लेखक (संकलन एवं प्रस्तुति) सोहनलाल सिंगारिया

जिसकी जितनी जमीन, उसका उतना सम्मान; जब सुरक्षित होगा अधिकार, तभी बढ़ेगा बहुजन का स्वाभिमान।

21वीं सदी के इस आधुनिक दौर में वही समाज प्रगति के पथ पर अग्रसर हो सकता है, जो तकनीकी रूप से जागरूक और अपने अधिकारों के प्रति सचेत है।

राजस्थान सरकार के स्वायत्त शासन विभाग द्वारा संचालित नक्शा पायलेट प्रोजेक्ट केवल जमीनों और संपत्तियों को नापने का एक प्रशासनिक अभियान नहीं है, बल्कि यह हाशिए पर खड़े बहुजन समाज के लिए अपनी सदियों पुरानी संपत्तियों को कानूनी सुरक्षा देने और आर्थिक मुख्यधारा में शामिल होने का एक ऐतिहासिक डिजिटल अवसर है।

अक्सर सूचना के अभाव और तकनीकी अज्ञानता के कारण हमारा बहुजन समाज अपने अधिकारों से वंचित रह जाता है।

आइए, इस लेख के माध्यम से इस क्रांतिकारी प्रोजेक्ट को गहराई से समझें और अपने सामाजिक-आर्थिक भविष्य को सुरक्षित करने का संकल्प लें।

क्या है ‘नक्शा प्रोजेक्ट’ और क्यों है यह हमारे लिए जीवन-मरण का प्रश्न?

सरल शब्दों में कहें तो यह प्रोजेक्ट शहरों के भीतर संपत्तियों का एक अचूक डिजिटल और वैज्ञानिक रिकॉर्ड तैयार करने का महा-अभियान है, जिसे हम “शहरी जमाबंदी” या अधिकार अभिलेख कह सकते हैं।

ग्रामीण क्षेत्रों में तो जमीनों का रिकॉर्ड (खसरा-खतौनी) फिर भी व्यवस्थित होता है, लेकिन शहरों में रहने वाले हमारे बहुजन भाई-बहनों के पास अक्सर अपनी जमीन या मकान के पुख्ता और डिजिटल दस्तावेज नहीं होते।

इसी कमी का फायदा उठाकर भू-माफिया और रसूखदार लोग गरीबों की जमीनों पर गिद्ध नजर गड़ाए रहते हैं।

‘नक्शा प्रोजेक्ट’ के तहत ब्यावर सहित राजस्थान के कई महत्वपूर्ण शहरों जैसे किशनगढ़, जैसलमेर, पुष्कर, बहरोड़, भिवाड़ी आदि में हर एक मकान, दुकान और भूखंड का डिजिटल डेटाबेस तैयार किया जा रहा है।

यह तकनीक हमारे समाज की संपत्ति को एक ऐसी सुरक्षा ढाल प्रदान करेगी जिसे कोई हिला नहीं सकेगा।

सशक्तिकरण का तकनीकी ढांचा कैसे हो रहा है काम?

इस प्रोजेक्ट के तहत प्रशासनिक और तकनीकी स्तर पर जो व्यवस्थाएं की गई हैं, उन्हें समझना हर नागरिक के लिए बेहद जरूरी है ताकि कोई भी आपको गुमराह न कर सके:

  1. सेक्टर और सटीक वैज्ञानिक मैपिंग

पूरे शहर को छोटे-छोटे हिस्सों में बांटा जा रहा है जिन्हें ‘सेक्टर’ कहा जाता है।

इन सेक्टरों का निर्धारण प्रमुख सड़कों के जाल के आधार पर किया जा रहा है।

सबसे खास बात यह है कि नक्शे में आपके मकान या भूखंड को एक बंद ज्यामितीय आकृति के रूप में दर्शाया जाता है जिसे ‘पॉलीगॉन’ कहते हैं।

हर सेक्टर में इन पॉलीगॉन को 0001 से शुरू करके एक विशेष ‘ज़िग-ज़ैग पैटर्न’ (उत्तर-पूर्व से दक्षिण-पश्चिम कोने तक) में नंबर दिए जा रहे हैं।

इस वैज्ञानिक पद्धति से आपकी संपत्ति की एक-एक इंच जगह हमेशा के लिए सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज हो जाएगी।

  1. दो महत्वपूर्ण पंजिकाएं हमारी सुरक्षा का आधार
    इस प्रोजेक्ट के तहत सरकार दो तरह के रजिस्टर तैयार कर रही है जो हमारे समाज के लिए सबसे ज्यादा मायने रखते हैं

शहरी सम्पत्ति अभिलेख
यह उन भाई-बहनों के लिए है जिनके पास वैध पट्टे या रजिस्ट्री हैं।

यह रिकार्ड आपके मालिकाना हक का सबसे बड़ा कानूनी दस्तावेज बनेगा।

अनाधिकृत आवास पंजिका
बहुजन समाज का एक बड़ा हिस्सा तकनीकी अज्ञानता या प्रशासनिक जटिलताओं के कारण कृषि भूमि पर बसी कच्ची बस्तियों, बिना पट्टे के मकानों या ऐसी जमीनों पर रहता आया है, जिनके पट्टे किसी कारणवश जारी नहीं हो पाए।

