“इंसान खिलौना है समय की मुट्ठी में कैदबस इत्ती सी हमारी हैसियत हम में गुरूर हजार।”

इंसान खिलौना है समय की मुट्ठी में कैद! 1:जीवन का सबसे बड़ा सच यह है कि इंसान समय के जाल में फँसा हुआ है। वह अपने जीवन के अधिकांश क्षणों…

“कोई सस्ता सा इलाज बताना ग़ालिब …गरीब को इश्क हुआ है महंगाई के दौर में।”

गरीब को इश्क़ (प्यार) हुआ है, और यह इश्क़ केवल दिल का नहीं, बल्कि आत्मा का है। इस इश्क़ में वह माशूक़ (प्रिय) नहीं, बल्कि परवरदिगार है। उसकी आँखों में…

“काग़ज़ रोता नहीं है बल्कि इंसान को रुला देता है,फ़िर चाहे प्रेमपत्र हो या रिजल्ट या फ़िर मेडिकल रिपोर्ट!”

काग़ज़ निर्जीव है। उसमें न धड़कन है, न आँसू, न कोई आवाज़। फिर भी वही काग़ज़ कभी किसी के चेहरे पर मुस्कान ला देता है, तो कभी किसी की आँखों…

“सुना है तुम तक़दीर देखने का हुनर रखते हो,मेरा हाथ देखकर बताना की पहले तुम आओगे या मौत !!”

*यह शेर पहली नज़र में एक प्रेमी की बेचैनी जैसा प्रतीत होता है, लेकिन इसकी परतें कहीं अधिक गहरी हैं। यहाँ केवल प्रेम की तड़प नहीं, बल्कि जीवन और मृत्यु…

“बेकार ज़ाया किया वक़्त किताबों में…सारे सबक तो कमबख़्त ठोकरों से मिले हैं…!”

*यह पंक्ति पहली नज़र में किताबों के विरुद्ध एक विद्रोह-सी लगती है। मानो जीवन का सारा ज्ञान पुस्तकालयों में नहीं, बल्कि पथरीली राहों पर बिखरा पड़ा हो। पर जब हम…

​​भारतीय समाज व्यवस्था, विरोध और वैचारिक क्रांति

यह एक अत्यंत गंभीर और बहुआयामी विषय है, भारतीय समाज का इतिहास केवल राजाओं और युद्धों का इतिहास नहीं है, बल्कि यह विचारों के टकराव, व्यवस्था के निर्माण और उस…

​पुनर्जन्म और भाग्यवाद मानसिक गुलामी की बेड़ियां और सामाजिक षड्यंत्र

प्रस्तावनावैचारिक दासता का मूल आधार​”अनत्तो पाकपा निरिस्सरो”यह बुद्ध धम्म और मानवतावादी दर्शन का वह सार है जो उदघोष करता है, कि यह संसार किसी अदृश्य ईश्वर या अलौकिक शक्ति द्वारा…

“खालिक की रज़ा में रहती है रज़ा मेरी,दुनियाँ तेरा तमाशा हम देख चुके है..!!”

खालिक की रज़ा में रज़ामंदी — समर्पण, विरक्ति और जीवन-अनुभव की पूर्ण आध्यात्मिक यात्रा। *यह शेर केवल दो पंक्तियों का काव्य नहीं, बल्कि जीवन के दीर्घ अनुभवों, टूटनों, साधना और…

“वंचित समाज में आर्थिक असुरक्षा और वैवाहिक रिश्तों की डगमगाती बुनियाद का कठोर सच!”

भूमिका भारतीय समाज में विवाह केवल दो व्यक्तियों का नहीं, बल्कि दो परिवारों का संबंध माना जाता है। यह रिश्ता भरोसे, सम्मान और आपसी इज्जत (सम्मान) पर टिका होता है।…

“सलीका़ सादगी सब आज़मा कर समझ आया,बहुत नुकसान होता है अदब से पेश आने में..!”

*यह पंक्ति केवल शिकायत नहीं, बल्कि जीवनानुभव की कसक है। जब कोई व्यक्ति सलीक़े, सादगी और अदब को अपना जीवन-मंत्र बना लेता है, तो वह यह मानकर चलता है कि…