Month: March 2026

होली मिलन पर चौहटन विद्यायक मा. आदुराम मेघवाल द्वारा 25000 रूपए का आर्थिक सहायोग

बाड़मेर। राजस्थान मेघवाल परिषद बाड़मेर द्वारा समाज के आर्थिक दष्ट्रि से कमजोर छात्रों हेतु संचालित की जा रही अध्ययन गौद योजना में होली मिलन के शुभ अवसर पर चौहटन विद्यायक…

“इतराता रह गया वो….अपनी “चालाकियों” पर,उसे समझ भी ना थी….उसने “खोया” क्या है ?”

*इतराता रह गया वो अपनी “चालाकियों” पर। उसे लगता रहा कि उसने हर परिस्थिति को अपने पक्ष में मोड़ लिया है। परिवार में, कार्यालय में और समाज में उसने शब्दों…

“जमाना बड़ा अजीब है यहां धोखा देने…वाला भी बड़े तहज़ीब से बात करता है…।।”

*जमाना बड़ा अजीब है। यहां धोखा देने वाला भी बड़े सलीके से बात करता है, और उसकी आवाज़ में ऐसा अपनापन घुला होता है कि सुनने वाला उसे अपना हमदर्द…

“प्रेम, विश्वास और मर्यादा की सीमाओं को लांघती असंवेदनशील मानसिकता!”

आधुनिक बनने की होड़ में मनुष्य का रवैया (व्यवहार) अक्सर संतुलन खो देता है। आज मॉडर्निटी (आधुनिकता) को केवल बाहरी दिखावे से जोड़ दिया गया है, जबकि वास्तविक प्रगति विचारों…

“सशक्तिकरण बनाम रैंक की दौड़: हाशिए के समुदायों की शिक्षा की वास्तविक चुनौती!”

हमारे देश में अब बच्चे केवल जन्म नहीं लेते, बल्कि एक परीक्षा का “अटेम्प्ट” बनकर दुनिया में आते हैं। यह प्रवृत्ति विशेष रूप से अनुसूचित जाति और जनजाति समुदायों के…

“अकादमिक स्वतंत्रता, नैतिक साहस और तथ्य आधारित हस्तक्षेप की अनिवार्य सामाजिक भूमिका!”

भूमिका एक समाचारपत्र में उल्लेख है कि एआई समिट में हुए युवा कांग्रेस के प्रदर्शन की 160 शिक्षाविदों ने निंदा की। प्रश्न केवल एक घटना का नहीं, बल्कि व्यापक जिम्मेदारी…

“अकेलेपन की भूख से आत्मा के उत्सव तक की अंतर्मुखी आध्यात्मिक यात्रा!”

जब साथ की चाह मिटे और आत्मबोध की ज्योति स्वयं प्रज्वलित हो जब कैसे महसूस होता है?अकेलापन और एकांत देखने में समान प्रतीत होते हैं, पर उनके अर्थ और प्रभाव…

“अगर मंदिर-मस्जिद और पड़ोसी दुश्मनी खत्म हो जाए तो न्यूज़रूम में सन्नाटा छा जाएगा!”

कहते हैं कि पत्रकार लोकतंत्र का चौथा स्तंभ होते हैं। पर हमारे कुछ महाशय ऐसे हैं जिनके लिए यह स्तंभ नहीं, “स्टूडियो का स्टंट” है। कल्पना कीजिए, अगर देश में…

” स्त्री के अस्तित्व पर समाज की कसौटी और दोहरे मापदंडों का कठोर सच!”

समाज की रिवायत (परंपरा) ने स्त्री के जीवन को एक अदृश्य घेरे में बाँध रखा है। यह घेरा किसी स्टैंडर्ड (मापदंड) की तरह काम करता है, जहाँ हर मुस्कान, हर…

‘संवेदनाओं की तपिश में पका हुआ युवक और जीवनसंगिनी की अनकही चाह!”

मैं पैंतीस वर्ष का एक साधारण युवक हूँ। जीवन की इस अवस्था में जब अधिकतर मित्र अपनी-अपनी गृहस्थी में रच-बस गए हैं, मैं अब भी प्रतीक्षा में खड़ा हूँ। कभी-कभी…