बाड़मेर। दिव्यांगों के प्रणेता एवं संघर्षशील व्यक्तित्व के धनी सेवानिवृत प्रशासनिक अधिकारी दुर्गाराम लहुआ हमारे बीच नहीं रहो
बाड़मेर जिले के सूदूर गाँव झाख में जन्में एक भाई ओर छः बहनों में शारीरिक रूप से अक्षमत होते हुवें कभी अपनी कमजोरी को कभी आगे नहीं लाते हुवे हमेशा सकारात्मक सोच के साथ हर किसी को आगे बढने का सन्देश दिया। प्रेतृक गाँव मे प्रारम्भिक शिक्षा के बाद 15 किमी दूर भीमड़ा गाँव मे रहकर उच्च प्राथमिक शिक्षा ग्रहण की । तत्तपश्चात बाड़मेर शहर में उच्च शिक्षा ग्रहण की।


इसी दौरान तत्कालीन जिला कलेक्टर सोहनलाल सांसी से मुलाकात कर सरकारी सेवा में नियुक्ति देने का निवेदन किया जहाँ उन्होंने इनके होसले ओर इमानदारी को देखते हुवे हातोहाथ जिलाकलेक्टर कार्यालय में लिपिक के पद पर नियुक्ति दे दी गई । सरकारी सेवा के बाद इनका विवाह कानासर गाँव निवासी पेमाराम मेघवाल की सुपुत्री शान्ति देवी से विवाह हुआ जिनसे एक बेटा ओर दो बेटिया है ।
सन् 2022 में प्रशासनिक अधिकारी के पद से सेवा निवृति के बाद अम्बेडकर कॉलानी बाड़मेर में प्लॉट लेकर निजी आवास बनाकर परिवार के साथ रह रहे थै। पिछले एक वर्ष से शुगर और बीपी की बिमारी के चलते इलाज के दौरान 16 जून को अन्तिम साँस ली।


हलाँकी दुर्गाराम जी आज हमारे बीच नहीं हैं लेकिन उनकी यादे, कार्य ओर प्रेरणा हर किसी के जहन में याद रहेगी। भीमड़ा गाँव मेरे सेवाकाल के समय कक्षा 6से 8वी तक मेरे शिष्प रहे मैने हमेशा इन्हें आगे बढ़ने ओर बड़ा आदमी बनने के लिए प्रोत्साहित किया इन्होंने अपनी शारीरिक अक्षमता को नकार कर दिव्यांगों के लिए प्रेरणा बने ।
ऐसे संघर्षील व्यक्तित्व के धनी दिवंगत दुर्गाराम लहुआ को विनम्र सादर श्रद्धांजलि अर्पित करता हूँ।
तगाराम खती, जिलाध्यक्ष राजस्थान मेघवाल परिषद बाडमेर

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