
• जागो हुक्मरान न्यूज
जैसे-जैसे समय बीतता है और उसके साथ ही बहुत सारे बदलाव देखने को मिलते हैं। आजादी के बाद भारतीय समाज में भी बहुत सारे बदलाव आए हैं। जहाँ पहले महिलाओं व शूद्र वर्ग (SC, ST, OBC) को शिक्षा व समानता का अधिकार नहीं था। वहीं आज सबको न्याय,समानता,स्वतंत्रता व बन्धुता का अधिकार है। लोकतंत्र में सबसे बड़ा अधिकार वोट का अधिकार है। जिसमें किसी जाति,धर्म,व्यक्ति विशेष को अलग से कोई दर्जा प्राप्त नहीं है। आम भारतीय नागरिक को (स्त्री-पुरुष-थर्ड जेंडर) जो 18 वर्ष से अधिक आयु के है उन्हें एक वोट देने का अधिकार है। इस एक वोट से ही संघ व राज्यों की सरकार बनती है। हर व्यक्ति को सोच-समझकर अपने मताधिकार का प्रयोग करना चाहिए। 6-14 आयुवर्ग के बालक-बालिकाओं को सरकार द्वारा निःशुल्क व अनिवार्य शिक्षा प्रदान की जा रही है। ऐसे में समाज के सभी वर्गों को चाहिए कि वे अपने बच्चों को शिक्षा ग्रहण करवाएं। वर्तमान में सारा कार्य मशीनों से हो रहा है। अतः हमें चाहिए कि शिक्षा अध्ययन के बाद अपने बच्चे मशीनों की मरम्मत, उसे इस्तेमाल करने की तकनीकी आदि जानकारी रखें। जिससे कि उन्हें रोजगार में मदद मिल सके। मशीनें मुख्य रूप से दो प्रकार की होती है-हार्डवेयर व सॉफ्टवेयर। बस,ट्रक,ऑटो,जेसीबी,पत्थर काटने वाली मशीनें, कृषि कार्य में काम आने वाली मशीनें,सड़क-पुल-भवन निर्माण में काम आने वाली मशीनें आदि हार्डवेयर के अंतर्गत आते हैं तो कम्प्यूटर,मोबाईल, घड़ी,कैमरा,टीवी.प्रिंटर आदि सॉफ्टवेयर है। इसके अलावा भी बिजली फिटिंग,सेनेट्री,पेंटिंग,सिलाई आदि कार्य भी है जिनकी सभी आवश्यकता होती है। ऐसे में समय-समय पर बहुत सारे बदलाव होते रहते हैं और जो समाज समय के साथ बदलाव कर लेता है वह हमेशा ही सुखी व सम्पन्न रहता है। आज के समय के हिसाब से हमें अपने व्यवसाय का निर्धारण करना चाहिए ताकि हमें बिना कठोर परिश्रम किए अधिक आमदनी हो सके। आजकल चारों तरफ फिजूलखर्ची बढ़ रही है, ऐसे में हमें अपने अस्तित्व को बचाए रखने के लिए अपनी आय बढ़ानी होगी। इसके साथ ही नशा-प्रवृत्ति को तिलांजलि देनी होगी, अपने आचार-विचार,रहन-सहन,व्यवहार आदि में परिवर्तन लाना होगा। हमें पुरानी रूढ़िवादी परम्पराओं व कुरीतियों को त्यागना होगा। अगर हम लोग अपने जीवन को सहज व सरल बनाने का प्रयास करेंगे तो निःसन्देह हम लोग समय के बहुत नजदीक होंगे। लेकिन अगर हमने समय को नहीं पहचाना तो वह हमसे बहुत दूर निकल जायेगा और हम लोग उसे पकड़ नहीं पाएंगे। इसका नतीजा यह होगा कि समाज में बेकारी, भुखमरी,अशिक्षा,कुपोषण,पारिवारिक बिखराव,आपसी विवाद आदि बढ़ जाएंगे। अन्य लोग हमारी कमजोरी का फायदा उठाकर हमें सड़कों पर भीख मांगने के लिए मजबूर कर देंगे। समाज में आत्म हत्याएं,चोरी,व्यभिचार,नशे की बुरी लत आदि नवीन बीमारियों जन्म ले लेगी। अतः हमें चाहिए कि हम लोगों को समय के साथ बदलाव कर लेना चाहिए। लेकिन यह एकदम आसान भी नहीं है,इसके लिए जन-जागृति लानी होगी तथा शिक्षा पर जोर देना होगा। बालिकाओं को शत प्रतिशत शिक्षित करने का संकल्प लेना होगा।
लेखक: मास्टर भोमाराम बोस, बालोतरा 9829236009
