“कुछ तो सबर कर ऐ जिन्दगी,वंचित को थोड़ा संवर जाने दे,तेरा अगला जख्म भी सह लेगा,पहले का तो भर जाने दे..।”
(1)भारतीय समाज की संरचना में वंचित समुदाय की पीड़ा किसी छिपी हुई कहानी नहीं, बल्कि खुली हुई सच्चाई है। सदियों पुरानी जातिगत व्यवस्था ने उनके जीवन को इस तरह जकड़…
