आ किला की मजबूती है सा
ई नींव में चोखा भाटा और राजाराम की रूह है सा

राव जोधा ने नवी राजधानी को मन में नयो विचार आयो सा
ढूंढता ढूंढता चिड़िया टुकपर घोड़ा का पग रुकवाया हा
मन ही राजी करने की एसो गढ़ बनाऊला
कि दिन उगे मारे आग़णे और सारी बस्ती देख पाऊंला
ओ ही अटल विचार है सा
आ किला की मजबूती है सा……

राव जी के मन महला में एक अड़चन आई ही
चिड़ियानाथ के शब्द बाना सु
सारी मंगरी थर्राई ही
मारे श्राप सु पानी को तो काल पडलो
नींव को भाटों हर बार ढहलो
राजा किसया गढ़ की बात करो हो ओ मेहरानगढ़ भी थारे सपना में रहवलो
इति बात सुन ने राव जी हाथ जोड़ समाधान मांग लियो
कहे नाथ सुनो राजा संता की बाता है अति न्यारी
गढ़ मेहरान रे कारने जीवित समाधि की करो तैयारी
इशू श्रॉप मुक्त हो जावे सा
आ किला की मजबूती है सा
ई नींव में चोखा……

राव जी के हलकारा ने सारों मारवाड़ ही छान लियो
गढ़ में समाधि कारने मर्द को जायो एक भी ना मिल्यो
दिन बितया जू ही रात बीत गई
एक दिन राजाराम आगे आयो हो
महाराज मारे प्राणों सु बढ़कर मेहरानगढ़ राजे है
हंसता हंसता शीश देवूला धरा पर गढ़ विराजे है
ओ ही मारो आखिरी वचन है सा
आ किला की मजबूती है सा
ई नींव चोखा भाटा…….

कहे राव जी सुनो राजा राम
कोण सी भौम से विराजो हो
में शाहपुरा में जन्मियों माता केसर को लाल हु में
गोरा बाई को सिंदूर कहीजे
माणक और मेगा संग खेलयो वो ही बाल गोपाल हूं में
त्याग, बलिदान भक्ति को प्रतीक
मेघवंश का सपूत राजाराम हु में
शीश देवन ने आयो हूं मारी स्वामिभक्ति स्वीकार करो
और ई नींव को मोटो भाटो मारे मस्तक पर धरो
राव जी के मुखारविंद सु
ये ही निकालिया हा
जब तक धरा रहवेली
राजाराम अमर रहवेलो
पीढ़ियां पीढि़यां सु थारो वंश जीवलो
कहे धोधावत आ बचना की सच्ची डोर है सा
आ किला की मजबूती है सा
ई नींव में चोखा भाटा और राजाराम की रूह है सा

राव जोधा ने नवी राजधानी को मन में नयो विचार आयो सा
ढूंढता ढूंढता चिड़िया टुकपर घोड़ा का पग रुकवाया हा
मन ही राजी करने की एसो गढ़ बनाऊला
कि दिन उगे मारे आग़णे और सारी बस्ती देख पाऊंला
ओ ही अटल विचार है सा
आ किला की मजबूती है सा……

राव जी के मन महला में एक अड़चन आई ही
चिड़ियानाथ के शब्द बाना सु
सारी मंगरी थर्राई ही
मारे श्राप सु पानी को तो काल पडलो
नींव को भाटों हर बार ढहलो
राजा किसया गढ़ की बात करो हो ओ मेहरानगढ़ भी थारे सपना में रहवलो
इति बात सुन ने राव जी हाथ जोड़ समाधान मांग लियो
कहे नाथ सुनो राजा संता की बाता है अति न्यारी
गढ़ मेहरान रे कारने जीवित समाधि की करो तैयारी
इशू श्रॉप मुक्त हो जावे सा
आ किला की मजबूती है सा
ई नींव में चोखा……

राव जी के हलकारा ने सारों मारवाड़ ही छान लियो
गढ़ में समाधि कारने मर्द को जायो एक भी ना मिल्यो
दिन बितया जू ही रात बीत गई
एक दिन राजाराम आगे आयो हो
महाराज मारे प्राणों सु बढ़कर मेहरानगढ़ राजे है
हंसता हंसता शीश देवूला धरा पर गढ़ विराजे है
ओ ही मारो आखिरी वचन है सा
आ किला की मजबूती है सा
ई नींव चोखा भाटा…….

कहे राव जी सुनो राजा राम
कोण सी भौम से विराजो हो
में शाहपुरा में जन्मियों माता केसर को लाल हु में
गोरा बाई को सिंदूर कहीजे
माणक और मेगा संग खेलयो वो ही बाल गोपाल हूं में
त्याग, बलिदान भक्ति को प्रतीक
मेघवंश का सपूत राजाराम हु में
शीश देवन ने आयो हूं मारी स्वामिभक्ति स्वीकार करो
और ई नींव को मोटो भाटो मारे मस्तक पर धरो
राव जी के मुखारविंद सु
ये ही निकालिया हा
जब तक धरा रहवेली
राजाराम अमर रहवेलो
पीढ़ियां पीढि़यां सु थारो वंश जीवलो
कहे धोधावत आ बचना की सच्ची डोर है सा
आ किला की मजबूती है सा
ई नींव में चोखा भाटा और राजाराम की रूह है सा

लेखक – मुकेश कुमार धोधावत
राजियावास, ब्यावर

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