प्रयागराज । हिंदी साहित्य सम्मेलन प्रयाग के राजर्षि टंडन मंडपम् में हिंदी साहित्य सम्मेलन के उन्नायक एवं पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. प्रभात शास्त्री की 108वीं जयंती श्रद्धापूर्वक मनाई गई। समारोह के मुख्य अतिथि जगद्गुरु रामानंदाचार्य राजस्थान संस्कृत विश्वविद्यालय, जयपुर के पूर्व कुलपति प्रो. रामसेवक दुबे रहे। कार्यक्रम का शुभारंभ हिंदी साहित्य सम्मेलन के प्रधानमंत्री कुन्तक मिश्र एवं अन्य विद्वानों द्वारा डॉ. प्रभात शास्त्री के चित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। तत्पश्चात सौदामिनी संस्कृत महाविद्यालय के बटुकों द्वारा स्वस्तिवाचन प्रस्तुत किया गया।

इस गरिमामय अवसर पर राजकीय लोहिया महाविद्यालय, चूरू (राजस्थान) के संस्कृत विभागाध्यक्ष एवं प्रोफेसर डॉ. मूलचन्द को संस्कृत भाषा एवं साहित्य के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान हेतु “संस्कृत महामहोपाध्याय” की मानद उपाधि से अलंकृत किया गया। यह सम्मान संपूर्ण राजस्थान एवं संस्कृत जगत के लिए गौरव का विषय है।
अपने उद्बोधन में प्रो. डॉ. मूलचन्द ने कहा—
“संस्कृत ने मां का दायित्व निभाते हुए हमें ज्ञान एवं संस्कार प्रदान किए हैं, जबकि हिंदी बेटी का धर्म निभाते हुए उस गौरवशाली विरासत को जन-जन तक पहुंचा रही है।”
ज्ञातव्य है कि प्रो. डॉ. मूलचन्द इससे पूर्व भी राजस्थान सरकार द्वारा सम्मानित हो चुके हैं। उनकी इस उपलब्धि से चूरू सहित संपूर्ण राजस्थान एवं संस्कृत अनुरागियों में हर्ष की लहर व्याप्त है।
समारोह में प्रो. हरिनारायण दुबे, प्रो. रामकिशोर शर्मा सहित अनेक विद्वानों ने डॉ. प्रभात शास्त्री के साहित्यिक एवं सांस्कृतिक अवदान पर प्रकाश डाला। मुख्य अतिथि प्रो. रामसेवक दुबे ने उन्हें “सरस्वती के वरदपुत्र” की संज्ञा देते हुए कहा कि उनका साहित्यिक अवदान सदैव स्मरणीय रहेगा।
इस अवसर पर डॉ. गायत्री प्रसाद पांडेय (वाराणसी), प्रो. कृपाराम त्रिपाठी (बलरामपुर), प्रो. कृष्णकांत शर्मा (वाराणसी), डॉ. बाबूलाल मिश्र (प्रयागराज), प्रो. प्रयाग नारायण मिश्र (प्रयागराज), डॉ. चंद्रभूषण झा (दिल्ली), प्रो. मूलचन्द (झुंझुनूं) एवं डॉ. आशा सिंह रावत (दिल्ली) को भी “संस्कृत महामहोपाध्याय” की मानद उपाधि से सम्मानित किया गया।
समारोह में सम्मेलन के अनेक पदाधिकारी, विद्वान एवं साहित्यप्रेमी उपस्थित रहे। प्रो. डॉ. मूलचन्द को यह प्रतिष्ठित मानद उपाधि प्राप्त होने पर राजकीय लोहिया महाविद्यालय परिवार एवं संस्कृत प्रेमियों में विशेष उत्साह एवं प्रसन्नता का वातावरण है।
