शिक्षा के साथ साथ जागरूक होना भी अधिक जरूरी है–
ओजस्वी

ना तो गुलाम रहो,ना ही किसी को भी गुलाम बनाओ।

जोधपुर 22 मई , दास प्रथा उन्मूलन दिवस पर सामाजिक क्रान्ति बदलाव , सामाजिक चिंतक ,स्वतंत्र लेखक मदन सालवी ओजस्वी ने बताया कि इस दिवस पर हम आज महान समाज सुधारक महात्मा ज्योति बा फूले, सावित्रीबाई फूले, सॅविधान निर्माता बाबासाहेब डाक्टर भीमराव अम्बेडकर, महान समाज सुधारक ई वी रामास्वामी पेरियार
तथा अन्य सभी समाज सुधारक महान लोगों को याद करते है,उनको नमन करते है,उनके बताये रास्ते पर चल कर ही हम अन्धकार से मुक्त हो सकते है।

इस अवसर पर
ओजस्वी ने प्रबुद्ध जन साथियों के साथ चर्चा करते हूऐ बताया कि
यह दिवस उन सभी महान समाज सुधारको, चिंतनशील रहे, संघर्षशील महापुरूषो को समर्पित है। जिन्होने सदियो तक रही दासता गुलामी, शोषण के विरूद्ध आवाज उठाते हूऐ, स्वतंत्रता समानता तथा सामाजिक न्याय के लिए अपना जीवन दाव पर लगा दिये। सब कुछ समर्पित कर दिया।
अभी तक के सभी देश भक्तो, वीर सपूतों, समाज सुधारकों, सॅतो को नमन करते हूऐ ओजस्वी ने बताया कि दास प्रथा एक अमानवीय व्यवस्था थी, जिसमें मनुष्यों की खरीद-फरोख्त ,उन्हे गुलामी के लिए, अपने अधिन नोकर बनाकर रहने के लिऐ मजबूर किया जाता रहा।
ओजस्वी ने बताया कि यह प्रथा दूनिया भर मे रही, खास कर भारत मे भी इसकी अधिकता रही, जाति आधारीत, ऊंच-नीच भेदभाव, असमानता नफ़रत अन्याय शोषण लगातार होते रहे।
18 वी तथा 19 वीं सदी में विश्व भर मे दास प्रथा के खिलाफ़ सामाजिक क्रान्ति के अग्रदूत लोगों ने आन्दोलन किये।

अन्याय परक व्यवस्था के विरूद्ध लड कर, कानून बनवाये।

भारत में जाति व्यवस्था भेदभाव ऊंच-नीच चरम पर था
ओजस्वी ने इस अवसर पर आह्वान किया कि शिक्षा के साथ साथ अब जागरूक व चैतन होना भी अधिक आवश्यक है। बिना जागरूकता के हम अंधकार से बाहर नही निकल सकते।
विज्ञानवादी व मानवतावादी आचरण से ही हम समानता सदभाव स्थापित कर सकते है। हम सभी संविधान के मुल्यों को जीवन में अपनाकर सार्थक बदवाव अपने आप में ला सकते है।

मदन सालवी ओजस्वी
स्वतंत्र लेखक, भारतीय मिशन मीडीया भारत
95888-32673

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