महाड़ सत्याग्रह, दो घूंट पानी की प्यास नहीं, मानवीय गरिमा का ऐतिहासिक शंखनाद
लेखकसोहनलाल सिंगारियासामाजिक चिंतक एवं विश्लेषक > डिस्क्लेमरइस लेख में व्यक्त विचार लेखक के निजी, सामाजिक और दार्शनिक विश्लेषण पर आधारित हैं। इनका लेखक के पद या विभाग, या शासकीय कर्तव्यों…
“रणनीतिक स्वायत्तता का भ्रम: सबके साथ दोस्ती की नीति, लेकिन कहीं भी भारत का प्रभाव नहीं!?”
भूमिकाआधुनिक वैश्विक राजनीति में हर देश अपनी सुरक्षा, आर्थिक हितों और कूटनीतिक प्रभाव को मजबूत करने के लिए नई-नई रणनीतियाँ बनाता है। भारत ने भी पिछले एक दशक में अपनी…
“चिता के कोयले पर सिकती रोटियाँ: गैस संकट में गिरती इंसानियत और मरती सामाजिक संवेदनाएँ!?”
सरकार पहले से कहती रही है कि देश में रसोई गैस की कोई कमी नहीं है और कमी की बात केवल अफ़वाह है। लेकिन यदि ऐसी घटनाएँ सामने आती हैं…
रा. से. यो. से विद्यार्थी का सर्वांगीण विकास होता हैं – बेनीवाल
बाड़मेर – राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय चवा, बाड़मेर ग्रामीण में राष्ट्रीय सेवा योजना के सात दिवसीय शिविर के अन्तिम दिन में प्रथम सत्र में प्रातःकाल व्यायाम एवं प्रार्थना के बाद…
समता सैनिक दल ने महाड़ तालाब सत्याग्रह आन्दोलन दिवस मनाया
नागौर। समता सैनिक दल जिला शाखा डीडवाना -कुचामन के तत्वावधान में आज दिनांक 20 मार्च 2026 शुक्रवार को दल के मकराना स्थित कार्यालय में महाड तालाब सत्याग्रह आंदोलन दिवस मनाया…
सामाजिक संगठनों द्वारा डॉ. मनोहर कुमार बालाच एवं जीवन कुलदीप का किया सम्मान
बाड़मेर। डा. अम्बेडकर मेमोरियल वैलफेपर सोसायटी जिला शाखा बाड़मेर के तत्वाधान में राजस्थान मेघवाल परिषद बाडमेर एवं समाज के विभिन्न संगठनों द्वारा बाडमेर जिले के सेड़वा ब्लॉक के पूंजासर निवासी…
सामाजिक संगठनों द्वारा डॉ. मनोहर कुमार बालाच एवं जीवन कुलदीप का किया सम्मान
बाड़मेर। डा. अम्बेडकर मेमोरियल वैलफेपर सोसायटी जिला शाखा बाड़मेर के तत्वाधान में राजस्थान मेघवाल परिषद बाडमेर एवं समाज के विभिन्न संगठनों द्वारा बाडमेर जिले के सेड़वा ब्लॉक के पूंजासर निवासी…
“कुछ तो सबर कर ऐ जिन्दगी,वंचित को थोड़ा संवर जाने दे,तेरा अगला जख्म भी सह लेगा,पहले का तो भर जाने दे..।”
(1)भारतीय समाज की संरचना में वंचित समुदाय की पीड़ा किसी छिपी हुई कहानी नहीं, बल्कि खुली हुई सच्चाई है। सदियों पुरानी जातिगत व्यवस्था ने उनके जीवन को इस तरह जकड़…
“वंचित समाज का बेटा उम्र से पहले ही समझदार हो जाता है..! क्योंकि हालात के खिलौने जिम्मेदारियों में बदल जाते हैं हैं..!””
1:भारत के विशाल सामाजिक ढांचे में ऐसे लाखों बच्चे हैं जो बचपन में ही जीवन की कठोर सच्चाइयों से रूबरू हो जाते हैं। वंचित समाज का बेटा अक्सर उम्र से…
वैचारिक भटकाव बनाम वास्तविक अम्बेडकरवाद: कृतज्ञता या पाखण्ड?
इतिहास केवल तारीखों का संकलन नहीं होता, बल्कि उन क्रांतियों का गवाह होता है, जिन्होंने मानवता को दासता की बेड़ियों से मुक्त किया।डॉ. बी.आर. अम्बेडकर का संपूर्ण जीवन ऐसी ही…
