Author: wp_client

सामाजिक दबाव, मानसिक तनाव और संस्थागत अड़चनों के बावजूद SC/ST छात्रों की सफलता की कहानी !!

1– 2004–2009 — पहला कदम: सपना, दल और संघर्ष की शुरुआत जब 2004 और 2009 के बीच मनिष, राजेंद्र, विशाल और उनके साथी जैसे 35 युवा SC/ST छात्रों ने वर्धमान…

“क्या भारत का प्राइवेट सेक्टर नवाचार का इंजन है या सिर्फ मुनाफे की मशीन बन चुका है आज”??”

भूमिकाभारत को “विकसित राष्ट्र” बनाने का सपना अक्सर उद्योगपतियों, स्टार्टअप्स और कॉरपोरेट जगत की चमकती कहानियों से जोड़ा जाता है। हमें बार-बार बताया जाता है कि प्राइवेट सेक्टर ही इनोवेशन…

संविधान का वादा बनाम ज़मीनी हक़ीक़त — विश्वविद्यालयों में टूटता भरोसा, बढ़ती खामोशी!

भूमिका29 जनवरी 2026 कई विद्यार्थियों के लिए कैलेंडर की तारीख नहीं, टूटे भरोसे की चुभन बनकर लौटी। जिन नियमों से कैंपस में बराबरी की हल्की-सी रोशनी आई थी, उन पर…

शोर के दौर में शख़्सियत की असली ताक़त: सात सामाजिक नियम जो ज़िंदगी बदल देते हैं!

समाज हमें पढ़ाई, नौकरी और प्रतिस्पर्धा सिखाता है, लेकिन असली जीवन जीने के सामाजिक उसूल (सिद्धांत) कोई किताब नहीं सिखाती। रिश्तों, प्रतिष्ठा और व्यवहार की दुनिया में कुछ अनकहे नियम…

“जब भक्ति बनती है व्यवसाय, और अंधविश्वास समाज की चेतना को निगल जाता है!”

भूमिका हर कुछ वर्षों में वही पटकथा (कहानी-ढांचा) दोहराई जाती वही नया आश्रम, नया चेहरा, पुरानी कहानी। कोई स्वयंभू गुरु, कोई “अवतार”, कोई पवित्रता का ठेकेदार; फिर आरोप, खुलासे, गिरफ़्तारियाँ…

“संघर्ष से कॉकपिट तक: वंचित (एससी एसटी)समाज के बच्चों के लिए पायलट करियर गाइड”

भूमिका देश के अनेक एससी-एसटी परिवार सीमित साधनों में जीवन जीते हुए भी अपने बच्चों के लिए बड़े सपने सँजोए रहते हैं। इन घरों के बच्चे मुश्किल हालातों में पलते…

संत रविदास की जयंती मनाई

बलाई विकास समिति की बैठक संपन्न चौमूं (सुरेन्द्र सिंह हरसोलिया)। शहर के मोरीजा रोड स्थित बलाई समाज सभा-भवन में रविवार को बलाई विकास समिति, जयपुर (मुख्यालय-चौमूं) की बैठक वरिष्ठ समाजसेवी…

“निजी क्षेत्र में अनुसूचित जाति और जनजाति का आरक्षण: सामाजिक इंसाफ (न्याय) से राष्ट्रीय विकास तक!”

भूमिकाभारत का संविधान केवल काग़ज़ पर लिखा विधान नहीं, बल्कि हर नागरिक के हक़ (अधिकार), इंसाफ (न्याय) और इज़्ज़त (सम्मान) की जीवित प्रतिज्ञा है। अनुसूचित जाति और जनजाति समाज ने…

“मौन से आंदोलन तक: नई पीढ़ी और सामाजिक न्याय की दस्तक”

भूमिकादेश बदल रहा है — धीरे, चुपचाप, लेकिन गहराई से। आज का युवा सिर्फ़ नौकरी या डिग्री के लिए नहीं लड़ रहा, वह हक़ (अधिकार), इज़्ज़त (सम्मान) और बराबरी की…

“पहली ही सुनवाई में स्टे से बहुजन विश्वास पर चोट या न्यायपालिका-सरकार की नूरा कुश्ती का संकेत?”

भूमिका 29 जनवरी 2026 का दिन अनेक लोगों के लिए सिर्फ एक अदालती तारीख नहीं, बल्कि एक गहरा एहसास (भावना) बन गया। सुप्रीम कोर्ट द्वारा यूजीसी इक्विटी (समानता) रेगुलेशंस (नियमावली)…