा जमा कराया जाता है।
रहने-खाने और भत्ते का पैसा विद्यार्थी के विदेशी बैंक खाते में किश्तों में ट्रांसफर किया जाता है।
- प्रेरणा संदेश: उठो, जागो और आसमान छुओ!
प्यारे नौजवानों, गरीबी केवल एक सामाजिक और आर्थिक स्थिति है, यह तुम्हारी बुद्धिमत्ता या तुम्हारे सपनों की सीमा तय नहीं कर सकती।
बाबासाहेब डॉ. अंबेडकर भी एक अत्यंत साधारण और वंचित पृष्ठभूमि से निकलकर बड़ौदा नरेश की छात्रवृत्ति के बदौलत कोलंबिया विश्वविद्यालय और लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स पढ़ने गए थे।
उन्होंने साबित किया कि ज्ञान ही सबसे बड़ा हथियार है।
आज सरकारें आपके द्वार पर खड़ी हैं, बस आपको अपनी आँखें खोलनी हैं, जानकारी जुटानी है, और सही दिशा में प्रयास करना है।
अपनी कमियों को अपनी कमजोरी नहीं, अपनी ताकत बनाओ।
गांवों की गलियों से निकलकर दुनिया के सबसे बड़े मंचों पर अपनी उपस्थिति दर्ज कराओ।
तुम सिर्फ अपना नहीं, बल्कि पूरे समाज और राष्ट्र का भविष्य बदलने की क्षमता रखते हो।
डिस्क्लेमर (Disclaimer)
अस्वीकरण
यह लेख केवल सामान्य सूचनात्मक और शैक्षणिक उद्देश्यों के लिए तैयार किया गया है।
भारत सरकार और राजस्थान सरकार की स्कॉलरशिप योजनाओं के नियम, पात्रता मानदंड, चिन्हित विश्वविद्यालयों की सूची (QS वर्ल्ड रैंकिंग), स्वीकृत पाठ्यक्रमों, आय सीमा और बजट प्रावधानों में समय-समय पर संशोधन और परिवर्तन किए जाते रहते हैं।
नवीनतम, सटीक और आधिकारिक जानकारी के लिए कृपया संबंधित विभागों की आधिकारिक वेबसाइटों (जैसे राजस्थान उच्च शिक्षा विभाग, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय, जनजातीय कार्य मंत्रालय के आधिकारिक पोर्टल) का अवश्य अवलोकन करें।
किसी भी तकनीकी या कानूनी विसंगति की स्थिति में सरकारी दिशानिर्देश ही अंतिम रूप से मान्य होंगे।

लेखक-मार्गदर्शक
(संकलन एवं प्रस्तुति)
सोहन लाल सिंगारिया
प्राचार्य (RES)
सामाजिक-आर्थिक चिन्तक
एवं विचारक ब्यावर, राजस्थान-94622-60179
