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महोत्सव अमृत आजादी का,
आओ गौरव गान करे ।
अमर शहीदों की कुर्बानी
अंर्तमन में ध्यान धरे ।।
सन अठारह सौ सत्तावन में,
चिंगारी सी एक फूटी।
मेरठ सैनिक छावनी में,
मंगल पांडे की थी डयूटी।।
मातादीन के मन की बात से,
हुआ था आक्रोश भारी ।
मंगल पांडे ने सैनिक अफसर को,
वहाँ सरेआम गोली मारी ।।
महोत्सव अमृत आजादी का
आओ गौरव गान करे……..
झांसी रानी लक्ष्मीबाई,
फिरंगियों पर थी टूटी ।
बूंदेले हर बोलो के मुंह,
बनी कहानी थी अनूठी।।
झलकारी बाई ने अपना ,
साहस अदम्य दिखाया था।
डलहौज़ी के सैनिकों को,
खूब मजा चखाया था ।।
राजपूताना की धरती पर,
आउवा में क्रांति तगडी ।
ठाकुर कुशाल सिंह जी ने,
संभाली नेतृत्व की कडी।।
महोत्सव अमृत आजादी का
आओ गौरव गान करे…….
अंग्रेज पॉलिटिकल एजेंट,
मोक मैशन का सिर काटा ।
आउवा की प्रवेश पोल पर,
कटा सिर दिया था लटका ।।
चिंगारी वो सुलग सुलग,
एक दिन ही ज्वाला भडकी ।
कुर्बानी अनगिनत फिर तो,
एक से एक बढ़ नहीं रूकी ।।
जलियांवाला बाग कांड सा,
नरसंहार नृशंस हुआ ।
अफसर जनरल डायर ने,
निहत्थो पर फायर किया।।
महोत्सव अमृत आजादी का
आओ गौरव गान करे……
बाग कांड का बदला लेने,
हिन्द सिपाही नहीं रूके।
उसे मारने लंदन तक भी,
वीर उधमसिंह नहीं चूके ।।
काकौरी और चौरी -चौरा,
राह आजादी की कडी ।
अनेक कुर्बानिया देकर,
मशाल जलाई गई बडी।।
चन्द्रशेखर और सुभाष चन्द्र जी,
एक आजाद, एक नेताजी ।
वतन से गुलामी उखाड फेंकने,
क्रांतिकारी कहानी उनकी ।।
महोत्सव अमृत आजादी का
आओ गौरव गान करे……
सिंगापुर में नेताजी नें ,
‘आजाद हिंद’ फौज गढी।
अल्फ्रेड बाग की कुर्बानी,
आजादी में बहुत बडी।।
लाला लाजपत लाहौर में,
आजादी पथ लाठी झेले।
भगतसिंह ,सुखदेव, राजगुरू,
बदला लेने को निकले।।
बदला लेने उनकी मौत का,
लाहौर तक की भी सोचे ।
साण्डर्स को गोली से उडाकर,
बदला असली ले पहुंचे ।।
महोत्सव अमृत आजादी का
आओ गौरव गान करे…..
भगतसिंह, बटुकेश्वर दत्त ने,
दिल्ली कांउसिल में बम फेंका।
रंग दे बंसती शोला गाकर,
हंसकर फांसी फंदा देखा ।।
गांधीजी जब अफ्रीका से,
छोड बैरिस्टरी देश आये ।
सत्य और अंहिसा हथियार,
राह आजादी आजमाएं।।
कभी सविनय अवज्ञा तो ,
कभी असहयोग किया ।
आंदोलन दर आंदोलन फिर,
अनशन और उपवास किया ।।
महोत्सव अमृत आजादी का
आओ गौरव गान करे…..
सन सैतालीस को अंग्रेज,
आखिर झूके सहमत हुए।
तिरंगा फहराया वतन में,
वे देश छोड रूखस्त हुए।।
बाबा साहब भीमराव ने,
वतन विधान को रूप दिया।
उसी विधान से भारत का यह,
लोकतंत्र मजबूत हुआ।।
तिरंगे की आन बान पर ,
तन, मन, धन हैं न्यौछावर।
‘मनहंस’ घर घर हो तिरंगा,
तिरंगा तो धडके दिल हर।।
महोत्सव अमृत आजादी
आओ गौरव गान करे……
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जय भारत जय भीम जय संविधान
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डॉ.मोहनलाल सोनल ‘मनहंस’
फतापुरा रानी पाली राजस्थान
9929053911
