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रक्तकोष फाउंडेशन जिला बूंदी सचिव सीताराम मीणा ने उत्तर प्रदेश में किया रक्तदान

बूंदी। रक्तकोष फाउंडेशन जिला बूंदी अध्यक्ष रामलक्ष्मण मीणा नर्सिग ऑफिसर व रामलाल मीणा ने बताया कि उत्तर प्रदेश में सोनभद्र जिले की तहसील दुद्धी में 15 मार्च 2026 को वीर…

“UPSC कोचिंग का मायाजाल: सपनों का बाज़ार, परिवारों की उम्मीदों का शोषण और शिक्षा का ख़तरा ?”

भूमिका आधुनिक भारत में प्रशासनिक सेवा पाने का सपना एक ऐसा ख़्वाब (सपना) बन गया है जिसने लाखों परिवारों को अपनी ओर आकर्षित किया है। माता-पिता अपने बच्चों को अधिकारी…

अध्ययन गोद योजना में कोडेचा परिवार का लंबा सफर

मातृ शक्ति श्रीमती प्रेमी कोडेचा धर्मपत्नी स्मृतिशेष उम्मेदाराम कोडेचा कार्यालय कनिष्ठ सहायक राउमावि रानीगांव निवास रामनगर रीको एरिया ने बाड़मेर द्वारा संचालित अध्ययन गोद योजना बाड़मेर में 2018-19 से लगातार…

पढ़ाई मोटो काम

समय बड़ों चतूर,टाबरां ने पढ़ने मेलों कोनी।पढ़ाई बड़ों ज्ञान दाम थे जाणौं कोनी।।लिलाट आखां दिनीं दोय, पढ़ाई बिनां लागों अन्धा।लिखियोडां आखर जाणौं कोनी,भटकट फिरोथे बन्धा।।समय बड़ों चतूर टाबरां ने पढ़ने…

सांचौर में कांशीराम जयंती पर बहुजन समाज पार्टी का जोन स्तरीय समारोह आयोजित

सांचौर। बहुजन समाज पार्टी राजस्थान प्रदेश के जोन नंबर-4 के तत्वावधान में परम पूज्य मान्यवर कांशीराम की 92वीं जयंती के अवसर पर जोन स्तरीय जयंती समारोह का आयोजन हाड़ेतर,सांचौर में…

आत्म-बोध एवं सामाजिक पुनर्जागरण: प्रबुद्ध समाज की ओर एक कदम

प्रस्तावनावैचारिक क्रांति का बीजपरिवर्तन की प्रक्रिया कभी भी बाहर से नहीं, बल्कि सदैव भीतर से प्रारंभ होती है महान समाज सुधारक डॉ. बी.आर. अम्बेडकर ने कहा था कि गुलाम को…

“युद्ध का फैसला कुछ लोग करते हैं, लेकिन उसकी असली कीमत हमेशा आम जनता चुकाती है!”

भूमिका इतिहास कई बार बहुत शांत स्वर में, परन्तु अत्यंत कठोर सत्य के साथ सामने आता है। 1919 में पेरिस में आयोजित शांति सम्मेलन में प्रथम विश्व युद्ध के बाद…

“कांशीराम की सीख: मज़बूत सामाजिक जड़ें ही टिकाऊ राजनीति की आधारशिला बनाती हैं, यही असली परिवर्तन!'”

भूमिका भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में कांशीराम का नाम सामाजिक चेतना के एक बड़े आंदोलन से जुड़ा हुआ है। उन्होंने राजनीति को केवल सत्ता प्राप्ति का माध्यम नहीं माना, बल्कि…

“वंचित ‘मां’ कहती हैं… कभी किसी के साथ बुरा मत करना,वंचित ‘पापा’ कहते हैं… अपने साथ भी मत होने देना!”

भूमिकाभारत के सामाजिक इतिहास में वंचित समाज ने सदियों तक अन्याय, उपेक्षा और भेदभाव का सामना किया है। यह वह समाज है जिसे कभी शिक्षा से दूर रखा गया, कभी…

“वंचित समाज की असली चुनौती: बाहरी शोषण से अधिक खतरनाक बनती अंदरूनी कलह और आत्मघाती प्रवृत्ति!'”

भूमिका आज के सामाजिक परिदृश्य में वंचित समाज के भीतर एक चिंताजनक प्रवृत्ति उभरती दिखाई दे रही है। जिस समाज ने सदियों तक अन्याय और भेदभाव का सामना किया, उसी…