ध्यान दें! इस प्रोजेक्ट के तहत सरकार ऐसी सभी संपत्तियों का भी ‘पॉलीगॉन’ (नक्शा) बना रही है और उनका विवरण इस विशेष रजिस्टर में दर्ज कर रही है।

यह इस बात का पहला आधिकारिक प्रमाण होगा कि आप उस जमीन पर काबिज हैं, जो भविष्य में आपको पट्टा दिलाने का मुख्य आधार बनेगा।

बहुजन समाज के लिए इस प्रोजेक्ट के आर्थिक एवं सामाजिक मायने
एक सामाजिक-आर्थिक चिन्तक के रूप में मेरा यह दृढ़ मानना है कि जब तक किसी समाज के पास अपनी संपत्ति का कानूनी और डिजिटल अधिकार नहीं होता, तब तक उसका आर्थिक उत्थान असंभव है।

इस प्रोजेक्ट से हमें निम्नलिखित अभूतपूर्व लाभ मिलेंगे

भू-माफियाओं और विवादों से मुक्ति
डिजिटल जीपीएस (Latitude-Longitude)
मैपिंग के कारण कोई भी आपकी जमीन पर अवैध कब्जा नहीं कर पाएगा और न ही सीमाओं का कोई विवाद रहेगा।

आर्थिक समृद्धि के द्वार (पूंजी का सृजन)
जब आपके पास ‘शहरी सम्पत्ति कार्ड’ होगा, तब आप अपने व्यापार, बच्चों की उच्च शिक्षा या अन्य जरूरतों के लिए बैंकों से आसानी से और कम ब्याज पर लोन (ऋण) ले सकेंगे।

बिना वैध कागजों के हमारा समाज आज भी स्थानीय साहूकारों के चंगुल में फंसकर आर्थिक रूप से बर्बाद हो जाता है।

सरकारी योजनाओं का सीधा लाभ
इस डिजिटल डेटा के आधार पर भविष्य में सरकार द्वारा दी जाने वाली विभिन्न आवास और कल्याणकारी योजनाओं का लाभ सीधे आप तक पहुंचेगा।

हमारा कर्तव्य: बहुजन समाज के नाम एक मार्मिक अपील

मेरे प्रिय भाइयों और बहनों, ब्यावर नगर परिषद क्षेत्र में लगभग पिछले 6 माह से में 25 टीमें इस कार्य में मुस्तैद हैं और प्रतिदिन 750 संपत्तियों का भौतिक सत्यापन कर रही हैं।

एक सजग और जागरूक समाज होने के नाते हमारा यह परम कर्तव्य है कि हम इस प्रक्रिया में बढ़-चढ़कर हिस्सा लें

सजग रहें, सक्रिय रहें
जब भी सर्वे टीम आपके वार्ड या मोहल्ले में आए, तो अपनी दैनिक मजदूरी या काम को कुछ समय के लिए विराम देकर अपने मकान पर उपस्थित रहें।

सही दस्तावेज और जानकारी दें
सर्वे टीम को अपने मकान के चारों कोनों के जीपीएस पॉइंट लेने में सहयोग करें।

अपना आधार कार्ड, पट्टा, रजिस्ट्री या जो भी पुराना कागज आपके पास उपलब्ध हो, उसे टीम को दिखाएं और सही-सही विवरण दर्ज करवाएं।

सत्यापन अवश्य करें
आपके मकान की फोटो और विवरण दर्ज करते समय यह सुनिश्चित करें कि आपका नाम, वार्ड संख्या और कॉलोनी का नाम बिल्कुल सही और त्रुटिहीन भरा गया है, क्योंकि एक छोटी सी लापरवाही भविष्य में बड़ी समस्या बन सकती है।

सामूहिक जागरूकता फैलाएं
अपने आस-पास के अशिक्षित, बुजुर्ग या कमजोर भाई-बहनों की मदद करें।

उन्हें इस योजना के महत्व के बारे में समझाएं ताकि बहुजन समाज का एक भी व्यक्ति इस सर्वे से छूट न पाए।

निष्कर्ष
‘नक्शा पायलेट प्रोजेक्ट’
हमारे समाज को अंधकार से प्रकाश की ओर, और अनिश्चितता से कानूनी सुरक्षा की ओर ले जाने वाला एक मील का पत्थर है।

बाबासाहेब डॉ. बी.आर. अम्बेडकर ने कहा था—”शिक्षित बनो, संगठित रहो, संघर्ष करो।

आज के इस डिजिटल युग में ‘शिक्षित’ होने का अर्थ ‘तकनीकी रूप से जागरूक’ होना भी है।

आइए, हम सब मिलकर इस डिजिटल महा-अभियान का हिस्सा बनें, अपनी संपत्ति के अधिकारों को सुरक्षित करें, और एक सुदृढ़, आत्मनिर्भर तथा आर्थिक रूप से सशक्त बहुजन समाज के निर्माण में अपना अमूल्य योगदान दें।

लेखक (संकलन एवम प्रस्तुति)
सोहन लाल सिंगारिया
सामाजिक-आर्थिक चिन्तक
एवं विचारक ब्यावर राजस्थान- 94622-60179

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