Author: wp_client

‘संवेदनाओं की तपिश में पका हुआ युवक और जीवनसंगिनी की अनकही चाह!”

मैं पैंतीस वर्ष का एक साधारण युवक हूँ। जीवन की इस अवस्था में जब अधिकतर मित्र अपनी-अपनी गृहस्थी में रच-बस गए हैं, मैं अब भी प्रतीक्षा में खड़ा हूँ। कभी-कभी…

” विश्वास और वफ़ा के बिना प्रेम का कोई वृतांत पूर्ण नहीं हो सकता?”

जब लफ्ज़ कागज़ पर उतरते हैं तो वे केवल अभिव्यक्ति नहीं रहते, वे जीवन का वृतांत बन जाते हैं। हर रिश्ता भी एक जीवंत कहानी है, जिसे समय अपनी स्याही…

“भौतिक सफलता बनाम आंतरिक शांति: आधुनिक मनुष्य की सबसे बड़ी आध्यात्मिक दुविधा?”

आँख नींद मांग रही है, दिमाग़ दौलत… दिल प्यार… और रूह सुकूनमनुष्य एक अद्भुत संगम है—शरीर, मन, दिल और आत्मा का। लेकिन जब ये चारों एक ही दिशा में न…

“हुनर रखो सच और झूठ परखने का, क्योंकिकानों में ज़हर घोलना काम है ज़माने का…”

भारतीय समाज एक विराट वृक्ष की तरह है—जड़ों में परंपरा, तने में संस्कार और शाखाओं में संबंधों की हरियाली। किंतु इसी वृक्ष के भीतर कहीं-कहीं दीमक भी लग जाती है,…

“जब शब्द बनते हैं हथियार, और इंसानियत को सरेआम जलील किया जाता है!”

कांटे तो बस यूँ ही बदनाम हैं, लोगों को चुभती तो ‘बातें’ ज़्यादा हैं ! प्रकृति के कांटे दिखाई देते हैं, इसलिए उनसे बचाव संभव है; पर मनुष्य की वाणी…

“हस्ताक्षर मिट जाते हैं समय की धूल में, पर सच्चा प्रेम चेतना पर शाश्वत अंकन करता है!”

“याद रहे… प्रेम अनपढ़ है, ये हस्ताक्षर नहीं करता, छाप छोड़ता है।” यह पंक्ति प्रेम की उस मौलिक प्रकृति को उजागर करती है, जो औपचारिकताओं से परे है। प्रेम किसी…

“सामाजिक चेतना का संदेश!

(अनुसूचित जाति–जनजाति समाज के संदर्भ में) “जमाना बड़ा अजीब है यहां धोखा देने वाला भी बड़े तहज़ीब से बात करता है…।” अनुसूचित जाति और जनजाति समाज भारत की सबसे श्रमशील,…

“बेवजह परेशान होना छोड़ दे ए जिंदगीजिसमे मिले सुकून तूँ राह चुन वही ए जिंदगी ..!!”

बेवजह परेशान होना छोड़ दे, ए जिंदगीआज का जीवन तेजी और तनाव से भरा है। हर व्यक्ति भविष्य की चिंता, डर और असुरक्षा से गुजरता है। कभी अतीत की यादें…

“इंसान खिलौना है समय की मुट्ठी में कैदबस इत्ती सी हमारी हैसियत हम में गुरूर हजार।”

इंसान खिलौना है समय की मुट्ठी में कैद! 1:जीवन का सबसे बड़ा सच यह है कि इंसान समय के जाल में फँसा हुआ है। वह अपने जीवन के अधिकांश क्षणों…

“कोई सस्ता सा इलाज बताना ग़ालिब …गरीब को इश्क हुआ है महंगाई के दौर में।”

गरीब को इश्क़ (प्यार) हुआ है, और यह इश्क़ केवल दिल का नहीं, बल्कि आत्मा का है। इस इश्क़ में वह माशूक़ (प्रिय) नहीं, बल्कि परवरदिगार है। उसकी आँखों में…